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== सैन्यविज्ञान का अन्य विषयों से सम्बन्ध == सैन्यविज्ञान ज्ञान की एक शाखा होने के कारण उसका अन्य शाखाओं से सम्बन्ध होना स्वाभाविक एंव अनिवार्य है। === सैन्य विज्ञान तथा भूगोल === भौगोलिक परिस्थितियों का प्रत्यक्ष प्रभाव सैनिक योजनाओं, शस्त्रास्त्रों, संक्रियाओं, साज-सज्जा एवं समरतान्त्रिक चालों पर पड़ता है। यही कारण है कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरुप ही सुरक्षा व्यवस्था अपनानी पड़ती है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध ब्रिटिश जनरल वावेल का कहना है कि- ''किसी स्थान का भूगोल ही वहां होने वाली लड़ाइयों के स्वरूप को सुनिश्चित करता है।''[11] भौगोलिक तथ्यों की उपेक्षा कर कोई भी सेना युद्ध में विजय प्राप्त नहीं कर सकती। === सैन्य विज्ञान तथा इतिहास === [[इतिहास]] से हमें मानव जाति की संस्कृति एवं सभ्यता से सम्बन्धित समस्त जानकारी मिलती है जिसके अभाव में युद्धों का अध्ययन अधूरा ही है। विगत युद्धों के जय-पराजय का विश्लेषण ही वर्तमान एवं भविष्य के युद्धों का आधार होता है। युद्ध के देवता के नाम से विख्यात प्रसिद्ध सेनापति नेपोलियन बोनापार्ट का कथन है कि- महान सेनानायकों के अभियानों का बार-बार अध्ययन एवं मनन करो, उन्हें अपना आदर्श बनाओ। युद्ध कला के भेदों को जानने तथा एक महान सेनानायक बनने का यही रहस्य है।[12] === सैन्य विज्ञान तथा अर्थशास्त्र === धन के बिना सैन्य संगठन सम्भव नहीं है। आर्थिक दृष्टि से सबल राष्ट्र के लिए अपना सैनिक विकास करना भी दुष्कर होता है क्योंकि सेना की संख्या एवं सशस्त्र सेनाओं का प्रकार, उपयुक्त सैन्य योजना आदि का आधार पूर्णतः राष्ट्र विशेष के आर्थिक स्रोतों पर रहता है। [[कार्ल मार्क्स]] के अनुसार, ‘‘किसी युग के सम्पूर्ण सामाजिक जीवन के स्वरूप का निश्चय आर्थिक परिस्थितियां ही करती है।[13] आधुनिक युद्ध अत्यन्त खर्चीले होते हैं जिसकी यौद्धिक आवश्यकताओं की आपूर्ति करना बहुत कठिन है। === सैन्य विज्ञान तथा राजनीति विज्ञान === सुन्तजू ने लिखा है युद्ध राज्य का एक आवश्यक अंग है ओर शूमैन भी कहते हैं कि युद्ध राज्य शक्ति का अन्तिम हथियार है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध जर्मन सैन्य विशेषज्ञ क्लाजविट्ज का यह कथन उल्लेखनीय है कि ''राज्य अपनी नीतियों को क्रियान्वित करने के लिए युद्ध का सहारा लेता है।''[14] आज युद्ध की प्रकृति बदल गई है देश के प्रत्येक नागरिक को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष ढंग से युद्ध में योगदान करना होता है। === सैन्य विज्ञान तथा मनोविज्ञान === सेना एक प्रकार का सामाजिक संगठन होता है जिसमें अनुशासन, मनोबल, नेतृत्व, साहस, भय, प्रचार, देशभक्ति की भावना, चिन्ता, मनोग्रस्तता जैसे मानसिक तत्वों का बहुत महत्त्व है। आज के युद्ध मनोवैज्ञानिक युद्ध होते है जिसमें वास्तविक लड़ाई के पहले ही शत्रु के यौद्धिक मानसिकता का विघटन करना होता है। [[एडोल्फ़ हिटलर|हिटलर]] का कथन सैन्य विज्ञान एवं मनोविज्ञान के गहरे सम्बन्ध को दर्शाता है कि वास्तविक लड़ाई एक गोली चलने के पहले ही लड़ा जाता है। इस सम्बन्ध में कौटिल्य ने कहा है कि, ‘‘एक धनुषधारी के धनुष से छोड़ा हुआ बाण सम्भव है किसी एक भी सैनिक को न मारे, परन्तु बुद्धिमान व्यक्ति के द्वारा किया गया बुद्धि का प्रयोग गर्भ स्थित प्राणियों को भी नष्ट कर देता है।[15] === सैन्य विज्ञान तथा भौतिकशास्त्र === विज्ञान एवं तकनीक का प्रभाव यदि जीवन के किसी एक क्षेत्र में सबसे ज्यादा पड़ता है तो वह है सैन्य क्षेत्र। मानव सभ्यता के विकास में पचास प्रतिशत से अधिक खोजों का उद्देश्य सैनिक आवश्यकता रही है। अपरम्परागत तथा सम्पूर्ण युद्ध की अवधारणा के पीछे आधुनिक वैज्ञानिक एवं तकनीकि विकास है। आणविक शस्त्रास्त्रों एवं प्रक्षेपास्त्रों के संहारक क्षमता के संदर्भ में प्रसिद्ध वैज्ञानिक [[अल्बर्ट आइंस्टीन|आइंस्टीन]] ने लिखा है कि, ‘‘मैं नहीं जानता कि तृतीय विश्वयुद्ध में किन-किन हथियारों का इस्तेमाल होगा? किन्तु मैं निश्चित रूप से यह बता सकता हूं कि चतुर्थ विश्व युद्ध में किन हथियार का इस्तेमाल होगा, अर्थात् पत्थर।[16] यह कथन आधुनिक प्रौद्योगिकी के सैन्य प्रयोग से मानव अस्तित्व पर बने संकट को दर्शाता है। === सैन्य विज्ञान तथा रसायनशास्त्र === युद्ध में सफलता प्राप्त करने के लिए विषैले रसायनों का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। [[अथर्ववेद संहिता|अथर्ववेद]], [[मार्कण्डेय पुराण]], [[विष्णुधर्मोत्तर पुराण]], [[कामन्दकीय नीतिसार], [[शुक्रनीति]] शास्त्र, [[पञ्चतन्त्र|पंचतंत्र]], [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|कौटिल्य अर्थशास्त्र]], [[मनुस्मृति]] तथा [[वृहत् संहिता]] आदि ग्रंथों में ऐसे अनेक प्रकार के हथियारों का उल्लेख है जिनके द्वारा रणक्षेत्र में आग लगाना, घनघोर वर्षा करना, बादलों की गरज, चारों ओर से अन्धकार पैदा करना आदि किया जाता था।[17] आधुनिक युद्ध में धुंआ फैलाने वाली, दम घोटने वाली, आंखों में जलन पैदा करने वाली, त्वचा को जलाने वाली जैसे कई प्रकार के विषैले रसायनों का प्रयोग किया जाता है। जिसके कारण ही रसायनिक युद्धकला का जन्म हुआ है। === सैन्य विज्ञान तथा जीवविज्ञान === जैविक कारकों के द्वारा शत्रु के भोजन, पानी एवं खाद्य सामग्री को विषाक्त करके उसके स्वास्थ्य को कमजोर कर उसके युद्ध करने की मानसिक शक्ति का विघटन करने की हर सम्भव कोशिश की जाती है। विभिन्न प्रकार के बीमारियों के जीवाणुओं को विभिन्न साधनों से शत्रु तक पहुंचाया जाता है। विषैले जीवाणुओं से उत्पन्न रोग से केवल सैनिक ही प्रभावित नहीं होते अपितु नागरिकों पर भी इसका बराबर असर होने के कारण शत्रु का मनोबल गिर जाता है जिससे उसकी सैनिक सामर्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उपरोक्त वर्णित विषयों के अलावा अन्य विषय जैसे [[कम्प्यूटर विज्ञान]], [[सामाजिक विज्ञान]] इत्यादि से भी सैन्य विज्ञान का गहरा सम्बन्ध है।
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