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== ग्रहीय मण्डल == ग्रहीय मण्डल उसी प्रक्रिया से बनते हैं जिस से तारों की सृष्टि होती है। आधुनिक खगोलशास्त्र में माना जाता है की जब अंतरिक्ष में कोई [[आणविक बादल|अणुओं का बादल]] [[गुरुत्वाकर्षण]] से सिमटने लगता है तो वह किसी तारे के इर्द-गिर्द एक [[आदिग्रह चक्र]] (प्रोटोप्लैनॅटेरी डिस्क) बना देता है। पहले अणु जमा होकर धूल के कण बना देते हैं, फिर कण मिलकर डले बन जाते हैं। [[गुरुत्वाकर्षण]] के लगातार प्रभाव से, इन डलों में टकराव और जमावड़े होते रहते हैं और धीरे-धीरे मलबे के बड़े-बड़े टुकड़े बन जाते हैं जो वक़्त के साथ-साथ ग्रहों, उपग्रहों और अलग वस्तुओं का रूप धारण कर लेते हैं।<ref>[http://www.daviddarling.info/encyclopedia/P/plansysform.html planetary systems, formation of] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110604073053/http://www.daviddarling.info/encyclopedia/P/plansysform.html |date=4 जून 2011 }}, David Darling, ''The Internet Encyclopedia of Science''</ref> जो वस्तुएँ बड़ी होती हैं उनका गुरुत्वाकर्षण ताक़तवर होता है और वे अपने-आप को सिकोड़कर एक गोले का आकार धारण कर लेती हैं। किसी ग्रहीय मण्डल के सृजन के पहले चरणों में यह ग्रह और उपग्रह कभी-कभी आपस में टकरा भी जाते हैं, जिससे कभी तो वह खंडित हो जाते हैं और कभी जुड़कर और बड़े हो जाते हैं। माना जाता है के हमारी [[पृथ्वी]] के साथ एक [[मंगल (ग्रह)|मंगल ग्रह]] जितनी बड़ी वस्तु का भयंकर टकराव हुआ, जिस से पृथ्वी का बड़ा सा सतही हिस्सा उखाड़कर पृथ्वी के इर्द-गिर्द [[परिक्रमा]] में चला गया और धीरे-धीरे जुड़कर हमारा [[चन्द्रमा]] बन गया।
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