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== सत्रहवीं सदी == 17वीं सदी इतालीय साहित्य का ह्रासकाल है। 16वीं सदी के अंत में ही काव्य में ह्रास के लक्षण दिखने लगे थे। नैतिक पतन तथा उत्साहहीनता ने उस सदी में इटली को आक्रांत कर रखा था। इस काल को बारोक्को काल कहते हैं। तर्कशास्त्र में प्रयुक्त यह शब्द साहित्य और शिल्प के क्षेत्र में अति सामान्य, भद्दी रुचि का प्रतीक है। इस युग में साहित्य के बाह्म रूप पर ही विशेष ध्यान दिया जाता था, ग्रीक रोमन कृतियों का भद्दा अनुकरण हो रहा था, कविता में मस्तिष्क् की प्रधानता हो गई थीं, अलंकारों के भार से वह बोझिल हो गई थी, एक प्रकार का शब्दों का खिलवाड़ ही प्रधान अंग हो गया था एवं कहने के ढंग ने ही प्रधान स्थान ले लिया था। इस काल के कवियों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा ज्यांबातीस्ता मारोनो (1569-1625) का; इसी कारण इस धारा के अनेक कवियों को मारोनिस्ती तथा काव्यधारा को कभी कभी मारीनिज्म कहा जाता है। मारीनो ने प्राचीन काव्य से बिल्कुल संबंध नहीं रखा, प्राचीन परंपरा से संबंध एकदम तोड़ दिया और ग्वारीनी तथा तास्सो जैसे कवियों से प्रेरणा प्राप्त की। कविता को मारोनो बौद्धिक खेल समझता था। मारीनो की कृतियों में विविध विषयों से संबंधित कविताओं का संग्रह लीरा तथा बारोक युग का प्रतिनिध काव्य आदोने है। यह कृति लंबे लंबे 20 सर्गो में समाप्त हुई हैं। कृति में वेनेरे और चीनीरो की अलंकृत शैली में प्रेमकथा कही गई है। समसामयिकों ने इसे अदोने की कला का अद्भूत नमूना कहकर स्वागत किया और अनेक कवियों को इस कृति ने प्रभावित किया। कवियों में गाब्रिएल्लो-क्याबरेरा (1552-1638) फुलियो नेस्ती, फ्रांचेस्को ब्राच्योो लीनी (1566-1545) तथा कथासाहित्य और नाट्यसाहित्य के क्षेत्र में फेदेरीक़ो देल्ला वाल्ले (मृत्यु 1628), ज्योवान्नी देल्फीनो (मृत्यु 1619) आदि मुख्य हैं। इस सदी में बोलियों में भी काव्यरचना हुई। रोमानो में ज्यसेघे बेरनेरी आदि ने तथा हास्य-व्यंग्य-काव्य की ज्यांबातीस्ता बासीले (1575-1632) ने अच्छी रचनाएँ की। 17वीं सदी के अंतिम वर्षों तथा 18वीं के आरंभिक वर्षों में इटली की सांस्कृतिक विचारधारा में परिवर्तन हुआ, उसपर यूरोप की विचारधारा का प्रभाव पड़ा। किंतु इस विचारधारा के साथ इतालवी विचारकों की अपनी मौलिकता भी साथ में थी। 17वीं सदी के साहित्यिक ह्रास के प्रति इटली के विचारक स्वयं सतर्क थे। अत: नवीन विचाधारा को लेकर काफी वाद विवाद चला। काव्यरुचि को लेकर ज्यूसेफे ओरसी, आंतोन मारिया साल्वीनी, एयूस्ताकियो मांफ्रेदी आदि ने नवीन रुचि की स्थापना का प्रयत्न किया। ज्यान विंचेसो ग्रावीना (1664-1718), लूदोविको आंतोनियो मूरालोरी, आंतोनियो कोंती (1670-1749) आदि ने काव्यसमीक्षा पर ग्रंथ लिखकर नवीन मोड़ देने का प्रयत्न किया। इन्होंने यूरोप की तत्कालीन विचारधारा को इतालवी प्राचीन परंपरा के साथ समन्वित करने का प्रयत्न किया। इसी प्रकार इतिहास का भी नवीन दृष्टि से अध्ययन किया गया। साहित्य, इतिहास और काव्यसमीक्षा को नया मोड़ देनेवालों में इस सदी के सबसे प्रमुख विचारक ज्याँ बातीस्ता वीको (1668-1744) हैं। उनकी बेजोड़ कृति पिं्रचिपी दी शिएँजा नोवा (नए विज्ञान के सिद्धांत) में उनके गूढ़ विचार और गहन अध्ययन, चिंतन के परिणाम व्यक्त हुए हैं। कविता के लिए कल्पना आदि जिन आवश्यक तत्वों की उन्होंने चर्चा की उनका काव्यसमीक्षा तथा कवियों पर काफी प्रभाव पड़ा। 17वीं सदी की कुरुचि को दूर करने के लिए रोम में कुछ लेखक और विद्वानों ने मिलकर "आर्कादिया (ग्रीस के रमणीय स्थान आर्कादिया के नाम पर) नामक एक अकादमी की सन् 1690 में स्थापना की। आर्कादिया धीरे धीरे इटली की बहुत प्रसिद्ध अकादमी हो गई और उस समय के सभी कवि और लेखक उससे संपर्क रखते थे। परंपरा के भार से लदी कविता को आर्कादिया के कवियों ने एक नई चेतना प्रदान की। अनेक छोटे बड़े कवि आर्कादिया ने बनाए जिनमें एयूस्ताकियो मानफ्रेदी (1674-1739), फेरनांदो आंतोनियो गेदीनी (1684-1767), फ्रांचेस्को मारिया जानोत्ती (1692-1777), ज्याँ बातीस्ता ज़ापी (1667-1719), पाओलो रोल्ली, लुदोविको सावियोली, याकोपो वीतोरेल्ली आदि प्रमुख हैं। यद्यपि आर्कादिया ने कोई महान कवि उत्पन्न नहीं किया, किंतु फिर भी इस अकादमी ने ऐतिहासिक महत्त्व का यह सबसे बड़ा कार्य किया कि 17वीं सदी की काव्यसुरुचि को बदल दिया। आर्कादिया काल के प्रसिद्धतम लेखक पिएतरो मेतास्तासिया (1698-1782) ने इटली के रंगमंच को ऐसी कृतियाँ दीं जो कविता के बहुत समीप हैं। 18वीं सदी इटली में नाटक साहित्य की दृष्टि से बहुत समृद्ध है। येनास्तासियो ने अपने नाटकों के विषय इतिहास, लोककथा एवं ग्रीस रोम की धार्मिक अनुश्रुतियों से चुने। प्रेम और वीरता इसके नाटकों के प्रिय भाव हैं। अन्य लेखकों में दु:खांत नाटकों के लिए याकोपो नेल्ली तथा साहित्य में ज्याँ बातीस्ता कास्ती, पिएतरो क्यारी तथा विविध विषयों की सूचना से समन्वित संस्मरण लिखनेवाले प्रसिद्ध ज्योकोमो कासानोवा (1725-1798) उल्लेखनीय हैं। कासानोवा अपने मेम्वायर्स (संस्मरण) के लिए सारे यूरोप में प्रसिद्ध हैं। बोलियों में कविता लिखनेवालों में ज्योवान्नी मेली (1740-1815) की बूकोलिका प्रसिद्ध कृति है।
सारांश:
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