सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
इस्लाम का इतिहास
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
=== अब्बासी === [[चित्र:Abbasids Baghdad Iraq 1244.JPG|thumb|right|320px|अब्बासियों का सन् १२४४ का सिक्का]] सन् 940 में एक अबू मुस्लिम नाम के एक फ़ारसी (ईरानी) मुस्लिम परिवर्तित ने उमय्यदों के खिलाफ एक विशाल जनमानस तैयार किया। उसने [[खोरासान]] (पूर्वी ईरान) में उम्मयदों के ख़िलाफ विद्रोह कर दिया। खोरासान में पहले से ही अरबों की उपस्थिति के खिलाफ नाराज़गी थी अतः उसको बड़े पैमाने पर जन समर्थन मिला। उसने यह कहकर लोगों को उम्म्यदों के खिलाफ सावधान किया कि वे लोग इस्लाम के सही वारिस नहीं हैं और वे सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। उमय्यदों का विलासिता पूर्ण जीवन-शैली ने इनको और भी भड़काया। सन् 949-950 के बीच उम्मयदों द्वारा भेजे गए सैनिकों को हरा दिया और इसके बाद अपना एक नया खलीफा घोषित कर दिया - अबुल अब्बास। अब्बास, मुहम्म्द के वंश से ही था पर अली के अलावे एक दूसरे भाई के द्वारा मुहम्मद साहब से जुड़ा था। पर उससे अबु इस्लाम की लोकप्रियता देखी नहीं गई और उसने अबु को फाँसी पर लटका दिया। इससे लोगों में अब्बास के खिलाफ रोष फैल गया। जिन लोगों को अब्बास पर भी भरोसा नहीं हुआ वे शिया बने - आज ईरान की 92 % जनता शिया है। हाँलांकि अब्बास और उसके वंशजों ने बगदाद में अपनी राजधानी बनाकर अगले लगभग 500 सालों तक राज किया। अब्बासियों के समय में ईरानियों को भी साम्राज्य में भागीदारी मिली। हाँलांकि वे किसी धार्मिक ओहदे पर नहीं रहे पर स्थापत्य तथा कविता जैसी कलाओं में अच्छे होने की वजह से ईरानियों को शासन का सहयोग मिला। ध्यान रहे कि कई मध्यकालीन इस्लामी विचारक, ज्योतिषी और कवि इसी समय पैदी हुए थे। [[उमर ख़य्याम]] (12वीं सदी) ने ज्योतिष विद्या में पूर्वी ईरान में एक अद्वितीय ऊँचाई छुई - एक नए पंचांग का आविष्कार किया। उन्होंने कविताओं की [[रुबाई]] शैली में महारत हासिल की और विज्ञान में कई योग दान दिए - जिसमें बीजगणित और खनिज-शास्त्र भी शामिल हैं। [[फ़िरदौसी]] (11वीं सदी, महमूद गज़नी के पिता का दरबारी) जैसे फ़ारसी कवि और [[रुमी]] (जन्म १२१५) जैसे सूफी विचारक इसी समय पैदा हुए थे। हाँलांकि इनमें से अधिकतर को बग़दाद से कोई आर्थिक-वृत्ति नहीं मिली थी पर इस में इस्लाम के धर्मशास्त्रियों की दखल का न होना ही एक बड़ा योगदान था। इस समय निस्संदेह रूप से पूरे इस्लामी साम्राज्य को, जो स्पेन से भारत तक फैला था, एक सैनिक नायक के अन्दर रखना मुश्किल था। इसलिए बग़दाद सिर्फ धार्मिक मुख्यालय रहा और स्थानीय शासक सैनिक रूप से स्वतंत्र रहे। पूर्वी ईरान में जहाँ [[सामानी]] और उसके बाद [[ग़ज़नवी]] स्वतंत्र रहे वहीं मध्य तथा पश्चिम में [[सल्जूक]] तुर्क शक्तिशाली हो गए। धर्मयुद्धों के समय (1098-1270) भी बग़दाद ने कोई बड़ी सफलता लेने में नाकामी दिखाई। वहीं सत्ता से बाहर सहे उमय्यदों के वंशजों ने स्पेन में सन् ९२९ में अपनी एक अलग ख़िलाफ़त बना ली जो बग़दाद का इस्लामी प्रतिद्वंदी बन गया। १२५८ में [[मंगोल|मंगोलों]] की तेजी से बढ़ती शक्ति ने बग़दाद को हरा दिया और शहर को लूट लिया गया। लाखों लोग मारे गए और इस्लामी पुस्तकालयों को जला दिया गया। उस समय मंगोल मुस्लिम नहीं थे लेकिन अगले १०० सालों में वे मुस्लिम बन गए।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)