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==तबले के बोल == [[File:Tabla_drums_demo.webm|thumb|तबला वादन का एक उदाहरण।]] तबले के बोलों को "शब्द", "अक्षर" या "वर्ण" भी कहते हैं। ये बोल परंपरागत रूप से लिखे नहीं बल्कि गुरु-शिष्य परम्परा में मौखिक रूप से सीखे सिखाये जाते रहे हैं। इसीलिए इनके नामों में कुछ विविधता देखने को मिलती है। अलग-अलग क्षेत्र और घराने के वादन में भी बोलों का अंतर आता है। एक ही बोल को बजाने के कई तरीकों का प्रचलन भी मिलता है। एक विवरण के अनुसार तबले के मूल बोलों की संख्या पंद्रह है जिनमें से ग्यारह दायें पर बजाये जाते हैं और चार बायें पर।<ref name="Garg2" /> नीचे डेविड कर्टनी लिखित ''"फंडामेंटल्स ऑफ़ तबला"'' और बालकृष्ण गर्ग लिखित बोलों का एक संक्षिप्त और सामान्यीकृत विवरण प्रस्तुत किया गया है<ref name="Garg2">{{cite book|author=बालकृष्ण गर्ग|title=डायमंड तबला गाइड|url=https://books.google.com/books?id=HpRWw9KrtAEC&pg=PA20|publisher=डायमंड पाकेट बुक्स|isbn=978-81-7182-445-8|pages=20–26|access-date=26 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170227064613/https://books.google.com/books?id=HpRWw9KrtAEC&pg=PA20|archive-date=27 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>: ;दाहिने के बोल: * ता/ना - किनारा पर तर्जनी (पहली) उउंगली से, ठोकर के बाद उंगली तुरंत उठ जाती है। * ती - मैदान में तर्जनी से ठोकर, उंगली तुरंत उठ जाती है। * तिन् - सियाही पर तर्जनी से ठोकर, उंगली तुरंत उठ जाती है। * ते - तर्जनी अतिरिक्त बाकी तीन उंगलियाँ (या केवल मध्यमा) से सियाही पर, गुंजन नहीं। * टे - तर्जनी अँगुरी से सियाही पर, गुंजन नहीं। * तिट - दोहरे ठोकर का बोल, ते और टे का सामूहिक रूप (अन्य उच्चारण तिर)। ;बायाँ के बोल: * धा/धे - पहिली (या दूसरी) उंगली से बीच में ठोकर, मणिबंध (कलाई का पिछला हिस्सा) "मैदान" में रखा रहता है। * क/के/गे - पूरी हथेली खुली सपाट रख दी जाती है, गुंजन नहीं। *घिस्सा - बीच में ठोकर के हथेली का पिछला हिस्सा बीच की ओर सरकाया जाता है, जिससे से गुंजन धीरे-धीरे क्रमिक रूप से बंद होता है।
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