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== अंतिम दिन == इस बीच उनके पिता की मृत्यु से तिरुमलम्बा को सदम लागा। इसलिए उन्होंने लिखना छोड़कर अधिक और अधिक अंतर्मुखी हो गए और आद्यात्मा की तरफ ध्यान दिया। आगे चलकर, उनका मन लिखने के बजाय सन्नाटा में च गया. पंचानवे उम्र में अपने लंबे जीवन की मुसीबते, लाभ और नुकसान से आगे निकालकर अपने ढंग से जीनेवाली तिरुमलम्बा इस दुनिया के लोगों के लिए एक आदर्श है. नया कन्नड़ की प्रप्रथम लेखकि, पत्रिका के संपादकी , प्रकाशकी , श्रीमती नंजनगुड तिरुमलम्बा १९८२ के अगस्त ३१ को इस जगत से परायण कर लिया. उनका जीवन, उनका जीवन में दिखाए गया प्रकाश कभी भी ना भूल सकते हैं
सारांश:
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