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== मेखला बन्धन == === शिक्षण और प्रेरणा === संस्कार के लिए तैयार मेखला शिशु की कमर में बाँधी जाती है। इसे कहीं-कहीं कौंधनी, करधनी, छूटा आदि भी कहा जाता है। यह कटिबद्ध रहने का प्रतीक है। फौजी जवान, पुलिस के सिपाही कमर में पेटी बाँधकर अपनी ड्यूटी पूरी करते हैं। शरीर सुविधा की दृष्टि से उसकी अनुपयोगिता भी हो सकती है; पर भावना की दृष्टि से कमर में बँधी हुई पेटी, चुस्ती, मुस्तैदी, निरालस्यता, स्फूर्ति, तैयारी एवं र्कत्तव्य-पालन के लिए तत्परता का प्रतिनिधित्व करती है। यह गुण मनुष्य का प्रारंभिक गुण है। यदि इसमें कमी रहे, तो उसे गयी-गुजरी, दीन-हीन स्थिति में पड़े रहकर अविकसित जीवन व्यतीत करना पड़ेगा। आलसी, प्रमादी व्यक्ति अपनी प्रतिभा एवं क्षमता को यों ही बर्बाद करते रहते हैं। ढीला-पोला स्वभाव आदमी को कहीं का नहीं रहने देता, उसके सब काम अधूरे और अस्त-व्यस्त रहते हैं, फलस्वरूप कोई आशाजनक सत्परिणाम भी नहीं मिल पाता। इस दोष को बीजांकुर बच्चे में जमने न पाए, इसकी सावधानी रखने के लिए जागरूकता एवं तत्परता का प्रतिनिधित्व करने के उद्देश्य से नामकरण संस्कार के अवसर पर कमर में मेखला बाँध दी जाती है। अभिभावक जब-जब इस मेखला को देखें, तब-तब यह स्मरण कर लिया करें कि बच्चे को आलस्य प्रमाद के दोष-र्दुगुण से बचाये रखने के लिए उन्हें प्राण-पण से प्रयतन करना है। जैसे-जैसे बच्चा समझदार होता चले, वैसे-वैसे उसके स्वभाव में मुस्तैदी, श्रमशीलता एवं काम में मनोयोगपूर्वक जुटने का गुण बढ़ाते चलना चाहिए। इस सम्बन्ध में जो हानि-लाभ हो सकते हैं, उन्हें भी समय-समय पर बताते-सिखाते, समझाते रहना चाहिए। === क्रिया और भावना === मन्त्र के साथ शिशु के पिता उसकी कमर में मेखला बाँधें। भावना करें कि इस संस्कारित सूत्र के साथ बालक में तत्परता, जागरूकता, संयमशीलता जैसी सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की जा रही है। <blockquote> '''ॐ इयं दुरुक्तं परिबाधमाना, वर्णं पवित्रं पुनतीमऽआगात्। प्राणापानाभ्यां बलमादधाना, स्वसादेवी सुभगा मेखलेयम्। -पार०गृ०सू० २.२.८ ''' </blockquote>
सारांश:
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