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== गर्भ पूजन == === शिक्षण एवं प्रेरणा === गर्भ कौतुक नहीं, एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उसे समझा जाए और उस जिम्मेदारी को उठाने की तैयारी मानसिक तथा व्यावहारिक क्षेत्र में की जाए। गर्भ के माध्यम से जो जीव प्रकट होना चाहता है, उसे ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर उसके लिए समुचित व्यवस्था बनाकर, उसके स्वागत की तैयारी करनी चाहिए। गर्भ पूज्य है। कोई पूज्य व्यक्ति सामने हो, तो अपने स्वभाव तथा परस्पर के द्वेष-वैर को भुलाकर भी शालीनता का वातावरण बनाया जाता है। गर्भ के लिए भी ऐसा ही किया जाए। गर्भ का पूजन केवल एक सामयिकता औपचारिकता न रह जाए। संस्कारित करने के लिए पूजा उपासना का सतत प्रयोग चले। घर में आस्तिकता का वातावरण रहे। गर्भिणी स्वयं भी नियमित उपासना करे। उसे आहार और विश्राम जितना ही महत्त्वपूर्ण मानकर चलाया जाए। अधिक न बने, तो गायत्री चालीसा पाठ एवं पंचाक्षरी मन्त्र 'ॐ र्भूभुवः स्वः' का जप ही कर लिया करे। === क्रिया और भावना === गर्भ पूजन के लिए गर्भिणी के घर परिवार के सभी वयस्क परिजनों के हाथ में अक्षत, पुष्प आदि दिये जाएँ। मन्त्र बोला जाए। मंत्र समाप्ति पर एक तश्तरी में एकत्रित करके गर्भिणी को दिया जाए। वह उसे पेट से स्पर्श करके रख दे। भावना की जाए, गर्भस्थ शिशु को सद्भाव और देव अनुग्रह का लाभ देने के लिए पूजन किया जा रहा है। गर्भिणी उसे स्वीकार करके गर्भ को वह लाभ पहुँचाने में सहयोग कर रही है। ॐ सुपर्णोऽसि गरुत्माँस्त्रिवृत्ते शिरो, गायत्रं चक्षुबरृहद्रथन्तरे पक्षौ। स्तोमऽआत्मा छन्दा स्यंगानि यजूषि नाम। साम ते तनूर्वामदेव्यं, यज्ञायज्ञियं पुच्छं धिष्ण्याः शफाः। सुपर्णोऽसि गरुत्मान् दिवं गच्छ स्वःपत॥ -१२.४
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