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== ऐतिहासिक प्रसंग == [[राजपूत]] जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएँ उनको माथे पर [[रोली|कुमकुम]] तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बाँधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आयेगा। राखी के साथ एक और प्रसिद्ध कहानी जुड़ी हुई है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/spiritual/religion-raksha-bandhan-here-are-story-behind-the-festival-we-celebrate-today-16448861.html|title=सावन पूर्णिमा! कलाई पर बंधी एक रेशमी धागे ने दिलाई इंद्र को विजय, तब से शुरू हुआ रक्षाबंधन|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2020-08-03}}</ref> कहते हैं, [[मेवाड|मेवाड़]] की रानी कर्मावती को [[बहादुरशाह]] द्वारा मेवाड़ पर हमला करने की पूर्व सूचना मिली। रानी लड़ऩे में असमर्थ थी अत: उसने मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा की याचना की। [[हुमायूँ]] ने [[मुसलमान]] होते हुए भी राखी की लाज रखी और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ की ओर से लड़ते हुए कर्मावती व उसके राज्य की रक्षा की।<ref name="रक्षाबंधन">{{cite web|url= http://www.raksha-bandhan.com/raksha-bandhan-in-history.html|title= रक्षाबंधन|access-date= [[24 जुलाई]] [[2007]]|format= |publisher= रक्षाबंधन.कॉम|language= en|archive-url= https://web.archive.org/web/20070809203336/http://www.raksha-bandhan.com/raksha-bandhan-in-history.html|archive-date= 9 अगस्त 2007|url-status= dead}}</ref> एक अन्य प्रसंगानुसार [[सिकन्दर महान|सिकन्दर]] की पत्नी ने अपने पति के हिन्दू शत्रु [[पुरूवास]] को राखी बाँधकर अपना मुँहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकन्दर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान हाथ में बँधी राखी और अपनी बहन को दिये हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकन्दर को जीवन-दान दिया।<ref name="रक्षाबंधन"/> [[महाभारत]] में भी इस बात का उल्लेख है कि जब ज्येष्ठ [[पाण्डव]] [[युधिष्ठिर]] ने भगवान [[कृष्ण]] से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूँ तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिये राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि राखी के इस रेशमी धागे में वह शक्ति है जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते हैं। इस समय [[द्रौपदी]] द्वारा कृष्ण को तथा [[कुन्ती]] द्वारा [[अभिमन्यु]] को राखी बाँधने के कई उल्लेख मिलते हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.festivalsofindia.in/rakshabandhan|title=रक्षाबंधन|access-date=[[24 जुलाई]] [[2007]]|format=|publisher=फ़ेस्टिवल्स ऑफ़ इंडिया|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20070821122759/http://www.festivalsofindia.in/rakshabandhan|archive-date=21 अगस्त 2007|url-status=dead}}</ref> महाभारत में ही रक्षाबन्धन से सम्बन्धित कृष्ण और द्रौपदी का एक और वृत्तान्त भी मिलता है। जब कृष्ण ने [[सुदर्शन चक्र]] से [[शिशुपाल]] का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उँगली पर पट्टी बाँध दी। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने इस उपकार का बदला बाद में चीरहरण के समय उनकी साड़ी को बढ़ाकर चुकाया। कहते हैं परस्पर एक दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षाबन्धन के पर्व में यहीं से प्रारम्भ हुई।<ref>{{cite web|url= http://www.balagokulam.org/teach/festivals/raksha.php|title= फ़ुल मून डे इन द मंथ ऑफ़ श्रावना|access-date= [[24 जुलाई]] [[2007]]|format= पीएचपी|publisher= बालगोकुलम|language= en|archive-url= https://web.archive.org/web/20070805062914/http://www.balagokulam.org/teach/festivals/raksha.php|archive-date= 5 अगस्त 2007|url-status= dead}}</ref>
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