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=== शिखर की ओर === सन् 1951 में प्रदर्शित '[[आवारा (1951 फ़िल्म)|आवारा]]' हिन्दी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। इसने राज कपूर को नायक के रूप में नयी और अलग पहचान दी। 'आवारा' ने ही फिल्मकार के रूप में एक दृष्टिकोण दिया; और 'आवारा' ने ही उनकी फिल्मों को सामाजिक यथार्थ के धरातल पर ला खड़ा किया। सुप्रसिद्ध फिल्म-समालोचक [[प्रहलाद अग्रवाल]] के शब्दों में :{{quote|" 'आवारा' ने इस सत्ताइस साल के नौजवान को उस ऊँचाई पर पहुँचा दिया, जहाँ तक पहुँचने के लिए बड़े-से-बड़ा कलाकार लालायित हो सकता है। 'आवारा' ने ही उसे अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्रदान की। यहाँ तक कि वह पंडित [[जवाहरलाल नेहरू]] के बाद सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्तित्व बन गया-- [[सोवियत संघ|सोवियत रूस]] में। रूस और अनेक समाजवादी देशों में 'आवारा' को सिर्फ प्रशंसा ही नहीं मिली, वरन् वहाँ की जनता ने भी बेहद आत्मीयता के साथ इसे अपनाया।"<ref>राज कपूर : आधी हकीकत आधा फसाना, प्रहलाद अग्रवाल, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली, प्रथम (परिवर्धित) संस्करण-2007, पृष्ठ-44.</ref>}} लेखक-पत्रकार विनोद विप्लव के शब्दों में :{{quote|"भारत ने विश्व स्तर पर चाहे जो छवि बनायी हो और उसके जो भी नये प्रतीक हों, लेकिन इतना तय है कि चीन, पूर्व सोवियत संघ और मिस्र जैसे देशों में राजकपूर हमेशा के लिए भारत का प्रतीक बने रहेंगे। चीन के सबसे बड़े नेता माओ त्से तुंग ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि 'आवारा' उनकी सर्वाधिक पसंदीदा फिल्म थी। शायद यही कारण है कि आज भी पेइचिंग और मास्को की सड़कों पर घूमते-टहलते हुए 'आवारा हूं' गीत सुनाई पड़ने लगते हैं। यह राज कपूर की लोकप्रियता के विशाल दायरे का एक उदाहरण मात्र है।"<ref>{{cite book |last1=विनोद |first1=विप्लव |title=हिंदी सिनेमा के 150 सितारे |date=2013 |publisher=प्रभात प्रकाशन (पेपरबैक्स) |location=आसफ अली रोड, नयी दिल्ली |isbn=978-93-5048-295-7 |page=81 |edition=प्रथम}}</ref>}}
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