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=== कथकली === इसका अर्थ ही कथाप्रधान है। यह नृत्य प्राचीन कालीन नाट्य सम्प्रदायों एवं देवी देवताओं की पूजनपद्धति से जनित माना जाता है। मुडियेट्टु, भगवती पाट्टु, काली आट्टम, तूकुआदि - ये नृत्य आर्यों के आगमन के पूर्व स्थित अनार्यों के आचारविचार को प्रतिबिंबित करनेवाले हैं। मूक अभिनय, धार्मिकता, तंत्र मंत्र, विचित्र भूषा, युद्ध, रक्तप्रवाह, आदि रूढ़िबद्ध होकर रंगमंच में प्रदर्शित किए जाते हैं। ये इस नृत्य की विशेषताएँ हैं। यह नाटक केरल के शाक्य लोगों से ही अधिक प्रचलित हुआ। तमिल महाकाव्यों में श्रेष्ठ शिलप्पधिकारम् में भी इस नृत्य का उल्लेख है। संस्कृत नाटकों का अंश कूडियाट्टम से अभिनयादि विशेष अंग कथकली में लिया गया है। शाक्यों के आंगिक अभिनय, उनकी मुद्राएँ, भावाभिनय, रंगमंच की रूढ़ियाँ इत्यादि कथानुसार अपनाई गई हैं। कथकली में जो रंग काम में लाए जाते हैं उन रंगों का विशेष अर्थ होता है। इस नृत्य में प्रयुक्त होनेवाली हर चीज विशेष अर्थसूचक होती है, जैसे हरा रंग दैवी गुणों का सूचक, काला रंग राक्षसी प्रवृत्तियों का सूचक माना जाता है। केरल में ज्यों ज्यों इस नृत्य का प्रचलन होने लगा त्यों त्यों केरल साहित्य का विकास हुआ।
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