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== व्यवसाय वित्त कि विशेषताएँ== व्यवसाय को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है : :‘‘व्यवसाय एक ऐसी क्रिया है, जिसमें लाभ कमाने के उद्देश्य से वस्तुओं अथवा सेवाओं का नियमित उत्पादन क्रय-विक्रय तथा विनिमय सम्मिलित है’’। व्यवसाय की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं : *''' वस्तुओं तथा सेवाओं का लेन-देन''' : व्यवसाय में लोग वस्तुओं अथवा सेवाओं के उत्पादन तथा वितरण कार्यों में संलग्न होते हैं। इन वस्तुओं में ब्रेड, मक्खन, दूध, चाय आदि जैसी उपभोक्ता वस्तुएं भी हो सकती हैं और संयन्त्रा, मशीनरी, उपकरण आदि जैसी पूंजीगत वस्तुएँ भी। सेवाएँ- परिवहन, बैंकिंग, बीमा, विज्ञापन आदि रूपों में हो सकती हैं। *''' वस्तुओं तथा सेवाओं का विक्रय अथवा विनिमय''' : यदि कोई व्यक्ति अपने उपयोग के लिए या किसी व्यक्ति को उपहार देने के लिए कोई वस्तु खरीदता या उत्पादित करता है तो वह किसी प्रकार के व्यवसाय में संलग्न नहीं है। लेकिन जब वह किसी दूसरे व्यक्ति को बेचने के लिए किसी वस्तु का उत्पादन करता है अथवा खरीदता है तो वह व्यवसाय में संलग्न होता है। इस प्रकार व्यवसाय में क्रेता और विक्रेता के बीच वस्तुओं अथवा सेवाओं के उत्पादन अथवा क्रय में धन अथवा वस्तु (वस्तु विनिमय प्रणाली में) का विनिमय आवश्यक होता है। बिना विक्रय अथवा विनिमय के किसी भी क्रिया को व्यवसाय की संज्ञा नहीं दी जा सकती। * '''वस्तुओं अथवा सेवाओं का नियमित विनिमय ''': इसमें वस्तुओं का नियमित उत्पादन अथवा क्रय-विक्रय होना आवश्यक होता है। सामान्यतया एकाकी सौदे को व्यवसाय की संज्ञा नहीं दी जा सकती। उदाहरण के लिए, यदि राजू अपनी पुरानी कार हरि को बेचता है तो इसे व्यवसाय नहीं कहा जाएगा, जब तक कि वह नियमित रूप से कारों के क्रय-विक्रय में संलग्न न हो। * '''निवेश की आवश्यकता''' : प्रत्येक व्यवसाय में भूमि, श्रम अथवा पूंजी के रूप में कुछ न कुछ निवेश की आवश्यकता होती है। इन संसाधनों का उपयोग विविध प्रकार की वस्तुओं अथवा सेवाओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग के लिए किया जाता है। * '''लाभ कमाने का उद्देश्य''' : व्यावसायिक क्रियाओं का प्राथमिक उद्देश्य लाभ के माध्यम से आय अर्जित करना है। बिना लाभ के कोई भी व्यवसाय अधिक समय तक चालू नहीं रह सकता। लाभ कमाना व्यवसाय के विकास और विस्तार की दृष्टि से भी आवश्यक होता है। * '''आय की अनिश्चितता और जोखिम''' : प्रत्येक व्यवसाय का उद्देश्य लाभ कमाना है। जब कोई व्यवसायी विभिन्न संसाध्नों का निवेश करता है तो वह उसके बदले में कुछ न कुछ आय प्राप्त करना चाहता है। लेकिन उसके श्रेष्ठतम प्रयासों के बावजूद व्यवसाय में आय की अनिश्चितता बनी रहती है। कई बार उसे बहुत लाभ होता है और कई बार ऐसा भी समय आता है, जब उसे भारी हानि उठानी पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भविष्य अनिश्चित है। व्यवसायी का आय को प्रभावित करने वाले तत्वों पर कोई नियंत्राण नहीं होता।
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