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==== स्वीकृति और उसके विभिन्न प्रकार ==== प्रस्ताव की ही भाँति और उसके अनुरूप स्वीकृति की कोई विशेष विधि या प्रणाली निर्धारित करता है, वहाँ स्वीकृति का उस विधि या प्रणाली निर्धारित करता है, वहाँ स्वीकृति का उस विधि या प्रणाली द्वारा स्वीकृति न हो तो प्रस्तावक को उसी प्रणाली द्वारा स्वीकृति देने पर बल देना चाहिए। परन्तु जहाँ स्वीकृति की किसी प्रणाली या विशिष्ट विधि का उल्लेख नहीं हो, वहाँ किसी युक्तियुक्त, संगत और उचित प्रणाली द्वारा स्वीकृति दी जा सकती है। स्वीकृति भी स्पष्ट अर्थात् शब्दों द्वारा बोलकर हो सकती है अथवा सांकेतिक रूप में कार्य द्वारा। टिकट लेकर गंतव्य स्थान को जानेवाली रेलगाड़ी पर यात्री का बैठना ही कार्य द्वारा कम्पनी के प्रस्ताव की स्वीकृति है। केवल मानसिक स्वीकृति मात्र स्वीकृति नहीं समझी जा सकती। शब्दों में अथवा कार्य द्वारा उसकी अभिव्यक्ति भी आवश्यक है। प्रस्ताव में निर्दिष्ट कार्यों का करना भी कतिपय (साधारणत: उपर्युक्त सामान्य) प्रस्तावों की स्वीकृति मानी जाती है। परन्तु यह आवश्यक है कि स्वीकर्ता इस कार्य को करने के पूर्व से ही प्रस्तावक की शर्ते जानता हो। यदि स्वीकर्ता प्रस्ताव की बिना जानकारी के ही वह कार्य करता है जो प्रस्ताव में निर्दिष्ट है, तो वह प्रस्ताव की स्वीकृति नहीं माना जा सकता। एक व्यक्ति गोरीदत्त ने अपने भतीजे की खोज के लिए अपने मुनीम लालमन को भेजा। लालमन के जाने के उपरान्त गौरीदत्त ने अपने भतीजे को खोज लानेवाले के लिए 501 रूपए पुरस्कार की घोषणा की। लालमन मुनीम गौरीदत्त के भतीजे को खोज लाया और पुरस्कार की माँग की। निर्णय यह हुआ कि चूँकि लालमन को लड़के की खोज के पूर्व पुरस्कार की शर्त की सूचना नहीं थी, न पुरस्कार प्राप्ति की बात ही ज्ञात थी, अत: खोए हुए लड़के को खोज लाने का लालमन का कार्य गौरीदत्त के प्रस्ताव की स्वीकृति नहीं माना जा सकता (लालमन शुक्ल बनाम गौरीदत्त) प्रस्ताव से उत्पन्न लाभ को स्वीकार करना भी उपयुक्त दशाओं में प्रस्ताव की स्वीकृति समझी जाती है। वाराणसी से प्रयाग की बस में बैठकर जाना ही बस मालिक के प्रस्ताव की स्वीकृति है और स्वीकर्ता बस का किराया देने को बाध्य है। स्वीकृति प्रस्ताव के कायम रहने की दशा में होनी चाहिए। यदि प्रस्ताव निष्प्रभाव हो चुका है या प्रस्तावक द्वारा खंडित किया या वापस लिया जा चुका है तो स्वीकृति भी निरर्थक और प्रभावहीन होगी।
सारांश:
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