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===सामाजिक स्वास्थ्य=== चूँकि हम सामाजिक जीव हैं अतः संतोषजनक रिश्ते का निर्माण करना और उसे बनाए रखना हमें स्वाभाविक रूप से आता है। सामाजिक रूप से सबके द्वारा स्वीकार किया जाना हमारे भावनात्मक खुशहाली के लिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। * प्रदूषणमुक्त वातावरण हो। * शुद्व पेयजल एवं पानी की टंकियों का प्रबंध हो। * मल-मूत्र एवं अपशिष्ट पदार्थों के निकासी की योजना हो। * सुलभ शैचालय हो। * समाज अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रहमचर्य एवं अपरिग्रही स्वभाव वाला हो। * वृक्षारोपण का अधिकाधिक कार्य हो। * सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण स्वच्छता हो। * जंनसंख्यानुसार पर्याप्त चिकित्सालय हों। * संक्रमण-रोधी व्यवस्था हो। * उचित शिक्षा की व्यवस्था हो। * भय एवं भ्रममुक्त समाज हो। * मानव कल्याण के हितों का समाज वाला हो। * अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार समाज के कल्याण के लिए कार्य करना। ; पोषण एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य सामाजिक तत्त्व * खाद्य सामग्री की जनसंख्या के अनुपात में उपलब्धता * मौसमी फल एवं सब्जियों की उपलब्धता * खान-पान की सामाजिक पद्वतियाँ * बच्चों के आहार से संबधी नीतियाँ * स्थानीय दुकान एवं बाजार सम्बन्धी नीतियाँ * समाजिक एवं व्यक्तिगत जीवन में स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरण की स्थिति * पेषण संबधी स्वास्थ्य-शिक्षा का प्रचार प्रसार * समुदाय का आर्थिक स्तर * समुदाय का शैक्षिणिक स्तर * समुदाय की चिकित्सकीय व्यवस्था * समुदाय हेतु परिवहन व्यवस्था * बच्चों एवं महिलाओं से संबधित विशेष स्वास्थ्य की नीतियाँ * पोषण व्यवस्था एवं आहार के समुचित भंडारण की व्यवस्था * अंधविश्वास एवं गलत धारणाओं से मुक्त समाज * सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं मनौवैज्ञानिक स्तर * निम्न मृत्युदर एवं न्यून बीमारियाँ * जनंसख्या वृद्वि का समुचित नियंत्रण * सामाजिक रीति रिवाज एवं परम्परागत मान्यताएँ। अधिकांश लोग अच्छे स्वास्थ्य के महत्त्व को नहीं समझते हैं और अगर समझते भी हैं तो वे अभी तक इसकी उपेक्षा कर रहे हैं। हम जब भी स्वास्थ्य की बात करते हैं तो हमारा ध्यान शारीरिक स्वास्थ्य तक ही सीमित रहता है। हम बाकी आयामों के बारे में नहीं सोचते हैं। अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यकता हम सबको है। यह किसी एक विशेष धर्म, जाति, संप्रदाय या लिंग तक सीमित नहीं है। अतः हमें इस आवश्यक वस्तु के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। अधिकांश रोगों का मूल हमारे मन में होता है। एक व्यक्ति को स्वस्थ तब कहा जाता है जब उसका शरीर स्वस्थ और मन साफ और शांत हो। कुछ लोगों के पास भौतिक साधनों की कमी नहीं होती है फिर भी वे दुःखी या मनोवैज्ञानिक स्तर पर उत्तेजित हो सकते।
सारांश:
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