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=== अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)।
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