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=== क्रियाप्रसूत अनुबन्धन- पुनर्बलन के द्वारा सीखना === अगर कोई बच्चा समय से अपना गृहकार्य कर लेता है तो उसके माता-पिता उसकी प्रशंसा करते हैं तो उसको सकारात्मक पुनर्बलन मिलता जिससे बच्चा उस कार्य को करना सीख जाता है। लेकिन अगर बच्चा कोई प्लेट तोड़ देता है तो उसे डांटा जाता है या उसे सजा दी जाती है तो बालक को नकरात्मक पुनर्बलन मिलता है जिससे बालक उस कार्य को नहीं करता है । इस प्रकार के अनुबन्धन को नैमित्तिक अनुबन्धन या क्रियाप्रसूत अनुबन्धन कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि हम वह व्यवहार करना सीख जाते हैं जिसमें परिणाम सकारात्मक होते हैं और हम वह व्यवहार करना छोड़ देते हैं जो हमें नकारात्मक परिणाम देता है। व्यावहारिक अनुबन्धन सीखने की वह विधि है जिसमें प्राणी उस व्यवहार को दोहराते हैं जिसका परिणाम सकारात्मक होता है और उस व्यवहार से बचता है जिसका परिणाम नकारात्मक होता है। बी.एफ. स्किनर ऐ से सर्वाधिक प्रभावशाली वैज्ञानिक हैं जो सीखने में क्रियाप्रसूत अनुबन्धन की भूमिका के सबसे ज्यादा पक्षधर रहे हैं। उन्होंने चूहों पर इस अनुबन्धन का प्रयोग करने के लिए डिब्बे का निर्माण किया जिसे '''स्किनर बाक्स''' कहा जाता है। इस डब्बे की सामने की दीवार में एक लीवर लगा हुआ था। लीवर को दबाना ही वह अनुक्रिया थी जो चूहे को सीखनी थी। एक भूखे चूहे को इस डब्बे के अन्दर रखा गया, और उसने अन्दर जाते ही विभिन्न प्रकार की क्रियायें करनी शुरू कर दीं। कुछ देर बाद अचानक उसने वह लीवर दबा दिया जिससे उसके सामने रखी प्लेट में खाना आकर गिर गया। और चूहे ने वह खाना खा लिया। भोजन खाने के बाद चूहे ने पिंजरे में दुबारा क्रियायें करनी शुरू कर दी। कुछ गतिविधि के बाद उससे वह लीवर दुबारा दब गया और पुनः उसके सामने भोजन का टुकड़ा (पुरस्कार) गिर गया। शनैः-शनैः चूहा सारी अनियमित गतिविधियाँ बन्द करके सिर्फ लीवर के चारों तरफ ही विशिष्ट गतिविधियाँ करने लगा। अन्त में चूहा यह सीख जाता है कि लीवर को दबाने पर उसके सामने भोजन गिराया जाता है जो कि उसके लिये सन्तुष्टि प्रदान करने वाला परिणाम था। दूसरे शब्दों में चूहे द्वारा लीवर को दबाना भोजन ([[पुनर्बलन]]) प्रदान करने वाला निमित्त (साधन) बन जाता है। चूहे द्वारा की गयी अनुक्रिया (लीवर को दबाना) पुनर्बलित थी जिससे चूहे ने इस व्यवहार को उपार्जित कर लिया या सीख लिया। भोजन प्राप्त करने में लीवर ने चूहे के लिए एक निमित्त (साधन) की भूमिका निभाई जिससे चूहे को सन्तुष्टि (सकारात्मक पुनर्बलन) प्राप्त हुई और इसलिये इस तरह के सीखने को '''यांत्रिक अनुबंधन''' भी कहा जाता है। इसे क्रियाप्रसूत अनुबन्धन (आपरेन्ट अनुबन्धन) भी कहा जाता है क्यों कि चूहे या किसी प्राणी द्वारा किया गया व्यवहार वातावरण पर की गई क्रिया है।
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