सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
क्रिस्टलकी
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
== क्रिस्टलीय अक्ष == क्रिस्टलीय अक्ष वह कल्पित रेखा हैं, जो क्रिस्टल के केंद्र से होकर जाती है। क्रिस्टल के फलकों की स्थिति (attitude) बतलाने के लिये इन कल्पित रेखाओं का उपयोग सन्दर्भ अक्षों (axes of reference) के रूप में किया जाता है। साधारणत: ये अक्ष मुख्य सममिति अक्ष होते हैं, या कुछ कोरों के समांतर होते हैं। क्रिस्टल के स्वभाव के आधार पर तीन सममिति समतलों पर अभिलंब होते हैं या क्रिस्टल की कुछ या चार ऐसे अक्ष मान लिए जा सकते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि अक्ष एक दूसरे के बराबर हों, या दूसर पर समान रूप से झुके हों। इन अक्षों की आपेक्षिक लंबाइयों को ही 'अक्षीय अनुपात' कहते हैं। ये अधिकतर x, y, z द्वारा लिखी जाती हैं। इनमें से y को ही इकाई मानने की प्रथा है। वे आपेक्षिक दूरियाँ जिनपर क्रिस्टल फलक के (आवयकता पड़ने पर बढ़ाकर) क्रिस्टलीय अक्षों को काटते हैं उनका अंत:खंडी अनुपात (parameter) कहलाता है। वह फलक, जो अक्षों को इस प्रकार काटता है कि उन दूरियों का अनुपात क्रमिक अक्षों की इकाइयों के अनुपात के समान होता है, एकक फलक (unit face), या पैरामीटरी समतल (parametral plane) कहलाता है। एकक फलक निर्धारण करने के लिये साधारणत: सबसे अधिक मिलनेवाली फलक समष्टि को ही चुन लिया जाता है। किसी भी फलक का आकार (attitude), या प्रवणता उनके इकाई अंतर्खंडों (unit intercepts) द्वारा बतलाई जा सकती है। यदि एक फलक तीन अक्षों x, y, z पर a, b, c अंतर्खंड काटता है, तब उनके संबंध को वाइस (Weiss, 1818 ई.) की विधि के अनुसार ax, by, cz द्वारा दिखलाया जा सकता है। वाइस की पैरामीटर विधि के स्थान पर घातांक विधि (index system), जिसे सबसे पहले मिलर (Miller, 1839 ई.) ने लोकप्रिय बनाया, अधिक प्रचलित है। इस विधि के व्युत्क्रमांक (reciproca) या घातांक यदि [[भिन्न]] (fraction) में हैं, तो गुणा कर इनको पूर्ण संख्या में बदलकर प्रयोग किया जाता है। अत: यदि एक फलक, X अक्ष को एकक दूरी (unit distance) से दुगने स्थान पर और Y को तिगुनी दूरी पर, काटता है तथा Z के समांतर है, तो इसका वाइस चिह्न 2 x, 3 y, ¥ z होगा। इनके व्युत्क्रमांक 1/2, 1/3 1/¥ होंगे। 6 से गुणा करने पर यह 3, 2, 0 हो जाएगा। अत: इस फलक का मिलरचिह्र 3, 2, 0 लिखा जाएगा और यह तीन, दो, शून्य पढ़ा जाएगा। कभी-कभी इसे छोटे कोष्ठक में (3 2 0) रखा जाता है, क्योंकि [[एक्स किरण क्रिस्टलकी]] में बिना कोष्ठक के चिन्ह्र रचना-समतलों के द्योतक होते हैं। मझले कोष्ठक में यह {3 2 0} फलक के पूरे रूप (form) को बतलाता है और बड़े कोष्ठकों में [3 2 0] यह एक मंडल (zone) को सूचित करता है। क्रिस्टलकी की सभी विधियों, गोनियोमीटरी पठन, त्रिविमीय प्रक्षेप तथा गणितीय परिकलन के लिये मिलन चिह्न महत्वपूर्ण है। अनुभव से ज्ञात हुआ है कि सामान्यत: एक क्रिस्टल में केवल वे ही फलक रहते हैं, जिनके अक्षीय अंत:र्खंड इकाई के लघुगुणित (multiple), या अनंत (infinite) होते हैं। इसी प्रकार [[मिलर घातांक]] सरल परिमेय संख्या (rational number) या शून्य होते हैं। इसे [[परिमेय घातांक नियम]] (Law of Rational Indices) कहते हैं। इसमें ऐसे घातांक जैसे 2<sup>0.5</sup> या 1.327..... आदि, संभव नहीं है।
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)