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=== क्षेत्रमापी === बावेरिया के इंजीनियर जे एच. हरमैन ने सन् १८१४ में सबसे पहले अनयिमित वक्र से सीमाबद्ध क्षेत्र का सीधे ही क्षेत्रफल मापने का यंत्र बनाया। उसके बाद कई एक यंत्र बनाए गए। सन् १८६० में वेटली स्पर्क ने एक क्षेत्रमापी बनाया, जिसमें घूर्णनशील क्षैतिज वृत्तीय मंडलक (disc) पर आलेखक बेलन विराम किए रहता है। तीन समांतर पटरियों पर लुढ़कनेवा के तीन घिर्रीदार पहियों के ऊपर सधे हुए एक चौखटे पर यह मंडलक चढ़ा रहता है। मंडलक के नीचे और चौखटे पर एक क्षैतिज छड़ दो जोड़ी निदेशक (guide) बेलनों के बीच इस प्रकार चढ़ी रहती है कि वह पटरियों से लंब दिशा में चल सके। मंडलक की धुरी के परित: लिपटे हुए और छड़ के सिरों पर बँधे हुए पतले तार द्वारा मंडलक को छड़ के अनुदैर्ध्य विस्थापन के समानुपात में कोणीय संचलन मिलता है। जब छड़ के एक सिरे पर बँधे अनुरेखक की नोक उस वक्र की परिसीमा पर चलती है जिसका क्षेत्रफल मापना है तो मंडलक के कंद्र और आलेखक पहिए के समतल के बीच की दूरी सदा वक्र की कोटि के समानुपात में रहती है। इसलिये आलेखक पहिए के परिक्रमणों की संख्या क्षेत्र फल का मापक है। जेकब एम्सलर ने सन् १८५४ के लगभग एक ्ध्राुवीय क्षेत्रमापी बनाया, जो अपने सरल निर्माण और अल्प मूल्य के कारण बहुत प्रचलित हो गया। सन् १८७५ के लगभग इसी आधार पर जो उपकरणिका स्टेनले ने बनाई उसमें भारतयुक्त बिंदु नियत हैं और अनुरेखक संकेतक दिए हुए वक्र पर चलता है। अंशांकित बेलन पर आरंभ के और अंत के पाठ्यांकों के अंतर से अनुरेखक बाहु की लंबाई के अनुसार क्षेत्रफल ज्ञात हो जाता है।
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