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== क़ाचार युग == सफवियों के अनंतर अफ़शारों ने, जिनके राज्य का संस्थापक नादिरशाह अफ़शार था, तथा जिंद वंश ने सन् 1761 ई. तक राज्य किया। इनके बाद क़ाचारियों का समय आया जो सन् 1925 ई. तक रहे। फत्ह अली शाह क़ाचार ने सन् 1797 से सन् 1816 ई. तक शासन किया। वह कवियों तथा साहित्यकारों का आश्रयदाता था। फत्ह अली "सबा" उसका मलिकुश्शोअरा था, जिसने फिरदौंसी की शैली पर शहंशाहनामा रचा। फत्ह अली शाह का मंत्री खारज: अब्दुल्वहाब निशात" अच्छा कवि था और उसने एक दीवान प्रस्तुत किया। निशात पत्रलेखन में अत्यंत कुशल था। इस युग का श्रेष्ठतम कवि मिर्जा हबीबुल्ला "क़ाआनी" था। इसने प्रशंसात्मक कसीदे तथा हजोएँ अच्छी कही हैं। काचारियों के युग में शाह नासिरुद्दीन (सन् 1848-1896 ई.) का विशेष महत्त्व है। यह स्वयं कवि तथा गद्यलेखक था। इसका सफ़रनामा बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें इसने अपनी यूरोप की यात्रा का वृत्तांत तथा अनुभवों का विवरण दिया है। इसकी लेखन शैली सरल तथा रोचक है। नासिरुद्दीन के राज्यकाल का प्रसिद्ध साहित्यकार रिज़ाकुली खाँ लाल:बाशी है, जो श्रेष्ठ कवि था। इसने "मजमउल् फुसहा" और "रियाजुल्आरिफ़ीन" नामक दो वृत्तसंग्रह प्रस्तुत कर फारसी साहित्य की बहुमूल्य सेवा की है। इन दोनों संग्रहों में आरंभ से लेकर अपने समय तक के कवियों के वृत्त संकलित किए गए हैं और इस दृष्टि से ये बड़े महत्वपूर्ण हैं। रिजाकुली खाँ खीवा (तुर्किस्तान) में अपने देश की ओर से राजदूत था और इसन अपने सफारतनामा नामक पुस्तक में खीवा की अपनी यात्रा का वर्णन किया है। काचारियों के राज्यकाल में यूरोपीय जातियों का आवागमन अच्छी प्रकार आरंभ हो गया था और यूरोप की संस्कृति का प्रभाव ईरान पर पड़ने लगा था। इस कारण शैबानी काशानी की कविता में निराशावाद तथा पूर्ण यथार्थवाद का, जो उस समय के यूरोपीय साहित्यकारों में विशेष प्रिय विषय हो रहे थे, पूरा प्रभाव है। इसी काल में फारसी भाषा में नाटक (ड्रामा) लिखने की प्रथा आरंभ हुई। मिर्जा जाफ़र कराच: दागी ने तुर्की से कई नाटकों का फारसी में अनुवाद किया। नई शैली के नाटकों के प्रचार के पहले ईरान में एक प्रकार के धार्मिक खेल खेले जाते थे, जिन्हें ताज़िआ कहते थे, जिसमें कर्बला के शहीदों के कष्टों का अभिन्य किया जाता था। अब सुशिक्षित लोग इसे पसंद नहीं करते। इसी काल में यूरोपीय शिक्षा के प्रचार से बादशाहों के शासन की निर्बलता के कारण वैधानिक शासन का आंदोलन आरंभ हुआ। जनता में नए विचारों के प्रसार के लिए समाचारपत्रों का खूब प्रचार हुआ। कवियों ने जातीय तथा शासकीय कविताएँ लिखना आरंभ किया। इस काल में गद्य की बड़ी उन्नति हुई तथा इसकी लेखन शैली इतनी सरल हो गई कि जनता उसे सहज में समझ सके, यहाँ तक कि कविता की शैली भी बदल गई। उसमें आडंबर तथा बनावट का स्थान सरलता ने ले लिया। जनता को शासन की बुराइयों से सावधान करने के लिए हाजी जैनुल् आबदीन ने एक कल्पित यात्राविवरण "सियाहतनामा" "इब्राहीम बेग" के नाम से लिखा, जो सन् 1910 में प्रकाशित हुआ। उसी साल में लेखक की मृत्यु हुई। इस काल के प्रसिद्ध कवि पूरे दाऊद, अशरफुद्दीन रुश्ती, मलिकुश्शोअरा अली अकबर देहखुदा, इश्की आदि हैं। इस काल में महिलाओं ने भी कविता तथा साहित्य में बहुत भाग लिया, जिनमें परवीन, एतसामी, परीवश, दुनिया आदि को बड़ी ख्याति मिली।
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