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== आधुनिक युग के बाद == तीस के दशक में जो कविगण आये वे बांग्ला कविता की जगत में पश्चिमी प्रभाव को पनपने का अवसर दिया और रबिन्द्रनाथ के बाद के कविता को एक नई दिशा दी। उनमें प्रधान थे [[बुद्धदेब बसु]], [[सुधीन्दृनाथ दत्त]], [[विष्णु दे]], [[जीवनानंद दास]] प्रमुख। चालिस के दशक में बामपंन्थी कवियों का बोलबला रहा जिसमें प्रधान थे [[बीरेन्द्रनाथ चट्टोपध्याय]], [[सुभाष मुखोपाध्याय]], [[कृष्ण धर]] प्रमुख। पचास के दशक से पत्रिका-केन्द्रित कवियों का आबिर्भाव हुया, जैसे कि ''शतभिषा'', ''कृत्तिबास'' इत्यादि। शतभिषा के [[आलोक सरकार्]], [[अलोक्रंजन दाशगुप्ता]] प्रमुखों ने नाम कमाये, जबकि कृत्तिबास के [[सुनील गंगोपाध्याय]], [[शरतकुमार मुखोपाध्याय]], [[तारापदो राय]], [[समरेन्द्र सेनगुप्ता]] नाम किये। साठ के दशक में शुरू हुये अंदोलनसमूह जो कविता का चरित्र ही बदल डाला। आंदलनों में प्रधान था [[भुखी पीढी (हंगरी जेनरेशन)]] जिसके कवि-लेखकों पर बहुत सारे आरोप लगाये गये। भुखी पीढी के सदस्यों ने समाज को ही बदलने का ऐलान कर डाला। उनलोगों के लेखनप्रक्रिया से बंगालि समाज भी खफा हो गये थे। सदस्यों के विरुद्ध मुकदमें दायर हुये एवम आखिरकार [[मलय रायचौधुरी]]को उनके कविताके चलते कारावास का दण्ड दिया गया था।
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