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=== अनुकरण सिद्धान्त (Bow & Bow Theory)=== इस सिद्धान्त को मानने वाले प्रमुख विद्वान हैं- ‘ह्निटनी’ ‘पॉल’, ‘हर्डर’ आदि। मैक्समूलर ने इस सिद्धान्त का उपहास करते हएु इसे (कुत्ते की ध्वनि) बॉक बॉब सिद्धान्त कहा था। वैसे अंग्र्रेजी भाषा में इसके लिए ऑनोमॉटोपेथिक (Onomotopethic) या इकोइक (Echoic) शब्द का प्रचलन है। अनुकरण सिद्धान्त में भी अनुरणन की ही भाँति कुछ प्राकृतिकक ध्वनियों के अनुकरण पर पदार्थों के नामकरण की कल्पना की गई है। कुछ शब्द उदाहरण के लिए प्रस्तुत हैं- ‘काक‘, ‘कोकिल’ ‘भौं-भौं’, ‘म्याऊँ’, ‘कुक्कर’, ‘दादुर’, ‘निर्झर’, ‘टर्राना’, ‘मर्मर’, ‘तड़तड़’, ‘कडकना’ ‘गड़गड़ाना’, ‘टपकना’, ‘चहकना’, ‘चहचहाना’, ‘हिनहिनाना’, ‘गुर्राना’, ‘काँव-काँव’, ‘टेंटें करना’, ‘चिल्लाना’, ‘गरजना’, ‘टप-टप’, आदि। '''समीक्षा''' विद्वानों ने इस सिद्धान्त के खण्डन के लिए निम्नलिखित तर्क दिये हैं: * प्रसिद्ध विद्वान् ‘रेनन’ के अनुसार ध्वनियों का उत्पादन करने में मनुष्य पशु-पक्षियों से भी निकृष्ट सिद्ध होता है इसलिए यह सिद्धान्त विश्वास करने के योग्य नहीं है। * यद्यपि कुछ भाषाओं में अनुकरणामूलक शब्द पाये जाते हैं। परन्तु इन शब्दों की संख्या इतनी अधिक नहीं होती कि इनसे भाषा का उत्पन्न होना मान लिया जाए। उत्तरी अमेरिका की एक भाषा ‘अथवाकन’ में तो एक भी शब्द अनुकरणमूलक नहीं है। * अनुकाणमूलक शब्द सभी भाषाओं में एक समान नहीं हैं उनका रूप भिन्न-भिन्न है। कुछ विद्वानों ने इसका कारण भिन्न-भिन्न भाषाओं में ध्वनियों की भिन्नता बताया है परन्तु यह स्वीकार इसलिए नहीं किया जा सकता क्योंकि ध्वनियाँ तो इस सिद्धान्त के अनुसार अनुकरण का ही परिणाम है, हाँ अनुकरण की अपूर्णता इसमें आंशिक रूप में कारण माना जा सकता है। * अनुकरण पर बने शब्द किसी भाषा में बहुत कम संख्या में होते हैं जिनके आधार पर भाषा का अलंकरण तो हो सकता है परन्तु उन्हें पूरी भाषा के अस्तित्व का आधार नहीं माना जा सकता। '''निष्कर्ष''' ‘ऑटो जेस्पर्सन’ नामक विद्वान ने कहा था कि इस सिद्धान्त पर भाषा के कुछ शब्दों का निर्माण होना माना जा सकता है जो भाषा की उत्पत्ति का आंशिक आधार माने जा सकते हें, पूर्ण आधार नहीं।
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