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=== <u>सफलता और अवसान</u> === पू. 1579 से 1585 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और गुजरात के मुग़ल अधिकृत प्रदेशों में विद्रोह होने लगे थे और महाराणा भी एक के बाद एक गढ़ जीतते जा रहे थे अतः परिणामस्वरूप अकबर उस विद्रोह को दबाने में उल्झा रहा और मेवाड़ पर से मुगलो का दबाव कम हो गया। इस बात का लाभ उठाकर महाराणा ने 1585ई. में मेवाड़ मुक्ति प्रयत्नों को और भी तेज कर दिया। महाराणा जी की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर दिए और तुरन्त ही उदयपूर समेत 36 महत्वपूर्ण स्थान पर फिर से महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|title=Maharana Pratap Jayanti: Lesser known facts about the fearless warrior|last=|first=|date=2020-05-09|website=Zee News|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20200601000000/https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|archive-date=2020-06-01|dead-url=|access-date=2020-12-07}}</ref> महाराणा प्रताप ने जिस समय सिंहासन ग्रहण किया, उस समय जितने मेवाड़ की भूमि पर उनका अधिकार था, पूर्ण रूप से उतने ही भूमि भाग पर अब उनकी सत्ता फिर से स्थापित हो गई थी। बारह वर्ष के संघर्ष के बाद भी अकबर उसमें कोई परिवर्तन न कर सका। और इस तरह महाराणा प्रताप समय की लम्बी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अन्त 1585 ई. में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए, परन्तु दुर्भाग्य से उसके ग्यारह वर्ष के बाद ही 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी [[चावंड|चावण्ड]] में उनकी मृत्यु हो गई।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|title=मेवाड़ का वीर योद्धा महाराणा प्रताप {{!}} history of maharana pratap in hindi|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20190728185404/http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|archive-date=28 जुलाई 2019|access-date=2020-05-30|url-status=dead}}</ref> महाराणा प्रताप सिंह के डर से अकबर अपनी राजधानी लाहौर लेकर चला गया और महाराणा के स्वर्ग सिधारने के बाद आगरा ले आया।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|title=हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं थी अकबर और महाराणा प्रताप के बीच|last=फ़ज़ल|first=रेहान|date=2018-12-17|work=BBC News हिंदी|access-date=2020-05-30|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20200517194326/https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|archive-date=17 मई 2020|url-status=live}}</ref> '''एक सच्चे राजपूत, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए। ''
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