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==== 1900 के पूर्व ==== वनस्पति विज्ञान का सूत्रपात 18वीं शताब्दी में, या कुछ मामलों में उससे पहले वनस्पतिशास्त्रियों और/या प्रकृतिवादियों के कार्य से हुआ। इनमें से अनेक खोज के युग में [[खोज की यात्रा]] पर निकले विश्व यात्री थे और उनका कार्य वनस्पतिशास्त्र और भूगोल का संश्लेषित संयोग था जिसे आजकल हम वनस्पतिक [[बायोजियोग्राफी]] (या ''फाइटोजियोग्राफी'') कहते हैं। उस समय विश्वभर के फ्लोरिस्टिक या वनस्पति प्रकारों के बारे में बहुत कम जानकारी थी और यह तो नहीं के बराबर ज्ञात था कि वे किस पर निर्भर थे, इसलिये अधिकांश कार्य पौधों के नमूनों को जमा करने, वर्गीकृत करने और नामकरण करने तक सीमित था। 19वीं शताब्दी तक बहुत कम सैद्धांतिक कार्य हुआ। प्रारंभिक प्रकृतिवादियों में सबसे अधिक परिमाण में कार्य करने वाले व्यक्ति थे [[एलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट]] जिन्होंने 1799 से 1804 तक की दक्षिण और मध्य अमेरिका की अपनी पांच वर्षीय यात्रा के दौरान 60000 वनस्पति नमूने जमा किये. हमबोल्ट पहले ऐसे वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने जलवायु और वनस्पति पैटर्नों के बीच संबंध को अपने विशाल जीवनभर के कार्य, "[[वायेज टू द इक्विनाक्शियल रीजन्स ऑफ द न्यू वर्ल्ड]]" - में प्रलेखित किया, जो उन्होंने अपने साथी वनस्पतिशास्त्री [[एमी बॉप्लैंड]] के साथ मिलकर लिखा. हम्बोल्ट ने वनस्पति को टेक्सानमी के अलावा फिजियोग्नामिक तरीके से वर्णित किया। उनके कार्य ने पर्यावरण-वनस्पति के संबंधों पर गहन कार्य की शुरूआत की जो आज तक चालू है। (बारबर और अन्य, 1987). आज कल होने वाले नस्पति अध्ययन का प्रारंभ 19वीं सदी के अंत में यूरोप और रूस में, विशेषकर एक पोल, जोजेफ पैकजोस्की और एक रूसी, [[लियोंटी रेमेन्स्की]] के द्वारा हुआ। वे दोनों मिलकर अपने समय से बहुत आगे थे और उन्होंने पश्चिम से बहुत पहले आज के महत्वपूर्ण लगभग सभी विषयों का परिचय या वर्णन किया। इन विषयों में वनस्पति समुदाय विश्लेषण, या [[फाइटोसोशियॉलाजी]], [[ग्रेडियेंट विश्लेषण]], आवर्तन और वनस्पति [[इकोफिजियालाजी]] और फंक्शनल इकालाजी पर लेख शामिल थे। भाषा और/या राजनीतिक काऱणों से 20वीं सदी तक अधिकांश विश्व, विशेषकर अंग्रेजी बोलने वाले विश्व को उनके अधिकतर कार्य का पता नहीं था।
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