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=== किसान नेतृत्व === किसान प्रश्न पर गुहा ने घोषित किया कि, किसान इतिहास की विषयवस्तु नहीं, स्वयं अपने इतिहास के कर्ता हैं।<ref>Elementary Aspect of Peasant Insurgency in Colonial India, Ranjit Guha, OUP, 1983, page- 13</ref> गुहा तथा पार्थ चटर्जी जैसे उनके सहयोगियों ने किसानों के विद्रोहों को ‘विशुद्ध चेतना’ से अनुप्राणित माना। इसी ‘विशुद्ध चेतना’ के मुहावरे में उन्होंने किसानों को व्यापक राष्ट्रीय आंदोलनों की मुख्यधारा से अलगाया।
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