सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
सूर्य
" (अनुभाग) सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
=== सौर अंतरिक्ष मिशन === {{see also|सौर वेधशाला}} [[File:Sunspots and Solar Flares.jpg|thumb|13 मार्च 2012 13:29, ईएसटी को सूर्य से बाहर एक बड़ा भूचुंबकीय तूफान ]] <!-- Deleted image removed: [[File:I screenimage 30579.jpg|thumb|right|Solar "[[Coronal mass ejection|fireworks]]" in sequence as recorded in November 2000 by four instruments on board the [[Solar and heliospheric observatory|SOHO]] spacecraft {{Deletable image-caption|date=May 2012}}]] --> [[File:Moon transit of sun large.ogv|thumb|left|[[स्टीरियो]] बी के अल्ट्रावायलेट इमेजिंग कैमरे की जांच के दौरान कैद हुआ सूर्य का एक चंद्र पारगमन<ref>{{cite web |last=Phillips |first=T. |title=Stereo Eclipse |url=http://science.nasa.gov/headlines/y2007/12mar_stereoeclipse.htm |work=Science@NASA |publisher=[[NASA]] |year=2007 |accessdate=19 जून 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080610082213/http://science.nasa.gov/headlines/y2007/12mar_stereoeclipse.htm |archive-date=10 जून 2008 |url-status=dead }}</ref>]] सूर्य के निरीक्षण के लिए रचे गए प्रथम उपग्रह [[नासा]] के [[पायोनियर कार्यक्रम | पायनियर]] 5, 6, 7, 8 और 9 थे। यह 1959 और 1968 के बीच प्रक्षेपित हुए थे। इन यानों ने [[पृथ्वी]] और सूर्य से समान दूरी की कक्षा में सूर्य परिक्रमा करते हुए सौर वायु और सौर चुंबकीय क्षेत्र का पहला विस्तृत मापन किया। पायनियर 9 विशेष रूप से लंबे अरसे के लिए संचालित हुआ और मई 1983 तक डेटा संचारण करता रहा। <ref>{{cite web |last=Wade |first=M. |title=Pioneer 6-7-8-9-E |url=http://www.astronautix.com/craft/pio6789e.htm |year=2008 |publisher=[[Encyclopedia Astronautica]] |accessdate=22 मार्च 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060422075141/http://www.astronautix.com/craft/pio6789e.htm |archive-date=22 अप्रैल 2006 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |title=Solar System Exploration: Missions: By Target: Our Solar System: Past: Pioneer 9 |url=http://solarsystem.nasa.gov/missions/profile.cfm?MCode=Pioneer_09 |publisher=[[NASA]] |accessdate=30 अक्टूबर 2010 |quote=NASA maintained contact with Pioneer 9 until May 1983 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120402205810/http://solarsystem.nasa.gov/missions/profile.cfm?MCode=Pioneer_09 |archive-date=2 अप्रैल 2012 |url-status=dead }}</ref> 1970 के दशक में, दो अंतरिक्ष यान [[हेलिओस (अंतरिक्ष यान) | हेलिओस]] और [[स्काईलैब]] [[अपोलो टेलीस्कोप माउंट]] <sup>[[:en:Apollo Telescope Mount|En]]</sup> ने सौर वायु व सौर कोरोना के महत्वपूर्ण नए डेटा वैज्ञानिकों को प्रदान किए। हेलिओस 1 और 2 यान अमेरिकी-जर्मनी सहकार्य थे। इसने अंतरिक्ष यान को [[बुध]] की कक्षा के भीतर {{उपसौर}} की ओर ले जा रही कक्षा से सौर वायु का अध्ययन किया। <ref name=Burlaga2001/> 1973 में स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन नासा द्वारा प्रक्षेपित हुआ। इसने अपोलो टेलीस्कोप माउंट कहे जाने वाला एक सौर [[वेधशाला]] मॉड्यूल शामिल किया जो कि स्टेशन पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा संचालित हुआ था। <ref name=Dwivedi2006/> स्काईलैब ने पहली बार सौर संक्रमण क्षेत्र का तथा सौर कोरोना से निकली पराबैंगनी उत्सर्जन का समाधित निरीक्षण किया। <ref name=Dwivedi2006/> खोजों ने [[कोरोनल मास एजेक्सन]] के प्रथम प्रेक्षण शामिल किए, जो फिर "कोरोनल ट्रांजीएंस्ट" और फिर [[कोरोनल होल्स]] कहलाये, अब घनिष्ठ रूप से [[सौर वायु]] के साथ जुड़े होने के लिए जाना जाता है। <ref name=Burlaga2001>{{Cite journal|last=Burlaga|first=L.F.|title=Magnetic Fields and plasmas in the inner heliosphere: Helios results|year=2001|journal=Planetary and Space Science|volume=49|issue=14–15|pages=1619–27|doi=10.1016/S0032-0633(01)00098-8|ref=harv|bibcode=2001P&SS...49.1619B}}</ref> 1980 का [[सोलर मैक्सीमम मिशन]] नासा द्वारा शुरू किया गया था। यह अंतरिक्ष यान उच्च सौर गतिविधि और सौर चमक के समय के दरम्यान [[गामा किरण | गामा किरणों]], [[ऍक्स किरण | एक्स किरणों]] और [[सौर ज्वाला]]ओं से निकली [[पराबैंगनी]] विकिरण के निरीक्षण के लिए रचा गया था। प्रक्षेपण के बस कुछ ही महीने बाद, हालांकि, किसी इलेक्ट्रॉनिक्स खराबी की वजह से यान जस की तस हालत में चलता रहा और उसने अगले तीन साल इसी निष्क्रिय अवस्था में बिताए। 1984 में [[स्पेस शटल चैलेंजर]] मिशन STS-41C ने उपग्रह को सुधार दिया और कक्षा में फिर से छोड़ने से पहले इसकी इलेक्ट्रॉनिक्स की मरम्मत की। जून 1989 में पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश से पहले सोलर मैक्सीमम मिशन ने मरम्मत पश्चात सौर कोरोना की हजारों छवियों का अधिग्रहण किया। <ref>{{cite web |last=Burkepile |first=C. |first2=J. |title=Solar Maximum Mission Overview |url=http://web.hao.ucar.edu/public/research/svosa/smm/smm_mission.html |year=1998 |accessdate=22 मार्च 2006 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20060405183758/http://web.hao.ucar.edu/public/research/svosa/smm/smm_mission.html |archivedate=5 अप्रैल 2006 |url-status=dead }}</ref> 1991 में प्रक्षेपित, जापान के [[योनकोह]] (सौर पुंज) उपग्रह ने एक्स-रे तरंग दैर्घ्य पर सौर ज्वालाओ का अवलोकन किया। मिशन डेटा ने वैज्ञानिकों को अनेकों भिन्न प्रकार की लपटों की पहचान करने की अनुमति दी, साथ ही दिखाया कि चरम गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूर स्थित कोरोना और अधिक गतिशील व सक्रिय थी जैसा कि पूर्व में माना हुआ था। योनकोह ने एक पूरे सौर चक्र का प्रेक्षण किया लेकिन 2001 में जब एक [[कुंडलाकार सूर्यग्रहण]] हुआ यह आपातोपयोगी दशा में चला गया जिसकी वजह से इसका सूर्य के साथ जुडाव का नुकसान हो गया। यह 2005 में वायुमंडलीय पुनः प्रवेश दौरान नष्ट हुआ था। <ref> {{cite press |title=Result of Re-entry of the Solar X-ray Observatory "Yohkoh" (SOLAR-A) to the Earth's Atmosphere |url=http://www.jaxa.jp/press/2005/09/20050913_yohkoh_e.html |publisher=[[Japan Aerospace Exploration Agency]] |year=2005 |accessdate=22 मार्च 2006 }}</ref> आज दिन तक का सबसे महत्वपूर्ण सौर मिशन [[सौर एवं सौरचक्रीय वेधशाला (सोहो) | सोलर एंड हेलिओस्फेरिक ओब्सर्वेटरी]] रहा है। 2 दिसंबर1995 को शुरू हुआ यह मिशन [[यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी]] और [[नासा]] द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया था। <ref name=Dwivedi2006/> मूल रूप से यह दो-वर्षीय मिशन के लिए नियत हुआ था। मिशन की 2012 तक की विस्तारण मंजूरी अक्टूबर 2009 में हुई थी। <ref name=sohoext>{{cite web|date = October 7, 2009|url = http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=45685|title = Mission extensions approved for science missions|work = ESA Science and Technology|accessdate = February 16, 2010|archive-url = https://web.archive.org/web/20130502023453/http://sci.esa.int/science-e/www/object/index.cfm?fobjectid=45685|archive-date = 2 मई 2013|url-status = live}}</ref> यह इतना उपयोगी साबित हुआ कि इसका अनुवर्ती मिशन [[सौर गतिशीलता वेधशाला | सोलर डायनमिक्स ओब्सर्वेटरी]] (एसडीओ) फरवरी, 2010 में शुरू किया गया था। <ref name=sdolaunch>{{cite web|date = February 11, 2010|url = http://www.nasa.gov/home/hqnews/2010/feb/HQ_10-040_SDO_launch.html|title = NASA Successfully Launches a New Eye on the Sun|work = NASA Press Release Archives|accessdate = February 16, 2010|archive-url = https://web.archive.org/web/20130810082825/http://www.nasa.gov/home/hqnews/2010/feb/HQ_10-040_SDO_launch.html|archive-date = 10 अगस्त 2013|url-status = live}}</ref> यह पृथ्वी और सूर्य के बीच [[लग्रांज बिन्दु | लाग्रंगियन बिंदु]] (जिस पर दोनों ओर का गुरुत्वीय खींचाव बराबर होता है) पर स्थापित हुआ। सोहो ने अपने प्रक्षेपण के बाद से अनेक तरंगदैर्ध्यों पर सूर्य की निरंतर छवि प्रदान की है। <ref name=Dwivedi2006/> प्रत्यक्ष सौर प्रेक्षण के अलावा, सोहो को बड़ी संख्या में [[धूमकेतु]]ओं की खोज के लिए समर्थ किया गया है, इनमे से अधिकांश [[सूर्य के निवाले छोटे धूमकेतु]]<sup>[[:en:sungrazing comet|En]]</sup> है जो सूर्य के पास से गुजरते ही भस्म हो जाते है। <ref>{{cite web |title=Sungrazing Comets |url=http://sungrazer.nrl.navy.mil/ |publisher=[[Large Angle and Spectrometric Coronagraph|LASCO]] ([[US Naval Research Laboratory]]) |accessdate=19 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171223021345/https://sungrazer.nrl.navy.mil/ |archive-date=23 दिसंबर 2017 |url-status=live }}</ref> [[File:Magnificent_CME_Erupts_on_the_Sun_-_August_31.jpg|thumb|300px|left| अगस्त 2012 में उफनता एक सौर उदगार, नासा की सौर गतिविधि वेधशाला द्वारा लिया गया चित्र]] इन सभी उपग्रहों ने सूर्य का प्रेक्षण क्रांतिवृत्त के तल से किया है, इसलिए उसके भूमध्यरेखीय क्षेत्रों मात्र के विस्तार में प्रेक्षण किए गए है। [[युलीसेस |यूलिसिस यान]] सूर्य के ध्रुवीय क्षेत्रों के अध्ययन के लिए 1990 में प्रक्षेपित हुआ था। इसने सर्वप्रथम [[बृहस्पति]] की यात्रा की, इससे पहले इसे क्रांतिवृत्त तल के ऊपर की दूर की किसी कक्षा में बृहस्पति के गुरुत्वीय बल के सहारे ले जाया गया था। संयोगवश, यह 1994 की बृहस्पति के साथ [[धूमकेतु शूमेकर-लेवी 9]] की टक्कर के निरीक्षण के लिए अच्छी जगह स्थापित हुआ था। एक बार यूलिसिस अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया, इसने उच्च सौर अक्षांशों की सौर वायु और चुंबकीय क्षेत्र शक्ति का निरीक्षण करना शुरू कर दिया और पाया कि उच्च अक्षांशों पर करीब 750 किमी/सेकंड से आगे बढ़ रही सौर वायु उम्मीद की तुलना में धीमी थी, साथ ही पाया गया कि वहां उच्च अक्षांशों से आई हुई बड़ी चुंबकीय तरंगे थी जो कि बिखरी हुई [[ब्रह्माण्ड किरण#प्रकार | गांगेय कॉस्मिक किरणे]] थी। <ref>{{cite web |author=[[Jet Propulsion Laboratory|JPL]]/[[California Institute of Technology|CALTECH]] |title=Ulysses: Primary Mission Results |url=http://ulysses.jpl.nasa.gov/science/mission_primary.html |publisher=[[NASA]] |year=2005 |accessdate=22 मार्च 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060106150819/http://ulysses.jpl.nasa.gov/science/mission_primary.html |archive-date=6 जनवरी 2006 |url-status=dead }}</ref> वर्णमंडल की तात्विक बहुतायतता को [[खगोलीय स्पेक्ट्रमिकी | स्पेक्ट्रोस्कोपी]] अध्ययनों से अच्छी तरह जाना गया है, पर सूर्य के अंदरूनी ढांचे की समझ उतनी ही बुरी है। [[सौर वायु]] नमूना वापसी मिशन, [[जेनेसिस (अंतरिक्ष यान) | जेनेसिस]], खगोलविदों द्वारा सीधे सौर सामग्री की संरचना को मापने के लिए रचा गया था। जेनेसिस 2004 में पृथ्वी पर लौटा, पर पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश पर तैनात करते वक्त [[पैराशूट]] के विफल होने से यह अकस्मात् अवतरण से क्षतिग्रस्त हो गया था। गंभीर क्षति के बावजूद, कुछ उपयोगी नमूने अंतरिक्ष यान के नमूना वापसी मॉड्यूल से बरामद किए गए हैं और विश्लेषण के दौर से गुजर रहे हैं। <ref> {{Cite journal |last=Calaway |first=M.J. |title=Genesis capturing the Sun: Solar wind irradiation at Lagrange 1 |journal=[[Nuclear Instruments and Methods in Physics Research B]] |volume=267 |issue=7 |page=1101 |year=2009 |doi=10.1016/j.nimb.2009.01.132 |last2=Stansbery |first2=Eileen K. |last3=Keller |first3=Lindsay P. |ref=harv |bibcode = 2009NIMPB.267.1101C }}</ref> [[सोलर टेरेस्ट्रियल रिलेशंस ओब्सर्वेटरी]] (स्टीरियो) मिशन अक्टूबर 2006 में शुरू हुआ था। दो एक सामान अंतरिक्ष यान कक्षाओं में इस तरीके से प्रक्षेपित किए गए जो उनको (बारी बारी से) कहीं दूर आगे की ओर खींचते और धीरे धीरे पृथ्वी के पीछे गिराते। यह सूर्य और सौर घटना के [[स्टीरियोस्कोपी | त्रिविम]] प्रतिचित्रण करने में समर्थ है, जैसे कि [[कोरोनल मास एजेक्सन]]<sup>[[:en:coronal mass ejections|En]]</sup>। <ref name=inst>{{cite web|date = March 8, 2006|url = http://www.nasa.gov/mission_pages/stereo/spacecraft/index.html|title = STEREO Spacecraft & Instruments|work = NASA Missions|accessdate = May 30, 2006|archive-url = https://web.archive.org/web/20130523040216/http://www.nasa.gov/mission_pages/stereo/spacecraft/index.html|archive-date = 23 मई 2013|url-status = live}}</ref><ref>{{Cite journal| title= Sun Earth Connection Coronal and Heliospheric Investigation (SECCHI)|author= Howard R. A., Moses J. D., Socker D. G., Dere K. P., Cook J. W.|journal= Solar Variability and Solar Physics Missions Advances in Space Research|volume= 29|issue= 12|pages=2017–2026|year= 2002| ref= harv}}</ref> [[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन]] ने 2015-16 तक [[आदित्य (अंतरिक्ष यान) | आदित्य]] नामक एक 100 किलो के उपग्रह का प्रक्षेपण निर्धारित किया है। सोलर कोरोना की गतिशीलता के अध्ययन के लिए इसका मुख्य साधन एक [[कोरोनाग्राफ]]<sup>[[:en:Coronagraph|En]]</sup> होगा। <ref>{{cite web|url= http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-09-09/india/33712860_1_parameters-of-space-weather-three-year-mission-polar-satellite-launch-vehicle|title= Aditya 1 launch delayed to 2015-16|author= Srinivas Laxman & Rhik Kundu, TNN|date= 9 सितंबर 2012|work= [[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ]]|publisher= [[Bennett, Coleman & Co. Ltd.]]|access-date= 14 जून 2013|archive-url= https://web.archive.org/web/20130510225707/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-09-09/india/33712860_1_parameters-of-space-weather-three-year-mission-polar-satellite-launch-vehicle|archive-date= 10 मई 2013|url-status= live}}</ref>
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)