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== क्रिस्टल समुदाय (Crystal Systems) == भिन्न भिन्न प्रकार के क्रिस्टलों को समझाने के लिये सुविधानुसार क्रिस्टलीय अक्षों की भिन्न भिन्न अवस्थाएँ कल्पित की जाती हैं। इनका छह क्रिस्टल समुदायों में वर्गीकरण किया गया है। प्रत्येक समुदाय की व्याख्या अक्षों के स्वरूप के ऊपर निर्भर है। इन छह समुदायों में से पाँच में अक्षों की संख्या तीन तीन हैं तथा छठे में उपयोग के विचार से तीन की अपेक्षा चार अक्ष अधिक सुविधाजनक ज्ञात हुए हैं। समुदायों की विभिन्नता अक्षों के आपस में समान या असमान रूप से झुकाव पर और एकक फलक के भिन्न भिन्न अक्षों पर अंत:खंडी अनुपात के समान या असमान होने पर, निर्भर करती है। तीनों अक्षों को इस प्रकार अभिविन्यस्त किया जाता है कि तथाकथित ल अक्ष उदग्र रहता है, र प्रेक्षक के समांतरवाले उदग्र समतल में स्थित रहता है (अर्थात् दाईं ओर से बाईं ओर को जाता है) और तीसरा य अक्ष प्रेक्षक के संमुख रहता है। ल, र और य का क्रमश: ऊपरी, दायाँ तथा सामने को सिरा धन (positive) कहलाता है तथा इनके विपरीत सिरे ऋण (negative) कहलाते हैं। यदि किसी फलक द्वारा किसी अक्ष का ऋणभाग अंत:खंडित होता है, तब उससे संबंधित मिलतर घातांक के ऊपर ऋण (—) का चिह्र बना दिया जाता है। त्रिनताक्ष (triclinic) समुदाय में तीनों अक्ष य, र ल असमान लंबाइयों के होते हैं तथा एक दूसरे पर तिर्यक् (oblique) कोण बनाते हुए झुके रहते हैं। एकनताक्ष (monoclinic) समुदाय में य, र, ल असमान हैं। य और ल एक दूसरे पर तिर्यक् कोण बनाते हैं, पर र उस समतल पर, जिसमें य और ल हैं, लंबवत् स्थित रहता है। विषमलंबाक्ष (orthorhombic) समुदाय में य, र ल असमान हैं, लेकिन एक दूसरे पर समान रूप से झुके हुए हैं। षट्कोणीय (hexagonal) समुदाय में तीन समान क्षैतिज अक्ष य1, य2, य3 होते हैं, जो एक दूसरे को 60रू के कोण पर काटते हैं तथा चौथा अक्ष ल असमान है और पहले तीनों अक्षों के समतल पर लंबवत् है। चतुष्कोणीय (tetragonal) समुदाय में दो समान क्षैतिज अक्ष य1 और य2 एक दूसरे पर समकोण बनाते हैं और उदग्र अक्ष ल असमान है। त्रिसमलंबाक्ष (isometric) समुदाय के तीन अक्ष समान हैं और एक दूसरे पर समकोण बनाते हैं। य1, य2 क्षैतिज हैं और य3 उदग्र है।
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