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== प्रदूषण एवं पर्यावरण == {{main|गंगा प्रदूषण नियंत्रण}} [[चित्र:Gaumukh.jpg|thumb|right|256px|गोमुख पर शुद्ध गंगा]]गंगा नदी विश्व भर में अपनी शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है। लम्बे समय से प्रचलित इसकी शुद्धीकरण की मान्यता का वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस नदी के जल में [[बैक्टीरियोफेज]] नामक [[विषाणु]] होते हैं, जो [[जीवाणु]]ओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी के जल में प्राणवायु ([[ऑक्सीजन]]) की मात्रा को बनाये रखने की असाधारण क्षमता है; किन्तु इसका कारण अभी तक अज्ञात है। एक राष्ट्रीय सार्वजनिक रेडियो कार्यक्रम के अनुसार इस कारण [[हैजा]] और [[पेचिश]] जैसी बीमारियाँ होने का खतरा बहुत ही कम हो जाता है, जिससे महामारियाँ होने की सम्भावना बड़े स्तर पर टल जाती है।<ref>बैक्टीरियोफेज का स्व-शुद्धिकरण प्रभाव, ऑक्सीजन रिटेन्शन रहस्य: [http://www.npr.org/templates/story/story.php?storyId=17134270 मिस्ट्री फ़ैक्टर गिव्स गैन्जेस ए क्लीन रेप्युटेशन] जूलियन क्रैन्डा-२ हॉल्लिक. नेशनल पब्लिक रेडियो।</ref> लेकिन गंगा के तट पर घने बसे औद्योगिक नगरों के नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी में मिलने से प्रदूषण पिछले कई सालों से भारत सरकार और जनता के चिन्ता का विषय बना हुआ है। औद्योगिक कचरे के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे की बहुतायत ने गंगा जल को बेहद प्रदूषित किया है। वैज्ञानिक जाँच के अनुसार गंगा का बायोलॉजिकल ऑक्सीजन स्तर ३ डिग्री (सामान्य) से बढ़कर ६ डिग्री हो चुका है। गंगा में २ करोड़ ९० लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन गिर रहा है। विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर-प्रदेश की १२ प्रतिशत बीमारियों की वजह प्रदूषित गंगा जल है। यह घोर चिन्तनीय है कि गंगाजल न स्नान के योग्य रहा, न पीने के योग्य रहा और न ही सिंचाई के योग्य। गंगा के पराभव का अर्थ होगा, हमारी समूची सभ्यता का अन्त।<ref>{{cite web |url= http://www.patrika.com/article.aspx?id=10912|title=खतरे में गंगा का अस्तित्व|access-date=[[२२ जून]] [[२००९]]|format=एएसपीएक्स| publisher=पत्रिका|language=}}</ref> गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए घड़ियालों की मदद ली जा रही है।<ref>{{cite web |url= http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/4126070.cms|title=गंगा को प्रदूषण से बचाएंगे ७१ घड़ियाल |access-date=[[२२ जून]] [[२००९]]|format=|publisher=नवभारत टाइम्स|language=}}</ref> शहर की गंदगी को साफ करने के लिए संयन्त्रों को लगाया जा रहा है और उद्योगों के कचरों को इसमें गिरने से रोकने के लिए कानून बने हैं। इसी क्रम में गंगा को राष्ट्रीय धरोहर भी घोषित कर दिया गया है और गंगा एक्शन प्लान व राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना लागू की गयी हैं। हालाँकि इसकी सफलता पर प्रश्नचिह्न भी लगाये जाते रहे हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.lokmanch.com/cms/index.php/culture/4089-ganga-pollution-state-government-responsible|title=अब गंगा प्रदूषण मामला राज्य सरकार जिम्मेवार|access-date=[[२२ जून]] [[२००९]]|format=|publisher=लोकमंच|language=}}{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> जनता भी इस विषय में जागृत हुई है। इसके साथ ही धार्मिक भावनाएँ आहत न हों इसके भी प्रयत्न किये जा रहे हैं।<ref>{{cite web|url=http://josh18.in.com/hindi/-moneylife/319321/0|title=अब मूर्ति विसर्जन से नहीं होगी गंगा मैली|access-date=[[२२ जून]] [[२००९]]|format=|publisher=जोश|language=}}{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इतना सबकुछ होने के बावजूद गंगा के अस्तित्व पर संकट के बादल छाये हुए हैं। २००७ की एक [[संयुक्त राष्ट्र]] रिपोर्ट के अनुसार हिमालय पर स्थित गंगा की जलापूर्ति करने वाले हिमनद की २०३० तक समाप्त होने की सम्भावना है। इसके बाद नदी का बहाव वर्षा-ऋतु पर आश्रित होकर मौसमी ही रह जाएगा।<ref>[http://www.boston.com/news/world/asia/articles/2007/06/24/global_warming_threatens_to_dry_up_ganges/ बोस्टन.कॉम पर] देखें- [[वैश्विक ऊष्मीकरण]] का उ.प्र. की गंगा पर प्रभाव।</ref> ===नमामि गंगे=== इस नदी की सफाई के लिए कई बार पहल की गयी लेकिन कोई भी संतोषजनक स्थिति तक नहीं पहुँच पाया।<ref>{{cite web |title=Ganga, Yamuna banks cleaned |trans-title=गंगा यमुना के किनारे पर सफाई |url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-11-12/allahabad/43979274_1_yamuna-banks-ganga-and-yamuna-holy-river |publisher=द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया |date=१२ नवम्बर २०१३ |accessdate=३ जून २०१५ |language=अंग्रेज़ी |archive-date=14 दिसंबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131214032657/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-11-12/allahabad/43979274_1_yamuna-banks-ganga-and-yamuna-holy-river |url-status=dead }}</ref> प्रधानमन्त्री चुने जाने के बाद भारत के प्रधानमन्त्री [[नरेन्द्र मोदी]] ने गंगा नदी में प्रदूषण पर नियन्त्रण करने और इसकी सफाई का अभियान चलाया।<ref>{{cite web|title=Why Narendra Modi decided to contest from Varanasi |trans-title=नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का निर्णय क्यों लिया |url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-03-17/news/48297677_1_narendra-modi-nilanjan-mukhopadhyay-prime-ministerial-candidate |publisher=द इकोनॉमिक टाइम्स |date=१७ मार्च २०१४ |accessdate=३ जून २०१५ |language=अंग्रेज़ी}}</ref> इसके बाद उन्होंने जुलाई २०१४ में भारत के आम बजट में नमामि गंगा नामक एक परियोजना आरम्भ की।<ref>{{cite web|title=Namami Ganga development Project gets 2037 crores |trans-title=नमामि गंगा विकास परियोजना को २०३७ करोड़ मिले |url=http://news.biharprabha.com/2014/07/namami-ganga-development-project-gets-2037-crores/ |publisher=बिहार प्रभा |date=१० जुलाई २०१४ |accessdate=३ जून २०१५ |language=अंग्रेज़ी}}</ref> इसी परियोजना के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने गंगा के किनारे स्थित ४८ औद्योगिक इकाइयों को बन्द करने का आदेश दिया है।<ref>{{cite web |title=निखरेगा गंगा का रूप, 48 फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश जारी हुआ |url=http://archive.patrika.com/news/48-industrial-units-polluting-ganga-asked-to-close-down/1017955 |publisher=पत्रिका समाचार समूह |date=१५ जुलाई २०१४ |accessdate=३ जून २०१५ }}{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> भारत में 2020 के 25 मार्च से 3 मई तक लोक डाउन होने का कारण गंगा के किनारे सभी फैक्टरी बंद है जिस के कर उन का गंदा पानी गंगा में नहीं जा रहा है और गंगा का जल बहुत अधिक साफ हुआ है पिछले दस वर्षो में पहली बार हरकिपोड़ी में गंगा का पानी पीने के लायक बताया गया है।<ref>{{cite web|title=For 1st time in decades, tests show Ganga water in Haridwar fit to drink|url=https://timesofindia.com/city/dehradun/for-1st-time-in-decades-tests-show-ganga-water-in-haridwar-fit-to-drink/amp_articleshow/75239530.cms|publisher=The times of India|date=20 अप्रैल 2020}}{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
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