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=== पशु चिकित्सा एवं पशुपालन में उपयोग === विशिष्ट ग्रह स्थिति में उत्पन्न दुधारू पशु तद्नुसार कम या अधिक दूध देने वाले होते हैं। वृष लग्न में उत्पन्न गाय या बैल ठीक रहते हैं परन्तु सिंह लग्न या धनु लग्न या मेष लग्न में प्रसूत होने वाले पशु अधिक मरखा (मरखना) होते हैं। कर्क या मकर या मीन लग्नोत्पन्न गाय, भैसें, यदि किसी पापग्रह से हष्ट न हों तो खूब दुधारू होते हैं, शुक्र एवं चन्द्र की दृष्टि लग्न एवं सप्तम भाव पर होने से पशु में दूध की मात्रा बढ़ाने वाली है। अल्प मात्रा में दूध देने वाले को यदि विहित मुहूर्त में शतावरी आदि वनस्पतियों का सेवन कराने पर उनके दूध में पर्याप्त वृद्धि उपलक्षित होती है।
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