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== चीनी नाटक == चीनी नाटकों का इतिहास काफी पुराना है। भारतवर्ष की भाँति देवी देवता या राजाओं महाराजाओं के समक्ष किए जानेवाले प्राचीन नृत्य ही इन नाटकों के मूलआधार है। थांग राजवंशों के काल में मिंग ह्वांग नामक सम्राट् ने राजदरबारियों के मनोरंजन के लिये लड़के लड़कियों की नाट्यसंस्था खोली। आगे चलकर विलासप्रिय सुंग राजाओं के काल (960-1278 ई.) में नाट्यकला की उन्नति हुई, लेकिन इस कला का पूर्ण विकास हुआ मंगोल राजाओं के समय (1200-1368 ई.)। इस युग में एक से एक सुंदर नाटकों की रचना हुई। छ्वान् छु श्यवान त्स छि के 8 भागों में 100 नाटकों का संग्रह छपा है। वांग शि-फू का लिखा हुआ शि श्यांग चि (पश्चिम भवन की कहानी) इस काल के सर्वश्रेष्ठ नाटकों में गिना जाता है। इसमें वायु, पुष्प, हिम और ज्योत्स्ना आदि संबंधी अनेक संवाद प्रस्तुत हैं जिनसे प्रेम और षड्यंत्र की सूचना मिलती है। नाटक की आख्यायिका अत्यंत साधारण होने पर भी बड़े कलात्मक ढंग से रंगमंच पर उपस्थित की जाती है। पात्रों की बोलचाल, उनका उठना बैठना और चलना फिरना आदि क्रियाएँ बड़ी मंद गति और कोमलता के साथ संपन्न होती हैं। छि छुन् श्यांग (चाओ परिवार का अनाथ) इस काल का दूसरा लोकप्रिय नाटक है जिसमें ईसा के पूर्व छठी शताब्दी के एक मंत्री की कहानी है जो अपने शत्रु की हत्या का षड्यंत्र रचता है। मिंग काल (1368-1644 ई.) में शिल्प आदि की दृष्टि से नाट्य साहित्य में प्रगति हुई। इस युग की साहित्यिक भाषा में शब्द बहुल सैकड़ों नाटक प्रकाश में आए, कुछ में 48 अंकों तक का समावेश किया गया। का ओत्स छेंग का लिखा हुआ फी या ची (सितार कहानी) इस काल का श्रेष्ठ नाटक माना जाता है। सन् 1704 में यह पहली बार खेला गया था। इसके विभिन्न संस्करणों में 24 से लेकर 42 दृश्य तक प्रकाशित हुए हैं। इसमें राजभक्ति, पितृभक्ति और पतिसेवा का सुंदर चित्रण प्रस्तुत हुआ है। मंचू राजवंशों के काल (1644-1900 ई.) में चीनी नाट्य साहित्य की लोकप्रियता में वृद्धि हुई। इस समय प्राय: युद्धसंबंधी नाटकों की रचना ही अधिक हुई। "शाश्वत युवावस्था का प्रासाद" इस काल की एक श्रेष्ठ कृति है जिसे हुंग शेंग ने सन् 1688 में प्रस्तुत किया। इस नाटक में सम्राट् मिंग ह्वांग और उसकी प्रेमिका यांग युह्वान् की करुण कहानी का सुंदर चित्रण है। === आधुनिक नाट्य साहित्य === नए चीन में जननाट्यों की लोकप्रियता बहुत बढ़ गई है। वहाँ सैकड़ों तरह के नाटक खेले जाते हैं और नाटकघरों में दर्शकों की भीड़ लगी रहती है। सान छा खौ (तीन सड़कों का बड़ा रास्ता) नामक नाट्य में सुंगकाल की घटना पर आधारित एक षड्यंत्र की कहानी है। सुंग वू कुंग (जादूगर वानर) एक दूसरा लोकप्रिय नाटक है। इसमें रंगमंच पर भीषण युद्ध के साहसपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। अभिनीत होने पर इस नाटक में प्रसिद्ध अभिनेता लिन् शाओ छुन् ने वानर का अभिनय किया था। पीकिंग, उत्तर चीन, शेचुआन, शांसी आदि भिन्न भिन्न प्रांतों के गीतिनाट्य (आपेरा) भी चीन में अत्यंत प्रसिद्ध हैं। पीकिंग के गीतिनाट्य में चीन के सुप्रसिद्ध अभिनेता में ला फांग ने स्त्रियों का अभिनय किया। इसमें "मछुओं का प्रतिशोध", "स्वर्ग में तूफान" "ग्वाला और गांव की लड़की" आदि नाट्य प्रसिद्ध हैं। चेकियांग गीतिनाट्य शांघाई में बहुत लोकप्रिय है। इसमें स्त्रियाँ ही पुरुष और स्त्री दोनां का अभिनय करती हैं। "ल्यांग शान पो और चू यिंग थाय" इसका सुप्रसिद्ध नाट्य है। कैंटन गीतिनाट्य कैंटन, हांगकांग, मलाया और इंडोनेशिया में लोकप्रिय हुए हैं। जननाट्यों की माँग बढ़ जाने से आजकल चीन के तरुण लेखक नाटक लिखने में जुट गए हैं। को मो-रो ने महान कवि चुयुवान् के चरित पर आधारित सुंदर नाटक की रचना की है। लाओ श ने "हमारा राष्ट्र सर्वप्रथम है" और माओ तुन ने "छिंगमिंग त्योहार के पूर्व और पश्चात्" नाटक लिखे हैं। त्साओ यू का "गर्जन, वर्षा और सूर्योदय" तथा छेन पो छेन का "लड़कों के लिये काम" नाटक सुप्रसिद्ध हैं। लि छि ह्वा ने "संघर्ष और प्रतिसंघर्ष", तू इन ने "नई वस्तुओं के आमने सामने", आन पो ने "नोमिन नदी में बसंत की बहार", हू ति ने "लाल खुफिया", शा क फू ने "हथियारों से", छेन छि-तुंग ने "दरिया और पहाड़ों के उस पार" तथा श्या येन ने "परीक्षा" नामक सुंदर नाटकों की रचना कर चीनी साहित्य की समृद्ध बनाया है।
सारांश:
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