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==मृत्यु पर अकबर की प्रतिक्रिया== अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था, पर उनकी यह लड़ाई कोई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं थी, बल्कि अपने सिद्धान्तों और मूल्यों की लड़ाई थी। एक वह था जो अपने क्रूर साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था, जब की एक तरफ महाराणा प्रताप जी थे जो अपनी भारत मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहे थे। महाराणा प्रताप की मृत्यु पर [[अकबर]] को बहुत ही दुःख हुआ क्योंकि ह्रदय से वो महाराणा प्रताप के गुणों का प्रशंसक था और अकबर जनता था की महाराणा प्रतात जैसा वीर कोई नहीं है इस धरती पर। यह समाचार सुन अकबर रहस्यमय तरीके से मौन हो गया और उसकी आँख में आँसू आ गए।<ref>{{Cite web|url=https://satyagrah.scroll.in/article/106747/profile-maharana-pratap|title=महाराणा प्रताप : जिनके लिए मेवाड़ सिर्फ एक राज्य नहीं था|last=भारद्वाज|first=अनुराग|website=Satyagrah|language=hi-IN|access-date=2020-05-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20200513203300/https://satyagrah.scroll.in/article/106747/profile-maharana-pratap|archive-date=13 मई 2020|url-status=dead}}</ref> महाराणा प्रताप के स्वर्गावसान के समय अकबर लाहौर में था और वहीं उसे सूचना मिली कि महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गई है। अकबर की उस समय की मनोदशा पर अकबर के दरबारी दुरसा आढ़ा ने राजस्थानी छन्द में जो विवरण लिखा वो कुछ इस तरह है:-[[चित्र:Maharana Pratap Statue felicitated by president of INDIA.jpg|अंगूठाकार|401x401px|महाराणा प्रताप की प्रतिमा उनकी बहादुरी और वीरता को दर्शाती है।]]{{Quote|अस लेगो अणदाग पाग लेगो अणनामी<br /> गो आडा गवड़ाय जीको बहतो घुरवामी<br /> नवरोजे न गयो न गो आसतां नवल्ली<br /> न गो झरोखा हेठ जेठ दुनियाण दहल्ली<br /> गहलोत राणा जीती गयो दसण मूंद रसणा डसी<br /> निसा मूक भरिया नैण तो मृत शाह प्रतापसी<br />}}{{Quote box|हे गेहलोत राणा प्रतापसिंह तेरी मृत्यु पर शाह यानि सम्राट ने दाँतों के बीच जीभ दबाई और निश्वास के साथ आँसू टपकाए। क्योंकि तूने कभी भी अपने घोड़ों पर मुगलिया दाग नहीं लगने दिया। तूने अपनी पगड़ी को किसी के आगे झुकाया नहीं, हालाँकि तू अपना आडा यानि यश या राज्य तो गवाँ गया लेकिन फिर भी तू अपने राज्य के धुरे को बाएँ कन्धे से ही चलाता रहा। तेरी रानियाँ कभी नवरोजों में नहीं गईं और ना ही तू खुद आसतों यानि बादशाही डेरों में गया। तू कभी शाही झरोखे के नीचे नहीं खड़ा रहा और तेरा रौब दुनिया पर निरन्तर बना रहा। इसलिए मैं कहता हूँ कि तू सब तरह से जीत गया और बादशाह हार गया। '''अपनी मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए अपना पूरा जीवन का बलिदान कर देने वाले ऐसे वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और उनके स्वामिभक्त अश्व चेतक को शत-शत कोटि-कोटि प्रणाम। '''|align=left|width=700px|title=हिंदी में अनुवाद}} :
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