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=== साहित्य === प्राचीन काल के [[संस्कृत साहित्य]] में होली के अनेक रूपों का विस्तृत वर्णन है। श्रीमद्भागवत महापुराण में रसों के समूह [[रास]] का वर्णन है। अन्य रचनाओं में 'रंग' नामक उत्सव का वर्णन है जिनमें [[हर्ष]] की [[प्रियदर्शिका]] व [[रत्नावली]]{{Ref_label|रत्नावली|क|none}} तथा [[कालिदास]] की [[कुमारसंभवम्]] तथा [[मालविकाग्निमित्रम्]] शामिल हैं। कालिदास रचित [[ऋतुसंहार]] में पूरा एक सर्ग ही 'वसन्तोत्सव' को अर्पित है। [[भारवि]], [[माघ महाकवि|माघ]] और अन्य कई संस्कृत कवियों ने वसन्त की खूब चर्चा की है। [[चंद बरदाई]] द्वारा रचित हिंदी के पहले महाकाव्य [[पृथ्वीराज रासो]] में होली का वर्णन है। [[भक्तिकाल]] और [[रीतिकाल]] के [[हिन्दी साहित्य]] में होली और फाल्गुन माह का विशिष्ट महत्व रहा है। [[आदिकाल|आदिकालीन]] कवि [[विद्यापति]] से लेकर भक्तिकालीन [[सूरदास]], [[रहीम]], [[रसखान]], [[पद्माकर]]{{Ref_label|पद्माकर|ख|none}}, [[जायसी]], [[मीराबाई]], [[कबीर]] और रीतिकालीन [[बिहारी]], [[केशव]], [[घनानंद]] आदि अनेक कवियों को यह विषय प्रिय रहा है। महाकवि सूरदास ने वसन्त एवं होली पर 78 पद लिखे हैं। पद्माकर ने भी होली विषयक प्रचुर रचनाएँ की हैं।<ref name="sanskrit">{{cite web|url= http://www.shabdamhindi.com/sanskrit_holi.html|title= होली या होलिका या होलाका|access-date= 3 मार्च 2008|format= एचटीएम|publisher= विश्व हिंदू समाज|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20100129075808/http://www.shabdamhindi.com/sanskrit_holi.html|archive-date= 29 जनवरी 2010|url-status= dead}}</ref> इस विषय के माध्यम से कवियों ने जहाँ एक ओर नितान्त लौकिक नायक नायिका के बीच खेली गई अनुराग और प्रीति की होली का वर्णन किया है, वहीं राधा कृष्ण के बीच खेली गई प्रेम और छेड़छाड़ से भरी होली के माध्यम से सगुण साकार भक्तिमय प्रेम और निर्गुण निराकार भक्तिमय प्रेम का निष्पादन कर डाला है।<ref name="bhakti">{{cite web|url= http://www.hindinest.com/bhaktikal/009.htm|title= भक्तिकालीन काव्य में होली|access-date= 4 मार्च 2008|format= एचटीएम|publisher= हिंदीनेस्ट.कॉम|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20080225135601/http://www.hindinest.com/bhaktikal/009.htm|archive-date= 25 फ़रवरी 2008|url-status= dead}}</ref> [[सूफ़ी संत]] हज़रत [[निज़ामुद्दीन औलिया]], [[अमीर खुसरो]] और [[बहादुर शाह ज़फ़र]] जैसे मुस्लिम संप्रदाय का पालन करने वाले कवियों ने भी होली पर सुंदर रचनाएँ लिखी हैं जो आज भी जन सामान्य में लोकप्रिय हैं।<ref name="hindu" /> आधुनिक हिंदी कहानियों [[प्रेमचंद]] की ''राजा हरदोल'', प्रभु जोशी की ''अलग अलग तीलियाँ'', [[तेजेंद्र शर्मा]] की ''एक बार फिर होली'', ओम प्रकाश अवस्थी की ''होली मंगलमय हो'' तथा स्वदेश राणा की ''हो ली'' में होली के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं। भारतीय फ़िल्मों में भी होली के दृश्यों और गीतों को सुंदरता के साथ चित्रित किया गया है। इस दृष्टि से [[शशि कपूर]] की [[उत्सव (1984 फ़िल्म)|उत्सव]], [[यश चोपड़ा]] की [[सिलसिला]], [[वी शांताराम]] की [[झनक झनक पायल बाजे (1955 फ़िल्म)|झनक झनक पायल बाजे]] और [[नवरंग (1959 फ़िल्म)|नवरंग]] इत्यादि उल्लेखनीय हैं।<ref name="bhaskar">{{cite web|url= http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110029_edit.html|title= हरी-हरी वसुंधरा पे नीला-नीला ये गगन|access-date= 4 मार्च 2008|format= एचटीएमएल|publisher= दैनिक भास्कर|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20080904212010/http://www.bhaskar.com/2008/02/11/0802110029_edit.html|archive-date= 4 सितंबर 2008|url-status= live}}</ref>
सारांश:
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