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== तेजाजी के मंदिर == तेजाजी के भारत में अनेक मंदिर हैं। तेजाजी का मुख्य मंदिर खरनाल में हैं। तेजाजी के मंदिर राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गजरात तथा हरयाणा में हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार श्री पी.एन. ओक का दावा है कि ताजमहल शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजो महालय है। आगरा मुख्यतः जाटों की नगरी है। जाट लोग भगवान शिव को तेजाजी के नाम से जानते हैं। The Illustrated Weekly of India के जाट विशेषांक (28 जून 1971) के अनुसार जाट लोगों के तेजा मंदिर हुआ करते थे। अनेक शिवलिंगों में एक तेजलिंग भी होता है जिसके जाट लोग उपासक थे। इस वर्णन से भी ऐसा प्रतीत होता है कि ताजमहल भगवान तेजाजी का निवासस्थल तेजोमहालय था। श्री पी.एन. ओक अपनी पुस्तक Tajmahal is a Hindu Temple Palace में 100 से भी अधिक प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजोमहालय है।<ref>{{Cite web |url=http://agoodplace4all.com/indianculture/taj.php |title=भारतीय संस्कृति |access-date=10 जून 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070708092724/http://agoodplace4all.com/indianculture/taj.php |archive-date=8 जुलाई 2007 |url-status=live }}</ref> === वीर तेजाजी खरनाल मेले का आयोजन - === प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशवीं को [https://toprajasthani.com/2021/02/07/%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C तेजाजी] की याद में खरनाल गाँव में भारी मेले का आयोजन होता हे जिसमे लाखो लोगो की तादात में लोग गाजे -बाजे के सात आते हे ! सांप के ज़हर के तोड़ के रूप में गौ मूत्र और गोबर की राख के प्रयोग की शुरुआत सबसे पहले तेजाजी ने की थी ! लोक देवता तेजाजी का गौ रक्षा के लिए हुआ मार्मिक बलिदान उनको लोकदेवता की श्रेणी में ले आया । गाँव का चबूतरा ' तेजाजी का थान ' कहलाता है ।
सारांश:
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