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===अर्थापत्ति के भेद=== यह दो प्रकार की है--'दृष्टार्थापत्ति', जैसे --ऊपर के उदाहरण में, तथा 'श्रुतार्थापत्ति' । जैसे- सुनने में आता है कि देवदत्त जो जीवित है, घर में नहीं हैं। इस से 'देवदत्त कहीं और स्थान में है' इसकी कल्पना करना 'अर्थापत्ति' है। अन्यथा 'जीवित होकर घर में नहीं रहना' इन दोनों बातों में समन्वय नहीं हो सकता। [[प्रभाकर]] का मत है कि किसी भी प्रमाण से ज्ञात विषय की उपपत्ति के लिए 'अर्थापत्ति' हो सकती है, केवल दृष्ट और श्रुत ही से नहीं। यह बात साधारण रूप से प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों से सिद्ध नहीं होता, तस्मात् 'अर्थापत्ति' का नाम का एक भिन्न 'प्रमाण' मीमांसक मानते हैं।
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