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== पैथोफिज़ियोलॉजी (रोग के कारण पैदा हुए क्रियात्मक परिवर्तन)== अर्श कुशन सामान्य मानवीय संरचना का हिस्सा हैं और वे रोग जनक केवल तब बनते हैं जब उनमें असमान्य परिवर्तन होते हैं।<ref name=World09/> सामान्य तौर पर [[गुहा मार्ग]] में तीन मुख्य प्रकार के कुशन उपस्थित होते हैं।<ref name=Review09/> ये बाएं पार्श्व, दाएँ अग्रस्थ और दाएँ कूल्हे की स्थितियों पर स्थित होते हैं।<ref name=Kaidar2007/> इनमें न तो [[धमनियां]] होती है और न ही [[नसें]] बल्कि इनमें रक्त वाहिकाएं होती हैं जिनको [[साइनोसॉएड्स]] कहा जाता है तथा इनमें [[संयोजी ऊतक]] तथा [[चिकनी मांसपेशियां]] होती हैं।<ref name=ASCRS2011>{{cite book|last=Beck|first=David|title=The ASCRS textbook of colon and rectal surgery|year=2011|publisher=स्प्रिंगर|location=New York|isbn=9781441915818|pages=174–177|url=http://books.google.ca/books?id=DhQ1A35E8jwC&pg=PA174|edition=2nd ed.|access-date=12 जनवरी 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20131203033928/http://books.google.ca/books?id=DhQ1A35E8jwC&pg=PA174|archive-date=3 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> साइनोसॉएड की दीवारों में रक्त वाहिकाओं के समान [[मांसपेशीय ऊतक]] नहीं होते हैं।<ref name=World09/> रक्त वाहिकाओं के इस समूह को [[अर्श स्नायुजाल]]कहा जाता है।<ref name=ASCRS2011/> अर्श कुशन [[fecal incontinence|मल संयम]] के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ये आराम की स्थिति में गुदा बंदी दाब का 15–20% भाग का योगदान करते हैं और मल को मार्ग देते समय [[गुदा संवरणी]] मांसपेशियों की रक्षा करते हैं।<ref name=World09/> जब कोई व्यक्ति नीचे झुकता है तो अंतर-उदर दाब बढ़ता है और अर्श कुशन, अपने आकार को संयोजित करके गुदा को बंद रखने में सहयोग करता है।<ref name=Kaidar2007/> यह विश्वास किया जाता है कि बवासीर लक्षण तब पैदा होते हैं जब ये संवहनी संरचनाएं नीचे की ओर सरकती हैं या जब शिरापरक दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है।<ref name=AFP2006/> बढ़ा हुआ [[गुदा संवरणी]] दाब भी बवासीर लक्षणों में शामिल हो सकता है।<ref name=Kaidar2007/> बवासीर दो तरह के होते हैं:[[बढ़े हुए अर्श स्नायुजाल]] के कारण आंतरिक और घटे हुए अर्श स्नायुजाल के कारण वाह्य।<ref name=Kaidar2007/> एक [[दांतेदार पंक्ति]] दोनो क्षेत्रों को विभक्त करती है।<ref name=Kaidar2007/>
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