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=== कोशग्रन्थ === आचार्य हेम ने संस्कृत में अनेक कोशों की रचना के साथ साथ [[प्राकृत]]—[[अपभ्रंश]]—कोश भी (देशीनाममाला) उन्होंने सम्पादित किया। उन्होने चार कोशों की रचना की- अभिधानचिन्तामणीमाला, अनेकार्थसङ्ग्रह, निघण्टुशेष और देशीनाममाला। अभिधानचिन्तामणि (या 'अभिधानचिन्तामणिनाममाला') इनका प्रसिद्ध पर्यायवाची कोश है। छह काण्डों के इस कोश का प्रथम काण्ड केवल जैन देवों और जैनमतीय या धार्मिक शब्दों से सम्बद्ध है। देव, मर्त्य, भूमि या तिर्यक, नारक और सामान्य—शेष पाँच काण्ड हैं। 'अभिधानचिन्तामणि' पर उनकी स्वविरचित 'यशोविजय' टीका है—जिसके अतिरिक्त, व्युत्पत्तिरत्नाकर' (देवसागकरणि) और 'सारोद्धार' (वल्लभगणि) प्रसिद्ध टीकाएँ है। इसमें नाना छन्दों में १५४२ श्लोक है। निघण्टुशेष अभिधानचिन्तामणि का पूरक कोश है जिसमें वनस्पतियों से सम्बन्धित शब्दों का संग्रह है। यह कोश छः काण्डों में बद्ध है। दूसरा कोश 'अनेकार्थसंग्रह' (श्लोक संख्या १८२९) है जो छह काण्डों में है। एकाक्षर, द्वयक्षर, त्र्यक्षर आदि के क्रम से काण्डयोजन है। अन्त में परिशिष्टत काण्ड [[अव्यय|अव्ययों]] से सम्बद्ध है। प्रत्येक काण्ड में दो प्रकार की शब्दक्रमयोजनाएँ हैं—(१) प्रथमाक्षरानुसारी और (२) अन्तिमाक्षरानुसारी। 'देशीनाममाला' [[प्राकृत]] का (और अंशतः [[अपभ्रंश]] का भी) शब्दकोश है जिसका आधार 'पाइयलच्छी' नाममाला है।
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