सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
अमरनाथ
" सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
{{आज का आलेख}} {{ज्ञानसन्दूक हिन्दू मन्दिर | name = अमरनाथ गुफा | image = Cave Temple of Lord Amarnath.jpg | alt = | caption = अमरनाथ गुफा मंदिर | map_type = India Jammu and Kashmir#India | coordinates = {{coord|34.2149|75.5008|type:landmark_region:IN|display=inline,title}} | country = भारत | state = [[जम्मू और कश्मीर]] | district = | location = पहलगाम, अनंतनाग | elevation_m = | deity = [[शिव]] | festivals= | architecture = | inscriptions = | year_completed = | creator = | website = {{url|www.shriamarnathjishrine.com|shriamarnathjishrine.com}} }} '''अमरनाथ''' हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह [[कश्मीर]] राज्य के [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]] शहर के उत्तर-पूर्व में १३५ सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल से १३,६०० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) १९ मीटर और चौड़ाई १६ मीटर है। गुफा ११ मीटर ऊँची है।<ref>{{cite web|url= http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/3283049.cms|title= अमरनाथ यात्रा : प्रकृति दर्शन और अध्यात्म का योग|access-date= 4 मार्च 2009|format= सीएमएस|publisher= नवभारत टाइम्स|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20110917113857/http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/3283049.cms|archive-date= 17 सितंबर 2011|url-status= live}}</ref> अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।<ref>{{cite web|url= http://www.amarujala.com/amarnath/detail.asp?mainsec=1|title= अमरत्व की राह दिखाता अमरनाथ धाम|access-date= 3 अगस्त 2007|format= एचटीएमएल|publisher= अमर उजाला|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20070927010036/http://www.amarujala.com/amarnath/detail.asp?mainsec=1|archive-date= 27 सितंबर 2007|url-status= dead}}</ref> यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू [[हिमानी शिवलिंग]] भी कहते हैं। [[आषाढ़]] [[पूर्णिमा]] से शुरू होकर [[रक्षाबन्धन|रक्षाबंधन]] तक पूरे [[श्रावण|सावन]] महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं।<ref>{{cite web|url= http://www.jagran.com/books/mansarovar/inner.asp?ArticleID=5|title= भगवान शिव के तीर्थस्थान|access-date= 3 अगस्त 2007|format= एचटीएमएल|publisher= जागरण|archive-url= https://web.archive.org/web/20070928030723/http://www.jagran.com/books/mansarovar/inner.asp?ArticleID=5|archive-date= 28 सितंबर 2007|url-status= live}}</ref> गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूँदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। [[चन्द्रमा]] के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। [[श्रावण]] पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और [[अमावस्या]] तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं। == जनश्रुतियाँ == [[चित्र:Rohin amarnath1.jpg|thumb|250px|right|अमरनाथ गुफा में बर्फ से बना प्रकृतिक शिवलिंग]] [[चित्र:Lord Amarnath.jpg|thumb|250px|right|अमरनाथ गुफा में बर्फ से बना प्रकृतिक शिवलिंग]] जनश्रुति प्रचलित है कि इसी गुफा में माता [[पार्वती]] को भगवान शिव ने अमरकथा सुनाई थी, जिसे सुनकर सद्योजात [[शुक-शिशु]] [[शुकदेव]] ऋषि के रूप में अमर हो गये थे। गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई दे जाता है, जिन्हें श्रद्धालु अमर पक्षी बताते हैं। वे भी अमरकथा सुनकर अमर हुए हैं। ऐसी मान्यता भी है कि जिन श्रद्धालुओं को कबूतरों को जोड़ा दिखाई देता है, उन्हें शिव पार्वती अपने प्रत्यक्ष दर्शनों से निहाल करके उस प्राणी को मुक्ति प्रदान करते हैं। यह भी माना जाता है कि भगवान शिव ने अद्र्धागिनी पार्वती को इस गुफा में एक ऐसी कथा सुनाई थी, जिसमें अमरनाथ की यात्रा और उसके मार्ग में आने वाले अनेक स्थलों का वर्णन था। यह कथा कालांतर में अमरकथा नाम से विख्यात हुई। कुछ विद्वानों का मत है कि भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को [[अनन्तनाग|अनंतनाग]] में छोड़ा, माथे के [[चन्दन|चंदन]] को [[चंदनबाड़ी]] में उतारा, अन्य [[पिस्सुओं]] को [[पिस्सू टॉप]] पर और गले के [[शेषनाग]] को [[शेषनाग]] नामक स्थल पर छोड़ा था। ये तमाम स्थल अब भी अमरनाथ यात्रा में आते हैं। अमरनाथ गुफा का सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गडरिए को चला था।<ref>{{cite web|url= http://www.newsonair.com/samachar_bharati1.htm|title= सूफीवाद और कश्मीरियत|access-date= 3 अगस्त 2007|format= एचटीएम|publisher= समाचार भारती|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20070809113901/http://www.newsonair.com/samachar_bharati1.htm|archive-date= 9 अगस्त 2007|url-status= dead}}</ref> आज भी चौथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है। आश्चर्य की बात यह है कि अमरनाथ गुफा एक नहीं है। अमरावती नदी के पथ पर आगे बढ़ते समय और भी कई छोटी-बड़ी गुफाएं दिखती हैं। वे सभी बर्फ से ढकी हैं। == अमरनाथ यात्रा == अमर नाथ यात्रा पर जाने के भी दो रास्ते हैं। एक [[पहलगाम]] होकर और दूसरा [[सोनमर्ग]] [[बलटाल]] से। यानी कि पहलमान और बलटाल तक किसी भी सवारी से पहुँचें, यहाँ से आगे जाने के लिए अपने पैरों का ही इस्तेमाल करना होगा। अशक्त या वृद्धों के लिए सवारियों का प्रबंध किया जा सकता है। पहलगाम से जानेवाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल १४ किलोमीटर है और यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है। इसीलिए सरकार इस मार्ग को सुरक्षित नहीं मानती और अधिकतर यात्रियों को पहलगाम के रास्ते अमरनाथ जाने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन रोमांच और जोखिम लेने का शौक रखने वाले लोग इस मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं। इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने जोखिम पर यात्रा करते है। रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार जिम्मेदारी नहीं लेती है। === पहलगाम से अमरनाथ === '''[[पहलगाम]]''' जम्मू से ३१५ किलोमीटर की दूरी पर है। यह विख्यात पर्यटन स्थल भी है और यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य देखते ही बनता है। पहलगाम तक जाने के लिए जम्मू-कश्मीर पर्यटन केंद्र से सरकारी बस उपलब्ध रहती है। पहलगाम में गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से लंगर की व्यवस्था की जाती है। तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है। पहलगाम के बाद पहला पड़ाव '''चंदनबाड़ी''' है, जो पहलगाम से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। यहाँ रात्रि निवास के लिए कैंप लगाए जाते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। कहा जाता है कि पिस्सु घाटी पर देवताओं और राक्षसों के बीच घमासान लड़ाई हुई जिसमें राक्षसों की हार हुई। लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है। चंदनबाड़ी से आगे इसी नदी पर बर्फ का यह पुल सलामत रहता है। चंदनबाड़ी से १४ किलोमीटर दूर '''शेषनाग''' में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। पिस्सू घाटी समुद्रतल से ११,१२० फुट की ऊँचाई पर है। यात्री शेषनाग पहुँच कर ताजादम होते हैं। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है। इस झील में झांककर यह भ्रम हो उठता है कि कहीं आसमान तो इस झील में नहीं उतर आया। यह झील करीब डेढ़ किलोमीटर लम्बाई में फैली है। किंवदंतियों के मुताबिक '''शेषनाग झील''' में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं, लेकिन यह दर्शन खुशनसीबों को ही नसीब होते हैं। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं। शेषनाग से '''पंचतरणी''' आठ मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं, जिनकी समुद्रतल से ऊँचाई क्रमश: १३,५०० फुट व १४,५०० फुट है। महागुणास चोटी से पंचतरणी तक का सारा रास्ता उतराई का है। यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों से ढका है। ऊँचाई की वजह से ठंड भी ज्यादा होती है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहाँ सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं। अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल आठ किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। इसी दिन गुफा के नजदीक पहुँच कर पड़ाव डाल रात बिता सकते हैं और दूसरे दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी लौटा जा सकता है। कुछ यात्री शाम तक शेषनाग तक वापस पहुँच जाते हैं। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है। '''बलटाल से अमरनाथ'''- जम्मू से बलटाल की दूरी ४०० किलोमीटर है। जम्मू से उधमपुर के रास्ते बलटाल के लिए जम्मू कश्मीर पर्यटक स्वागत केंद्र की बसें आसानी से मिल जाती हैं। बलटाल कैंप से तीर्थयात्री एक दिन में अमरनाथ गुफा की यात्रा कर वापस कैंप लौट सकते हैं। == सन्दर्भ == {{Reflist}} {{प्रमुख शिव मंदिर}} {{शक्तिपीठ}} == बाह्यसूत्र == # [https://web.archive.org/web/20070928031058/http://epaper.jagran.com/main.aspx?edate=6%2F27%2F2006&editioncode=40&pageno=12 श्रद्धा व रोमांच से भरपूर अमरनाथ यात्रा, दैनिक ज़ागरण, जून २७, २००६ ] लेखक: बेदी # [https://web.archive.org/web/20070818212733/http://www.amarnathyatra.org/ अमरनाथ यात्रा का आधिकारिक जालस्थल] # [https://web.archive.org/web/20190531113642/http://amarnathyatra-india.com/ यात्रा 2009 के विषय में जानकारी ] # [https://web.archive.org/web/20070819121431/http://www.amarnathyatra.org/route.htm#top यात्रा के विषय में विस्तृत जानकारी ] # [http://www.panchjanya.com/dynamic/modules.php?name=Content&pa=showpage&pid=329&page=6 हिन्दू समाज की आस्था और एकता का प्रतीक - अमरनाथ यात्रा]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} (पाञ्चजन्य) # [https://web.archive.org/web/20100731073641/http://www.jagranyatra.com/2010/07/amarnath-yatra-india/ पापमोचक रोमांचक अमरनाथ यात्रा] [[श्रेणी:धर्मिक गुफाएँ]] [[श्रेणी:हिन्दू तीर्थ स्थल]] [[श्रेणी:पर्यटन]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:भारत के तीर्थ]] [[श्रेणी:जम्मू और कश्मीर में पूजास्थल]] [[श्रेणी:जम्मू और कश्मीर की गुफाएँ]]
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)
इस पृष्ठ पर प्रयुक्त साँचें:
साँचा:Cite web
(
सम्पादित करें
)
साँचा:Dead link
(
सम्पादित करें
)
साँचा:Reflist
(
सम्पादित करें
)
साँचा:आज का आलेख
(
सम्पादित करें
)
साँचा:ज्ञानसन्दूक हिन्दू मन्दिर
(
सम्पादित करें
)
साँचा:प्रमुख शिव मंदिर
(
सम्पादित करें
)
साँचा:शक्तिपीठ
(
सम्पादित करें
)