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[[File:India Awadh locator map.svg|thumb|right|250px|अवधी भाषी क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार]] '''अवधी''' [[हिन्दी|हिंदी]] क्षेत्र की एक [[उपभाषा]] है। यह [[उत्तर प्रदेश]] के "अवध क्षेत्र" ([[लखनऊ]], [[रायबरेली]], [[सुल्तानपुर]], [[बाराबंकी]], [[उन्नाव]], [[हरदोई]], [[सीतापुर]], [[लखीमपुर]], [[अयोध्या]], [[जौनपुर]], [[प्रतापगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश|प्रतापगढ़]], [[इलाहाबाद|प्रयागराज]], [[कौशाम्बी (बहुविकल्पी)|कौशाम्बी]], [[अम्बेडकर नगर ज़िला|अम्बेडकर नगर]], [[गोण्डा|गोंडा]],[[बस्ती]], [[बहराइच]],[[बलरामपुर]], [[सिद्धार्थनगर जिला|सिद्धार्थनगर]], [[श्रावस्ती जिला|श्रावस्ती]] तथा [[फतेहपुर, उत्तर प्रदेश|फतेहपुर]]) में बोली जाती है। इसके अतिरिक्त इसकी एक शाखा [[बघेलखंड]] में [[बघेली]] नाम से प्रचलित है। 'अवध' शब्द की [[व्युत्पत्तिशास्त्र|व्युत्पत्ति]] "[[अयोध्या]]" से है। इस नाम का एक सूबा के राज्यकाल में था। [[तुलसीदास]] ने अपने "मानस" में [[अयोध्या]] को 'अवधपुरी' कहा है। इसी क्षेत्र का पुराना नाम '[[कोशल|कोसल]]' भी था जिसकी महत्ता प्राचीन काल से चली आ रही है।<ref>{{cite news |url=http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/guestcolumn/article1-Union-Public-Service-Commission-Civil-Service-Exam-controversy-Hindi-50-62-451729.html |title=कल की बोली आज की भाषा |date=17 सितम्बर 2014 |work=लाइव हिंदुस्तान | language = hi}}</ref><ref>{{cite news |url=http://naidunia.jagran.com/magazine/tarang-hindi-is-struggling-with-regional-languages-182086 |title=हिंदी से भिड़ती बोलियां |date=13 सितम्बर 2014 |work=[[नईदुनिया|नई दुनिया]] |language=hi |access-date=19 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160305013734/http://naidunia.jagran.com/magazine/tarang-hindi-is-struggling-with-regional-languages-182086 |archive-date=5 मार्च 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/vimarsh-program-in-mayaram-surjan-bhawan-183281 |title=भाषाओं में न हो प्रतिस्पर्धा का भाव |date=15 सितम्बर 2014 |work=[[नईदुनिया|नई दुनिया]] |language=hi |access-date=19 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304214519/http://naidunia.jagran.com/madhya-pradesh/vimarsh-program-in-mayaram-surjan-bhawan-183281 |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/bulandshahr-11628663.html |title=निज भाषा उन्नति है सब धर्मों का मूल |date=14 सितम्बर 2014 |work=जागरण |language=hi |access-date=19 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170425092657/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/bulandshahr-11628663.html |archive-date=25 अप्रैल 2017 |url-status=live }}</ref> भाषा शास्त्री डॉ॰ सर "जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन" के भाषा सर्वेक्षण के अनुसार अवधी बोलने वालों की कुल आबादी 1615458 थी जो सन् 1971 की जनगणना में 28399552 हो गई। मौजूदा समय में शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 6 करोड़ से ज्यादा लोग अवधी बोलते हैं। भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त के 19 जिलों- [[सुलतानपुर जिला|सुल्तानपुर]], [[अमेठी]], [[बाराबंकी]], [[प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश|प्रतापगढ़]], [[इलाहाबाद|प्रयागराज]], [[कौशाम्बी जिला|कौशांबी]], [[फतेहपुर, उत्तर प्रदेश|फतेहपुर]], [[रायबरेली]], [[उन्नाव]], [[लखनऊ]], [[हरदोई]], [[सीतापुर]], [[लखीमपुर, उत्तर प्रदेश|लखीमपुर खीरी]], [[बहराइच]], [[श्रावस्ती]], [[बलरामपुर]], [[गोण्डा|गोंडा]], [[अयोध्या]] व [[अम्बेडकर नगर ज़िला|अंबेडकर नगर]] में पूरी तरह से यह बोली जाती है। जबकि 7 जिलों- [[जौनपुर]], [[मिर्ज़ापुर|मिर्जापुर]], [[कानपुर]], [[शाहजहाँपुर जिला|शाहजहांपुर]], आजमगढ़,[[सिद्धार्थनगर जिला|सिद्धार्थनगर]], [[बस्ती, उत्तर प्रदेश|बस्ती]] और [[बांदा, उत्तर प्रदेश|बांदा]] के कुछ क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है। बिहार प्रांत के 2 जिलों के साथ पड़ोसी देश [[नेपाल]] के कई जिलों - बांके जिला, बर्दिया जिला, दांग जिला, [[कपिलवस्तु]] जिला, पश्चिमी नवलपरासी जिला, रुपन्देही जिला, कंचनपुर जिला आदि में यह काफी प्रचलित है। इसी प्रकार दुनिया के अन्य देशों- [[मॉरिशस]], त्रिनिदाद एवं टुबैगो, [[फ़िजी|फिजी]], गयाना, [[सूरीनाम]] सहित [[ऑस्ट्रेलिया|आस्ट्रेलिया]], [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]] व [[हॉलैंड (नीदरलैंड)]] में भी लाखों की संख्या में अवधी बोलने वाले लोग हैं। == अवधी भाषी क्षेत्र का भौगोलिक विस्तार == अवधी प्रमुख रूप से [[भारत]], [[नेपाल]] और [[फ़िजी|फिजी]] में बोली जाती है। भारत में अवधी मुख्यतः उत्तर प्रदेश राज्य में बोली जाती है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के कुछ जिलों में बोली जाती है। उत्तर प्रदेश के अवधी भाषी जिले: अमेठी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, रायबरेली, प्रयागराज, कौशांबी, अम्बेडकर नगर, सिद्धार्थ नगर, गोंडा, बलरामपुर, बाराबंकी, अयोध्या, लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, बस्ती एवं फतेहपुर। नेपाल के अवधी भाषी जिले कपिलवस्तु, बर्दिया, डांग, रूपनदेही, नवलपरासी, कंचनपुर, बांके आदि तराई नेपाल के जिले। इसी प्रकार दुनिया के अन्य देशों- मॉरिशस, त्रिनिदाद एवं टुबैगो, फिजी, गयाना, सूरीनाम सहित आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व हॉलैंड (नीदरलैंड) में भी लाखों की संख्या में अवधी बोलने वाले लोग हैं। == परिचय == गठन की दृष्टि से हिंदी क्षेत्र की उपभाषाओं को दो वर्गों-पश्चिमी और पूर्वी में विभाजित किया जाता है। अवधी पूर्वी के अंतर्गत है। पूर्वी की दूसरी उपभाषा [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]] है। अवधी को कभी-कभी बैसवाड़ी भी कहते हैं। परंतु बैसवाड़ी अवधी की एक बोली मात्र है जो [[उन्नाव]], [[लखनऊ]], [[रायबरेली]] और [[फतेहपुर, उत्तर प्रदेश|फतेहपुर]] जिले के कुछ भागों में बोली जाती है। [[तुलसीदास]] कृत [[श्रीरामचरितमानस|रामचरितमानस]] एवं [[मलिक मोहम्मद जायसी|मलिक मुहम्मद जायसी]] कृत [[पद्मावत]] सहित कई प्रमुख ग्रंथ इसी बोली की देन है।<ref>{{cite news |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-11589070.html |title=अवध की मिट्टी में प्रेम-सौहार्द की महक |date=१४ सितम्बर २०१४ |work=महाराष्ट्र टाइम्स |language=hi |access-date=19 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170422134648/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/aligarh-city-11589070.html |archive-date=22 अप्रैल 2017 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://maharashtratimes.indiatimes.com/maharashtra/nagpur-vidarbha/bhasha/articleshow/42400396.cms |title=भाषा सक्तीने नव्हे, हृदयातून समृद्ध होते |date=29 अगस्त 2014 |work=जागरण | language = hi}}</ref> इसका केन्द्र [[अयोध्या]] है। अयोध्या [[लखनऊ]] से १२० किमी की दूरी पर पूर्व में है। [[सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'|सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला']], [[महावीर प्रसाद द्विवेदी|पं महावीर प्रसाद द्विवेदी]], [[रामचन्द्र शुक्ल|आचार्य रामचन्द्र शुक्ल]], [[राममनोहर लोहिया]], [[कुँवर नारायण|कुंवर नारायण]], [[दिवाकर द्विवेदी]] की यह जन्मभूमि है। उमराव जान, [[नरेन्द्र देव|आचार्य नरेन्द्र देव]] और [[राम प्रकाश द्विवेदी]] की कर्मभूमि भी यही है। [[रमई काका]] की लोकवाणी भी इसी भाषा में गुंजरित हुई। हिंदी के रीतिकालीन कवि द्विजदेव के वंशज अयोध्या का राजपरिवार है। इसी परिवार की एक कन्या का विवाह दक्षिण कोरिया के राजघराने में अरसा पहले हुआ था। हिंदी के वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ्ा त्रिपाठी ने अवधी भाषा और व्याकरण पर महत्त्वपूर्ण पुस्तक लिखी है। [[फ़ाहियान|फाह्यान]] ने भी अपने विवरण में अयोध्या का जिक्र किया है। आज की अवधी प्रवास और संस्कृतिकरण के चलते खड़ी बोली और अंग्रेजी के प्रभाव में आ रही है।<ref>{{cite news |url=http://www.livehindustan.com/news/location/rajwarkhabre/article1-story-0-0-245320.html |title=गोस्वामी तुलसीदास अवधी भाषा के श्रेष्ठतम कवि |date=२५ जुलाई २०१४ |work=लाइव हिंदुस्तान | language = hi}}</ref> अवधी के पश्चिम में पश्चिमी वर्ग की बुंदेली और ब्रज का, दक्षिण में छत्तीसगढ़ी का और पूर्व में भोजपुरी बोली का क्षेत्र है। इसके उत्तर में नेपाल की [[तराई क्षेत्र|तराई]] है । == व्याकरण == हिंदी खड़ीबोली से अवधी की विभिन्नता मुख्य रूप से व्याकरणात्मक है। इसमें कर्ता कारक के परसर्ग (विभक्ति) "ने" का नितांत अभाव है। अन्य परसर्गों के प्राय: दो रूप मिलते हैं- ह्रस्व और दीर्घ। (कर्म-संप्रदान-संबंध : क, का; करण-अपादान : स-त, से-ते; अधिकरण : म, मा)। '''[[संज्ञा]]ओं''' की खड़ीबोली की तरह दो विभक्तियाँ होती हैं- विकारी और अविकारी। अविकारी विभक्ति में संज्ञा का मूल रूप (राम, लरिका, बिटिया, मेहरारू) रहता है और विकारी में बहुवचन के लिए "न" प्रत्यय जोड़ दिया जाता है (यथा रामन, लरिकन, बिटियन, मेहरारुन)। कर्ता और कर्म के अविकारी रूप में व्यंजनान्त संज्ञाओं के अंत में कुछ बोलियों में एक ह्रस्व "उ" की श्रुति होती है (यथा रामु, पूतु, चोरु)। किंतु निश्चय ही यह पूर्ण स्वर नहीं है और भाषाविज्ञानी इसे फुसफुसाहट के स्वर-ह्रस्व "इ" और ह्रस्व "ए" (यथा सांझि, खानि, ठेलुआ, पेहंटा) मिलते हैं। संज्ञाओं के बहुधा दो रूप, ह्रस्व और दीर्घ (यथा नद्दी नदिया, घोड़ा घोड़वा, नाऊ नउआ, कुत्ता कुतवा) मिलते हैं। इनके अतिरिक्त अवधी क्षेत्र के पूर्वी भाग में एक और रूप-दीर्घतर मिलता है (यथा कुतउना)। अवधी में कहीं-कहीं खड़ीबोली का ह्रस्व रूप बिलकुल लुप्त हो गया है; यथा बिल्ली, डिब्बी आदि रूप नहीं मिलते बेलइया, डेबिया आदि ही प्रचलित हैं। '''[[सर्वनाम]]''' में खड़ीबोली और ब्रज के "मेरा तेरा" और "मेरो तेरो" रूप के लिए अवधी में "मोर तोर" रूप हैं। इनके अतिरिक्त पूर्वी अवधी में पश्चिमी अवधी के "सो" "जो" "को" के समानांतर "से" "जे" "के" रूप प्राप्त हैं। '''[[क्रिया]]''' में भविष्यकाल रूपों की प्रक्रिया खड़ीबोली से बिलकुल भिन्न है। खड़ीबोली में प्राय: प्राचीन वर्तमान (लट्) के तद्भव रूपों में- गा-गी-गे जोड़कर (यथा होगा, होगी, होंगे आदि) रूप बनाए जाते हैं। ब्रज में भविष्यत् के रूप प्राचीन भविष्यत्काल (लट्) के रूपों पर आधारित हैं। (यथा होइहैंउ भविष्यति, होइहोंउ भविष्यामि)। अवधी में प्राय: भविष्यत् के रूप तव्यत् प्रत्ययांत प्राचीन रूपों पर आश्रित हैं (होइबाउ भवितव्यम्)। अवधी की पश्चिमी बोलियों में केवल उत्तमपुरुष बहुवचन के रूप तव्यतांत रूपों पर निर्भर हैं। शेष ब्रज की तरह प्राचीन भविष्यत् पर। किंतु मध्यवर्ती और पूर्वी बोलियों में क्रमश: तव्यतांत रूपों की प्रचुरता बढ़ती गई है। क्रियार्थक संज्ञा के लिए खड़ीबोली में "ना" प्रत्यय है (यथा होना, करना, चलना) और ब्रज में "नो" (यथा होनो, करनो, चलनो)। परंतु अवधी में इसके लिए "ब" प्रत्यय है (यथा होब, करब, चलब)। अवधी में निष्ठा एकवचन के रूप का "वा" में अंत होता है (यथा भवा, गवा, खावा)। [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] में इसके स्थान पर "ल" में अंत होनेवाले रूप मिलते हैं (यथा भइल, गइल)। अवधी का एक मुख्य भेदक लक्षण है अन्यपुरुष एकवचन की सकर्मक क्रिया के भूतकाल का रूप (यथा करिसि, खाइसि, मारिसि)। य-"सि" में अंत होनेवाले रूप अवधी को छोड़कर अन्यत्र नहीं मिलते। अवधी की सहायक क्रिया में रूप "ह" (यथा हइ, हइं), "अह" (अहइ, अइई) और "बाटइ" (यथा बाटइ, बाटइं) पर आधारित हैं। ऊपर लिखे लक्षणों के अनुसार अवधी की बोलियों के तीन वर्ग माने गए हैं : पश्चिमी, मध्यवर्ती और पूर्वी। पश्चिमी बोली पर निकटता के कारण ब्रज का और पूर्वी पर भोजपुरी का प्रभाव है। इनके अतिरिक्त [[बघेली]] बोली का अपना अलग अस्तित्व है। विकास की दृष्टि से अवधी का स्थान [[बृज|ब्रज]], [[कन्नौजी भाषा|कन्नौजी]] और [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] के बीच में पड़ता है। ब्रज की व्युत्पत्ति निश्चय ही [[शौरसेनी]] से तथा भोजपुरी की [[मागधी]] [[प्राकृत]] से हुई है। अवधी की स्थिति इन दोनों के बीच में होने के कारण इसका अर्धमागधी से निकलना मानना उचित होगा। खेद है कि अर्धमागधी का हमें जो प्राचीनतम रूप मिलता है वह पाँचवीं शताब्दी ईसवी का है और उससे अवधी के रूप निकालने में कठिनाई होती है। [[पालि भाषा|पालि]] भाषा में बहुधा ऐसे रूप मिलते हैं जिनसे अवधी के रूपों का विकास सिद्ध किया जा सकता है। संभवत: ये रूप प्राचीन अर्धमागधी के रहे होंगे। == अवधी साहित्य == '''{{main|अवधी साहित्य}}''' प्राचीन अवधी साहित्य की दो शाखाएँ हैं : एक भक्तिकाव्य और दूसरी प्रेमाख्यान काव्य। भक्तिकाव्य में गोस्वामी तुलसीदास का "रामचरितमानस" (सं. 1631) अवधी साहित्य की प्रमुख कृति है। इसकी भाषा संस्कृत शब्दावली से भरी है। "[[श्रीरामचरितमानस|रामचरितमानस]]" के अतिरिक्त तुलसीदास ने अन्य कई ग्रंथ अवधी में लिखे हैं। इसी भक्ति साहित्य के अंतर्गत लालदास का "[[अवधबिलास]]" आता है। इसकी रचना संवत् 1700 में हुई। इनके अतिरिक्त कई और भक्त कवियों ने रामभक्ति विषयक ग्रंथ लिखे। संत कवियों में बाबा मलूकदास भी अवधी क्षेत्र के थे। इनकी बानी का अधिकांश अवधी में है। इनके शिष्य बाबा मथुरादास की बानी भी अधिकतर अवधी में है। बाबा धरनीदास यद्यपि छपरा जिले के थे तथापि उनकी बानी अवधी में प्रकाशित हुई। कई अन्य संत कवियों ने भी अपने उपदेश के लिए अवधी को अपनाया है। प्रेमाख्यान काव्य में सर्वप्रसिद्ध ग्रंथ [[मलिक मोहम्मद जायसी|मलिक मुहम्मद जायसी]] रचित "पद्मावत" है जिसकी रचना "[[श्रीरामचरितमानस|रामचरितमानस]]" से 34 वर्ष पूर्व हुई। दोहे चौपाई का जो क्रम "[[पद्मावत]]" में है प्राय: वही "मानस" में मिलता है। प्रेमाख्यान काव्य में मुसलमान लेखकों ने सूफी मत का रहस्य प्रकट किया है। इस काव्य की परंपरा कई सौ वर्षों तक चलती रही। मंझन की "[[मधुमालती]]", उसमान की "चित्रावली", आलम की "माधवानल कामकंदला", नूरमुहम्मद की "इंद्रावती" और शेख निसार की "यूसुफ जुलेखा" इसी परंपरा की रचनाएँ हैं। शब्दावली की दृष्टि से ये रचनाएँ हिंदू कवियों के ग्रंथों से इस बात में भिन्न हैं कि इसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों की उतनी प्रचुरता नहीं है। प्राचीन अवधी साहित्य में अधिकतर रचनाएँ देशप्रेम, समाजसुधार आदि विषयों पर और मुख्य रूप से व्यंग्यात्मक हैं। कवियों में [[प्रतापनारायण मिश्र]], बलभद्र दीक्षित "पढ़ीस", [[वंशीधर शुक्ल]], चंद्रभूषण द्विवेदी "[[रमई काका]]", गुरु प्रसाद सिंह "[[कवि मृगेश|मृगेश]]" और शारदाप्रसाद "भुशुंडि" विशेष उल्लेखनीय हैं। प्रबंध की परंपरा में "[[श्रीरामचरितमानस|रामचरितमानस]]" के ढंग का एक महत्वपूर्ण आधुनिक ग्रंथ [[द्वारका प्रसाद मिश्र|द्वारिकाप्रसाद मिश्र]] का "[[कृष्णायन]]" है। इसकी भाषा और शैली "मानस" के ही समान है और ग्रंथकार ने कृष्णचरित प्राय: उसी तन्मयता और विस्तार से लिखा है जिस तन्मयता और विस्तार से [[तुलसीदास]] ने रामचरित अंकित किया है। मिश्र जी ने इस ग्रंथ की रचना द्वारा यह सिद्ध कर दिया है कि प्रबंध के लिए अवधी की प्रकृति आज भी वैसी ही उपादेय है जैसी तुलसीदास के समय में थी। == अवधी लोक साहित्य == अवधी लोक साहित्य की एक समृद्ध परम्परा है। अवधी लोक साहित्य पर कई शोध हुए हैं। इनमें कुछ प्रमुख हैं- अवधी लोक साहित्य -डा॰ सरोजनी रोहतगी (१९७१) == अवधी लोक गायन == प्राचीन काल में अवधी साहित्य केवल पद्द के रूप में फला फूला है। अतः अवधी लोक गायकी भी प्राचीन काल से ही चली आ रही है। अवधी कलाकारों को बिरहा, नौटंकी नाच, अहिरवा नृत्य, कंहरवा नृत्य, चमरवा नृत्य, कजरी आदि नाट्य विधाओं का आविष्कारक माना जाता है तथा इसमें इन्हे अभी भी महारत हासिल है। अवधी की गारी तो पूरे अवध मे प्रसिद्ध है, इसे शादी-ब्याह में महिलाओं द्वारा गाया जाता है।अवधी के सुप्रसिद्ध गायक [[दिवाकर द्विवेदी]] है। == अवधी भाषा का संघर्ष == विश्व भर में 6 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा अवधी को अभी तक भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह नहीं मिल सकी है। इसी प्रकार फिजी में अवधी भाषा को फिजी हिंदी के रूप में प्रस्तुत करके भारत सरकार ने फिजी में भी अवधी के अस्तित्व को मानने से इंकार कर दिया है। किन्तु इन्हीं सब के बीच नेपाल ने '''प्रांत संख्या ५ में अवधी को आधिकारिक भाषा का दर्जा''' प्रदान करके अवधी साहित्यकारों की कलम में जान फूंकने का कार्य किया है। इससे भारत के अवधी भाषी भी काफी उत्साहित हैं। ==इन्हें भी देखें== * [[अवधी साहित्य]] * [[अवधी दिवस]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{InterWiki|code=awa}} * [https://web.archive.org/web/20190508071119/http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A5%80 अवधी कविता कोश] * [https://web.archive.org/web/20140808060959/http://books.google.co.in/books?id=BfYWgO-dnn0C&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अवधी ग्रन्थावली] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140808061027/http://books.google.co.in/books?id=aupRtbV8-2gC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अवधी ग्रन्थावली, भाग - २ ] (गूगल पुस्तक ; लेखक - जगदीश पीयूष) *[[:iso639-3:awa|एसआईएल इंटरनेशनल पर अवधी की प्रविष्टि]] *[https://web.archive.org/web/20200103075649/https://www.digitallibrary.io/awa अवधी किताबें] {{हिन्दी की बोलियाँ}} {{हिन्द-आर्य भाषाएँ}} {{भारत की भाषाएँ |state=autocollapse}} [[श्रेणी:विश्व की भाषाएँ]] [[श्रेणी:हिन्दी की बोलियाँ]] [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश की भाषाएँ]]
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