सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
प्रतिहार कला शैली
" सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
'''प्रतिहार कला शैली''' मध्यकालीन मूर्ति शैली है, इस शैली की प्रतिमाओं में [[गुप्त राजवंश|गुप्त काल]] की अनेक विशेषताएँ समाहित हैं। प्रतिहार कला शैली की प्रतिमाएँ मध्यकालीन शैली की अन्य कला शैलियों की तुलना में सबसे अधिक प्रभावशाली एवं सुन्दर हैं। इस शैली की प्रतिमाओं के मुख पर प्रसन्नता का भाव प्रदर्शित हुआ है। इन प्रतिमाओं के शरीर की सुडौलता पर विशेष ध्यान दिया गया है तथा अलंकरणों का कम प्रयोग हुआ है। उत्तर-प्रदेश के जिला [[झाँसी]] स्थित [[बरुआ सागर]] का विशाल मन्दिर प्रतिहार कला शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मन्दिर के प्रवेश द्वार पर अनेक सुन्दर मूर्तियाँ उकेरी गईं हैं। इस मन्दिर की कलाकृतियों को देखने से स्पष्ट होता है कि उस समय के कलाकार मूर्तियों के अंग-प्रत्यंग की सुडौलता के प्रति अत्यन्त सजग थे तथा इनके निर्माण में सिद्धहस्त थे।<ref>डॉ॰ एस०डी० त्रिवेदी, बुन्देलखण्ड की मूर्ति सम्पदा, "उत्तर-प्रदेश" पत्रिका, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उत्तर-प्रदेश, लखनऊ, संस्करण 1981, पृष्ठ-107 </ref> ==प्रतिहार कला दीर्घा == <gallery mode="packed" style="font-size:88%; line-height:130%; border-bottom:1px #aaa solid;" heights="230"> File:Teli ka Mandir (15702266503).jpg|[[तेली का मंदिर]] के चार प्रवेश द्वारों में से एक। यह हिंदू मंदिर महाराजाधिराज श्रीमद् आदि वराह राजपुत्र [[मिहिर भोज]] प्रतिहार द्वारा बनाया गया था।<ref name="Bajpai2006">{{cite book|author=K. D. Bajpai|title=History of Gopāchala|url=https://books.google.com/books?id=Q3KcwLKuRnYC&pg=PA31|year=2006|publisher=Bharatiya Jnanpith|isbn=978-81-263-1155-2|page=31}}</ref> File:Sculptures near Teli Mandir, Gwalior Fort.jpg|तेली का मंदिर, [[ग्वालियर किला]] के पास मूर्तियां। File:Jain statues, Gwalior.jpg|जैन धर्म से संबंधित गुफा स्मारकों और मूर्तियों को [[सिद्धांचल गुफाओं]], ग्वालियर किले के अंदर रॉक फेस में उकेरा गया है। File:Baroli Temple Complex1.jpg|बरौली मंदिरों में घाटेश्वर महादेव मंदिर. प्रतिहार राजपुत्र द्वारा निर्मित आठ मंदिरों का परिसर चारदीवारी के भीतर स्थित है। </gallery> == सन्दर्भ == <references/> [[श्रेणी:शिल्पकला]]
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)
इस पृष्ठ पर प्रयुक्त साँचा:
साँचा:Cite book
(
सम्पादित करें
)