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लग्न भाव को प्रथम भाव भी बोला जाता है| यह भाव कुण्ड्ली में सबसे ऊपर मध्य स्थित होता है| यही से कुण्डली के भावों की गणना आरम्भ होती है| ये भाव क्रमश: प्रथम भाव, द्वितीय भाव, तृ्तीय भाव, चतुर्थ भाव, पंचम भाव, षष्ट भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, नवम भाव, दशम भाव, एकादश भाव, द्वादश भाव है| इसमें अगर बालक के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज में कन्या लग्न हो तो कुण्डली कन्या लग्न की कहलाती है| {{भारतीय ज्योतिष}} {{वैदिक साहित्य}} [[श्रेणी:ज्योतिष]]
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