सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
सुरत शब्द योग
" सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
'''सुरत शब्द योग''' एक आंतरिक साधन या अभ्यास है जो [[संत मत]] और अन्य संबंधित आध्यात्मिक परंपराओं में अपनाई जाने वाली [[योग]] पद्धति है। [[संस्कृत]] में 'सुरत' का अर्थ [[आत्मा]], 'शब्द' का अर्थ ध्वनि और 'योग' का अर्थ जुड़ना है। इसी [[शब्द]] को 'ध्वनि की धारा' या 'श्रव्य जीवन धारा' कहते हैं।<ref>Singh, K., ''Naam or Word''. Blaine, WA: Ruhani Satsang Books. ISBN 0-942735-94-3, 1999; [http://www.ruhanisatsangusa.org/naam/naam_shabd1.htm BOOK TWO: SHABD, The Sound Principle] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090129114256/http://ruhanisatsangusa.org/naam/naam_shabd1.htm |date=29 जनवरी 2009 }}.</ref>. [[शरीर]] में शारीरिक, मानसिक और आत्मिक बोध-भान होते हैं। इनसे अलग एक और [[तत्त्व]] है जो इन सब का साक्षी है जिसे सुरत, [[चेतन तत्त्व]] चेतना, या चेतनता कहा गया है। सृष्टिक्रम में वही सुरत क्रमश: शब्द, [[प्रकाश]] (आत्मा), [[मन]] और शरीर में आ जाती है। सुरत का सहज और स्वाभाविक तरीके से इसी मार्ग से लौट जाना सुरत शब्द योग का विषय और प्रयोजन है।<ref>{{cite book |title=संत मत और आत्मानुभूति |author= दयाल फकीर चंद |editor=डॉ॰आई. सी. शर्मा |publisher=मानवता मंदिर होशियारपुर |year=1988 |page=177 and 178 |language=[[Hindi]]</ref> सुरत को [[परम तत्त्व]] भी कहा गया है। [[जीवन]] के रचना क्रम में हिलोर पैदा होने पर सुरत और शब्द दो हस्तियाँ बन जाती हैं और जीवन का खेल प्रारंभ होता है। सुरत में शब्द ([[ध्वनि]]) की ओर आकर्षित होने का स्वाभाविक गुण है। यह सुरत शब्द योग का आधार सिद्धांत है।<ref>{{cite book |title=संत मत (दयाल फकीर मत की व्याख्या) |author=भगत मुंशीराम |publisher=कश्यप पब्लिकेशन |year=2008 |page=49 |language = hi |ISBN=9788190550147}}</ref>. == इन्हें भी देखें == *[[संत मत]] *[[शिव दयाल सिंह]] *[[बाबा फकीर चंद]] *[[शिव ब्रत लाल]] *[[राधास्वामी मत]] == सन्दर्भ == {{reflist}} {{योग}} [[श्रेणी:सुरत शब्द योग]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:धर्म]] {{आधार}}
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)
इस पृष्ठ पर प्रयुक्त साँचें:
साँचा:Cite book
(
सम्पादित करें
)
साँचा:Reflist
(
सम्पादित करें
)
साँचा:Webarchive
(
सम्पादित करें
)
साँचा:आधार
(
सम्पादित करें
)
साँचा:योग
(
सम्पादित करें
)