सामग्री पर जाएँ
मुख्य मेन्यू
मुख्य मेन्यू
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
मार्गदर्शन
मुखपृष्ठ
हाल में हुए बदलाव
बेतरतीब पृष्ठ
मीडियाविकि के बारे में सहायता
भारतपीडिया
खोजें
खोजें
दिखावट
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
व्यक्तिगत उपकरण
खाता बनाएँ
लॉग-इन करें
लॉग-आउट किए गए संपादकों के लिए पृष्ठ
अधिक जानें
योगदान
वार्ता
"
सोहर
" सम्पादित करें
पृष्ठ
चर्चा
हिन्दी
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
उपकरण
उपकरण
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
क्रियाएँ
पढ़ें
सम्पादित करें
स्रोत सम्पादित करें
इतिहास देखें
सामान्य
कड़ियाँ
पृष्ठ से जुड़े बदलाव
विशेष पृष्ठ
पृष्ठ की जानकारी
दिखावट
साइडबार पर ले जाएँ
छिपाएँ
चेतावनी:
आपने लॉग-इन नहीं किया हुआ है। अगर आप सम्पादन करते हैं तो इस पृष्ठ के सम्पादन इतिहास में आपका IP पता दृश्य होगा। अगर आप
लॉग-इन
करते हैं या
खाता बनाते हैं
तो दूसरी सुविधाओं के साथ-साथ आपके सम्पादनों का श्रेय आपके सदस्यनाम पर दिया जाएगा।
ऐन्टी-स्पैम जाँच। इसे
नहीं
भरें!
'''सोहर''' घर में सन्तान होने पर गाया जाने वाला मंगल गीत है। इसको संतान के जन्म और उससे संबंधित अवसरों जैसे [[सतमासा]], इत्यादि अवसरों पर गाया जाता है। इन गीतों में संतान के जन्म, उससे सम्बन्धित कहानियों और उत्सवों के सुन्दर वर्णन मिलते हैं। [[राम]] जन्म और [[कृष्ण]] जन्म की सुंदर कथाएँ भी सोहरों में हैं। राम के जन्मदिन [[राम नवमी|रामनवमी]] और कृष्ण के जन्मदिन [[जन्माष्टमी|कृष्णाष्टमी]] के अवसर पर भी [[भजन]] के साथ सोहर गाने की परम्परा है। ; एक सोहर :''छापक पेड़ छिउलिया त पतवन धनवन हो :''तेहि तर ठाढ़ हिरिनिया त मन अति अनमन हो॥ :''चरतहिं चरत हिरनवा त हिरिनी से पूछेले हो :''हरिनी ! की तौर चरहा झुरान कि पानी बिनु मुरझेलु हो॥ :''नाहीं मोर चरहा झुरान ना पानी बिनु मुरझींले हो :''हिरना ! आजु राजा के छठिहार तोहे मारि डरिहें हो॥ :''मचियहिं बइठल कोसिला रानी, हरिनी अरज करे हो :''रानी ! मसुआ त सींझेला रसोइया खलरिया हमें दिहितू नू हो॥ :''पेड़वा से टाँगबो खलरिया त मनवा समुझाइबि हो :''रानी ! हिरी-फिरी देखबि खलरिया जनुक हरिना जियतहिं हो :''जाहु हरिनी घर अपना, खलरिया ना देइब हो :''हरिनी ! खलरी के खँजड़ी मढ़ाइबि राम मोरा खेलिहेनू हो॥ :''जब-जब बाजेला खँजड़िया सबद सुनि अहँकेली हो :''हरिनी ठाढि ढेकुलिया के नीचे हरिन के बिजूरेली हो।। नीचे [[छत्तीसगढ़]] का एक [[सधौरी]] गीत में पति-पत्नी से कह रहा है कि पत्नी दूध, मधु, और पीपर पी ले। पत्नी पीना नहीं चाहती है क्योंकि पीपर कड़वा है। पति पत्नी से कहता है सोने का कटोरे में दूध, मधु और पीपर पी लो- इसके बाद पति कहता है नहीं तो वह दूसरा [[विवाह]] कर लेगा - :''महला मां ठाढि बलमजी :''अपन रनिया मनावत हो :''रानी पीलो मधु-पीपर, :''होरिल बर दूध आहै हो। :''कइसे के पियऊँ करुरायवर :''अउ झर कायर हो :''कपूर बरन मोर दाँत :''पीपर कइसे पियब हो :''मधु पीपर नइ पीबे :''त कर लेहूं दूसर बिहाव :''पीपर के झार पहर भर :''मधु के दुइ पहर हो :''सउती के झार जनम भर :''सेजरी बंटोतिन हो :''कंचन कटोरा उठावब :''पीलडूं मधु पीपर हो - अन्त में पत्नी पीपर पी लेती है क्योंकि वह सोचती है कि पति अगर दूसरी शादी कर लेगा, तो सौतन को पूरी जिन्दगी झेलना पड़ेगा। इससे बेहतर है पीपर की झार जो सिर्फ पहर भर रहेगी। == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20110929023634/http://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/03/1_16.html सोहर - १] (मगही भाषा एवं साहित्य) [[श्रेणी:संगीत]] [[श्रेणी:संस्कृति]]
सारांश:
भारतपीडिया पर किया कोई भी योगदान अन्य सदस्यों द्वारा बदला जा सकता है और हटाया भी जा सकता है। अगर आपको अपने लिखे हुए पाठ में संपादन होना नामंजूर है तो यहाँ पर न लिखें।
आप हमें यह भी वचन देतें हैं कि यह आपने स्वयं लिखा है अथवा सार्वजनिक क्षेत्र या किसी समान मुक्त स्रोत से प्रतिलिपित किया है (अधिक जानकारी के लिये
भारतपीडिया:कॉपीराइट
देखें)।
कॉपीराइट सुरक्षित कार्यों को बिना अनुमति के यहाँ न डालें!
रद्द करें
सम्पादन सहायता
(नए विंडो में खुलता है)