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'''स्वामी गोपाल दास''' (1822-1939) [[चूरू|चूरु]] जिले के भैंरुसर गाँव में चौधरी बींजाराम कसवां के घर पैदा हुये। आपने चूरु में अनेक समाज सुधार के काम किये। यहाँ गायों के संरक्षण के कई काम किये। पर्यावरण सुधारने के लिये पेड़ लगाये और चारागाह विकास के काम जनभागीदारी से कराये। सन 1917-18 क भयंकर अकाल के समय इनकी समाज सेवा का दूसरा उदाहरण मिलना कठिन है। यहाँ के प्रसिद्ध कवि पंडित अमोलक चन्द ने ये पंक्तियां लिखी हैं: :"चूरु शहर में शोर भयो, जद जोर करयो पलेग महामारी। :लाश पड़ी घर के अन्दर ढक छोड़ चले बंद किवाड़ी।। :आवत है गोपाल अश्व चढ देखत जहाँ बीमार पड्यो है। :देत दवा वो दया करके नाथ, अनाथ को नाथ खड्यो है।।" [[श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन]] [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान]] [[श्रेणी:हिन्दू आध्यात्मिक नेता]]
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