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{{ज्ञानसन्दूक पर्वतमाला सरल |rangename = हिमालय |photo = LhotseMountain.jos.500pix.jpg |photosize = 250px |photocaption = चुकुंग री की ओर ऊपर जाते समय, ल्होत्से पर्वत चोटी का दृश्य. |other_names = |countries_or_regions = {{IND}}<br />{{BHU}}<br />{{CHN}}<br />{{NPL}}<br />{{PAK}} |highest_point_name = [[एवरेस्ट पर्वत]], [[नेपाल]]-[[चीन]] सीमा |highest_point_height = 8,848.86मीटर (29,028 फीट) <ref>{{citation | url=https://www.bbc.com/hindi/international-38738800 | title=height of Himalayas | access-date=12 अप्रैल 2020 | archive-url=https://web.archive.org/web/20170126211041/http://www.bbc.com/hindi/international-38738800 | archive-date=26 जनवरी 2017 | url-status=live }}</ref> |latd = 27 | latm = 59 | lats = 17 | latNS = N |longd = 86 | longm = 55 | longs = 31 | longEW = E }} [[चित्र:Annapurna Mountain Range Seen from the way to Annapurna Base Camp.jpg|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|हिमालय पर्वत की अवस्थिति का एक सरलीकृत निरूपण]] '''हिमालय''' [[भारत]] में स्थित एक प्राचीन पर्वत श्रृंखला है | हिमालय को पर्वतराज भी कहते हैं जिसका अर्थ है पर्वतों का राजा |। [[कालिदास]] तो हिमालय को [[पृथ्वी]] का मानदंड मानते हैं। हिमालय की पर्वतश्रंखलाएँ [[शिवालिक]] कहलाती हैं। सदियों से हिमालय की कन्दराओं (गुफाओं) में ऋषि-मुनियों का वास रहा है और वे यहाँ समाधिस्थ होकर तपस्या करते हैं । हिमालय आध्यात्म चेतना का ध्रुव केंद्र है। उत्तराखंड को श्रेय जाता है इस "हिमालयानाम् नगाधिराजः पर्वतः" का हृदय कहाने का। ईश्वर अपने सारे ऐश्वर्य- खूबसूरती के साथ वहाँ विद्यमान है। 'हिमालय अनेक रत्नों का जन्मदाता है ( अनन्तरत्न प्रभवस्य यस्य), उसकी पर्वत-श्रंखलाओं में जीवन औषधियाँ उत्पन्न होती हैं ( भवन्ति यत्रौषधयो रजन्याय तैल पुरत सुरत प्रदीपः), वह पृथ्वी में रहकर भी स्वर्ग है।( भूमिर्दिवभि वारूढं)। '''हिमालय''' एक [[पर्वत]] तन्त्र है जो [[भारतीय उपमहाद्वीप]] को [[मध्य एशिया]] और [[तिब्बत]] से अलग करता है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से तीन समानांतर श्रेणियां- महान हिमालय, मध्य हिमालय और [[शिवालिक]] से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2400 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं।<ref>माजिद हुसैन, [http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA9#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false भारत का भूगोल] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140720102809/http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA9#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false |date=20 जुलाई 2014 }}, गूगल पुस्तक, (अभिगमन तिथि १६.०७.२०१४)</ref> इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात [[उत्तर भारत|उत्तरी भारत]] के मैदान की ओर है और केन्द्र [[तिब्बत]] के पठार की ओर है। इन तीन मुख्य श्रेणियों के आलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा [[कैलाश]] श्रेणियाँ शामिल है। हिमालय पर्वत 7 देशों की सीमाओं में फैला हैं। ये देश हैं- [[पाकिस्तान]],[[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] , [[भारत]], [[नेपाल]], [[भूटान]], [[चीन]] और [[म्यान्मार|म्यांमार]]। [[चित्र:Himalaya annotated.jpg|thumb|330px|अन्तरिक्ष से लिया गया हिमालय का चित्र]] संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर [[एवरेस्ट पर्वत|माउंट एवरेस्ट]] हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय में 100 से ज्यादा पर्वत शिखर हैं जो 8848.86 मीटर से ऊँचे हैं। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमाल, [[अन्नपूर्णा]], शिवशंकर, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, [[गौरीशंकर]], कुंभू, धौलागिरी और [[कंचनजंघा]] है।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-article/top-10-indian-mountain-114120800005_1.html|title=भारत के 10 महत्वपूर्ण पहाड़, जानिए कौन से|last=जोशी 'शतायु'|first=अनिरुद्ध|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-06-09|archive-url=https://web.archive.org/web/20190801151328/http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-article/top-10-indian-mountain-114120800005_1.html|archive-date=1 अगस्त 2019|url-status=dead}}</ref> हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा [[हिमानी|हिमनद]] हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा [[सियाचिन हिमनद]] विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है। हिमालय की कुछ प्रमुख नदियों में शामिल हैं - [[सिन्धु नदी|सिंधु]], [[गंगा नदी|गंगा]], [[ब्रह्मपुत्र नदी|ब्रह्मपुत्र]] और [[यांग्त्सीक्यांग|यांगतेज]]। भू-निर्माण के सिद्धांतों के अनुसार यह भारत-आस्ट्रेलिया प्लेटों से एशियाई प्लेट को टकराने से बना है। हिमालय के निर्माण में प्रथम उत्थान 650 लाख वर्ष पूर्व हुआ था और मध्य हिमालय का उत्थान 450 लाख वर्ष पूर्व<ref>माजिद हुसैन, [http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA11#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false भारत का भूगोल] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140720130857/http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA11#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false |date=20 जुलाई 2014 }}, गूगल पुस्तक, (अभिगमन तिथि १६.०७.२०१४)</ref> हिमालय में कुछ महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी है। इनमें [[हरिद्वार]], [[बद्रीनाथ मन्दिर|बद्रीनाथ]], [[केदारनाथ कस्बा|केदारनाथ]], [[गोमुख]], [[देवप्रयाग|देव प्रयाग]], [[ऋषिकेश]], [[कैलाश]], [[मानसरोवर]] तथा [[अमरनाथ]],[[शाकम्भरी]] प्रमुख हैं। भारतीय ग्रंथ [[श्रीमद्भगवद्गीता|गीता]] में भी इसका उल्लेख मिलता है (गीता:10.25)।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/JM-TID-religious-importance-of-himalaya-5684905-PHO.html|title=हिमालय से जुड़ी 7 ऐसी बातें, जो इसे बनाती है बाकी सभी पर्वतों से खास|date=2017-09-03|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2020-06-09}}</ref> '''हिमालय का निर्माण''' जहाँ आज हिमालय है वहां कभी [[टेथीज सागर|टेथिस]] नाम का सागर लहराता था। यह एक लम्बा और उथला सागर था। यह दो विशाल भू - खन्डो से घिरा हुआ था। इसके उत्तर में अंगारालैन्ड और दक्षिण में गोन्ड्वानालैन्ड नाम के दो भू - खन्ड थे । लाखों वर्षों इन दोनों भू - खन्डो का अपरदन होता रहा और अपरदित पदार्थ (मिट्टी, कन्कड, बजरी, गाद आदि) टेथिस सागर में जमा होने लगे । ये दो विशाल भू - खन्ड एक - दुसरे की ओर खिसकते भी रहे। दो विरोधी दिशाओ में पड़ने वाले दबाव के कारण सागर में जमी मिट्टी आदि की परतो में मोड़ (वलय) पड़ने लगे। ये वलय द्वीपों की एक श्रृंखला के रूप में पानी की सतह् से ऊपर आ गए। यह क्रिया निरंतर चलती रही और कलान्तर में विशाल वलित पर्वत श्रेणियो के निर्माण हुआ जिन्हे आज हम हिमालय के नाम से जाना जाता हैं।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/कैसे-हुआ-हिमालय-का-उद्भव-1312186870-2|title=कैसे हुआ हिमालय का उद्भव?|date=2011-08-01|website=Jagranjosh.com|access-date=2020-06-09|archive-url=https://web.archive.org/web/20170517084540/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%B5-1312186870-2|archive-date=17 मई 2017|url-status=dead}}</ref> == लघु हिमालय == '''हिमालय पर्वत''' का वह भाग जो [[हिमाद्रि|महान हिमालय]] के दक्षिण सामानान्तर तक फैला हुआ है, लघु हिमालय कहलाता है। यह अंचल मध्य हिमालय या हिमाचल हिमालय के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन वास्तव में यह मध्य हिमालय ही है। लघु हिमालय 80 से 100 किलोमीटर चौड़ाई में फैला हुआ है। इसकी औसत ऊँचाई 1628 मीटर से लेकर 3000 मीटर है। इसकी अधिकतम ऊँचाई 4500 मीटर है।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/हिमालय-पर्वत-श्रंखला-का-विभाजन-या-वर्गीकरण-1463033715-2|title=हिमालय पर्वत श्रंखला का विभाजन या वर्गीकरण|date=2016-05-12|website=Jagranjosh.com|access-date=2020-06-09|archive-url=https://web.archive.org/web/20171119122906/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-1463033715-2|archive-date=19 नवंबर 2017|url-status=dead}}</ref> == नामकरण == [[File:Himalaya-formation.gif|thumb|right|250px| भारतीय प्लेट की गति और हिमालय की उत्पत्ति]] हिमालय [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के दो शब्दों - हिम तथा आलय से मिल कर बना है, जिसका शब्दार्थ बर्फ का घर होता है। यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद पृथ्वी पर सबसे बड़ा हिमआवरण वाला क्षेत्र है। हिमालय और विश्व की सबसे ऊंची चोटी [[माउंट एवरेस्ट]] को [[भीमबेटका शैलाश्रय|भी]] कई नामों से जाना जाता है। [[नेपाल]] में इसे सगरमाथा (आकाश या स्वर्ग का भाल), संस्कृत में देवगिरी और तिब्बती में चोमोलुंगमा (पर्वतों की रानी) कहते हैं। हिमालय पर्वत की एक चोटी का नाम 'बन्दरपुंछ' है। यह चोटी [[उत्तराखंड]] के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित है। इसकी ऊँचाई 13,731 फुट है। इसे [[सुमेर|सुमेरु]] भी कहते हैं।<ref name=":0" /> ==हिमालय की प्रकृति== उत्तरी भारत के मैदानी [[गंगा]] - [[ब्रह्मपुत्र]] के मैदान हिमालय से लाई गई नदियों के मैदान है। हिमालय की श्रेणियां मानसूनी हवा के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करके भारत के राज्यों में वर्षा करवाती है। प्रातः काल जब सूर्य उदय होता है तब सूर्य की किरणों से हिमालय की शोभा निखर आती है हिमालय पर्वत ऊंचे ऊंचे [[देवदार]], [[चीड़]] के पेड़ों से भरा है यहां पर कई प्रकार के जंगली जीव भी पाएं जाते है जैसे [[भालू]], [[हाथी]], [[चीता]], [[गेंडा]], [[बंदर]], [[हिरन]],आदि यह पशु यहां पर सुरक्षित अपना जीवन व्यापन करते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-article/himalaya-119020500044_1.html|title=himalaya {{!}} कुंभ के साधुजन हिमालय में ही क्यों करते हैं तप?|last=जोशी|first=अनिरुद्ध|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-06-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20190722030231/http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-article/himalaya-119020500044_1.html|archive-date=22 जुलाई 2019|url-status=dead}}</ref> == हिमालय की उत्पत्ति == हिमालय की उत्पत्ति की व्याख्या कोबर के भूसन्नति सिद्धांत और [[प्लेट विवर्तनिकी]] सिद्धांत द्वारा की जाती है। पहले भारतीय प्लेट और इस पर स्थित भारतीय भूखण्ड गोंडवानालैण्ड नामक विशाल महाद्वीप का हिस्सा था और अफ्रीका से सटा हुआ था जिसके विभाजन के बाद भारतीय प्लेट की गति के परिणामस्वरूप भारतीय प्रायद्वीपीय पठार का भूखण्ड उत्तर की ओर बढ़ा<ref>शेष गोपाल मिश्र, [http://books.google.co.in/books?id=-FwPtMjcP7EC&lpg=PA41&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&pg=PA41#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&f=false पृथ्वी की रोचक बातें] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140729015524/http://books.google.co.in/books?id=-FwPtMjcP7EC&lpg=PA41&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&pg=PA41#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&f=false |date=29 जुलाई 2014 }}, गूगल पुस्तक, (अभिगमन तिथि 21-07-2014)।</ref>. ऊपरी क्रीटैशियस काल में (840 लाख वर्ष पूर्व) भारतीय प्लेट ने तेजी से उत्तर की ओर गति प्रारंभ की और तकरीबन 6000 कि॰मी॰ की दूरी तय की।{{sfn|Dèzes|1999}} यूरेशियाई और भारतीय प्लेटों के बीच यह टकराव समुद्री प्लेट के निमज्जित हो जाने के बाद यह समुदी-समुद्री टकराव अब महाद्वीपीय-महाद्वीपीय टकराव में बदल गया और (650 लाख वर्ष पूर्व) [[हिमाद्रि|केन्द्रीय हिमालय]] की रचना हुई।{{sfn|Ding|Kapp|Wan|2005}} तब से लेकर अब तक तकरीबन 2500 किमी की भूपर्पटीय लघुकरण की घटना हो चुकी है।{{sfn|Achache|Courtillot|Xiu}}{{sfn|Patriat|Achache|1984}}{{sfn|Besse|Courtillot|Pozzi|Westphal|1984}}{{sfn|Besse|Courtillot|1988}} साथ ही भारतीय प्लेट का उत्तरी पूर्वी हिस्सा 45 अंश के आसपास घड़ी की सुइयों के विपरीत दिशा में घूम चुका है।{{sfn|Klootwijk|Conaghan|Powell|1985}} इस टकराव के कारण हिमालय की तीन श्रेणियों की रचना अलग-अलग काल में हुई जिसका क्रम उत्तर से दक्षिण की ओर है। अर्थात पहले महान हिमालय, फिर मध्य हिमालय और सबसे अंत में शिवालिक की रचना हुई।<ref>माजिद हुसैन, [http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA11&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&pg=SA2-PA11#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&f=false भातर का भूगोल] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140729024526/http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA11&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&pg=SA2-PA11#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF&f=false |date=29 जुलाई 2014 }}, गूगल पुस्तक, (अभिगमन तिथि 21-07-2014)।</ref> [[File:2_2_himal_tecto_units.png|thumb|right|250px|हिमालय की भूगर्भिक संरचना<ref>चार विवर्तनिक भागों में विभाजन {{Harvtxt|Blanford|Medlicott|1879}} और {{Harvtxt|Heim|Gansser|1939}} के अनुसार</ref>]] == भूआकृतिक विभाजन == हिमालय पर्वत तन्त्र को तीन मुख्य श्रेणियों के रूप में विभाजित किया जाता है जो पाकिस्तान में सिन्धु नदी के मोड़ से लेकर अरुणाचल के ब्रह्मपुत्र के मोड़ तक एक दूसरे के समानांतर पायी जाती हैं।<ref name="ReferenceA">आर सी तिवारी, भारत का भूगोल, प्रयाग पुस्तक भवन</ref> चौथी गौड़ श्रेणी असतत है और पूरी लम्बाई तक नहीं पायी जाती है। ये चार श्रेणियाँ हैं- <ref>{{Cite web |url=http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA13#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false |title=भारत का भूगोल |access-date=16 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140721002701/http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&pg=SA2-PA13#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%87&f=false |archive-date=21 जुलाई 2014 |url-status=live }}</ref> *(क) परा-हिमालय,<ref name=":1" /> *(ख) महान हिमालय *(ग) मध्य हिमालय *(घ) शिवालिक। <big>'''परा हिमालय'''</big> जिसे ट्रांस हिमालय या टेथीज हिमालय भी कहते हैं, यह हिमालय की सबसे प्राचीन श्रेणी है। यह कराकोरम श्रेणी, लद्दाख श्रेणी और कैलाश श्रेणी के रूप में हिमालय की मुख्य श्रेणियों और तिब्बत के बीच स्थित है। इसका निर्माण टेथीज सागर के अवसादों से हुआ है। इसकी औसत चौड़ाई लगभग 40 किमी है। यह श्रेणी इण्डस-सांपू-शटर-ज़ोन नामक भ्रंश द्वारा तिब्बत के पठार से अलग है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/ट्रांसतिब्बत-हिमालय-पर्वतीय-क्षेत्र-1460609336-2|title=ट्रांस/तिब्बत हिमालय पर्वतीय क्षेत्र|date=2016-04-14|website=Jagranjosh.com|access-date=2020-06-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20170831170212/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-1460609336-2|archive-date=31 अगस्त 2017|url-status=dead}}</ref> <big>'''महान हिमालय'''</big> जिसे हिमाद्रि भी कहा जाता है हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है। इसके क्रोड में [[आग्नेय शैल]]ें पायी जाती है जो ग्रेनाइट तथा गैब्रो नामक चट्टानों के रूप में हैं। पार्श्वों और शिखरों पर अवसादी शैलों का विस्तार है। कश्मीर की जांस्कर श्रेणी भी इसी का हिस्सा मानी जाती है। हिमालय की सर्वोच्च चोटियाँ मकालू, कंचनजंघा, एवरेस्ट, अन्नपूर्ण और नामचा बरवा इत्यादि इसी श्रेणी का हिस्सा हैं। यह श्रेणी मुख्य केन्द्रीय क्षेप द्वारा मध्य हिमालय से अलग है। हालांकि पूर्वी [[नेपाल]] में हिमालय की तीनों श्रेणियाँ एक दूसरे से सटी हुई हैं।<ref name=":0" /> <big>'''मध्य हिमालय'''</big> हिमालय के दक्षिण में स्थित है। महान हिमालय और मध्य हिमालय के बीच दो बड़ी और खुली घाटियाँ पायी जाती है - पश्चिम में [[कश्मीर|काश्मीर घाटी]] और पूर्व में [[काठमाण्डु|काठमाण्डू]] घाटी। जम्मू-कश्मीर में इसे [[पीर पंजाल पर्वतमाला|पीर पंजाल]], हिमाचल में [[धौलाधार]],उत्तराखंड में मस्सोरी या नागटिब्बा तथा नेपाल में [[मध्य हिमालय|महाभारत श्रेणी]] के रूप में जाना जाता है। <big>'''शिवालिक श्रेणी'''</big> को बाह्य हिमालय या उप हिमालय भी कहते हैं। यहाँ सबसे नयी और कम ऊँची चोटी है। [[पश्चिम बंगाल]] और [[भूटान]] के बीच यह विलुप्त है बाकी पूरे हिमालय के साथ समानांतर पायी जाती है। अरुणाचल में मिरी, [[मिश्मी]] और [[अभोर]] पहाड़ियां शिवालिक का ही रूप हैं। शिवालिक और मध्य हिमालय के बीच [[दून]] घाटियाँ पायी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/uttar-pradesh/muzaffarnagar-see-shivalik-and-doon-hills-from-house-20259964.html|title=साफ है मौसम, करिए शिवालिक, दून की पहाड़ियों के दर्शन|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2020-06-10}}</ref> == प्रादेशिक विभाजन == सर सिडनी बुराड ने हिमालय को चार क्षैतिज प्रदेशों में बाँटा है<ref name="ReferenceA"/>:- # '''[[कश्मीर हिमालय]]''' - [[सिन्धु नदी]] से [[सतलुज नदी]] के बीच का भाग # '''[[कुमाऊँ हिमालय]]''' - सतलुज से [[काली नदी, उत्तराखण्ड|काली नदी]] ([[सरयू]]) के बीच का भाग # '''[[नेपाल हिमालय]]''' - सरयू नदी से [[तीस्ता नदी]] के बीच का भाग # '''[[असम हिमालय|आसाम हिमालय]]''' - तीस्ता नदी से [[ब्रह्मपुत्र नदी]] के मोड़ तक का भाग {{wide image|Himalaya Panorama Alok Prasad.jpg | 2000px |<center>कुमाऊँ (गढ़वाल) हिमालय का एक पैनोरमिक दृश्य<center>}} == हिमालय का महत्व == हिमालय पर्वत विविध प्राकृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से महत्वपूर्ण है।<ref>माजिद हुसैन, [http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&ots=tk1GF74JBr&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5&pg=SA2-PA24#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5&f=false हिमालय का महत्व] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140714185112/http://books.google.co.in/books?id=WqtT-7pN1CUC&lpg=SA2-PA24&ots=tk1GF74JBr&dq=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5&pg=SA2-PA24#v=onepage&q=%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5&f=false |date=14 जुलाई 2014 }} भारत का भूगोल, (गूगल पुस्तक)</ref><ref name="भारत के पर्वत">हसन जावेद खान, [http://hindi.indiawaterportal.org/node/35622 भारत के पर्वत] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140714124857/http://hindi.indiawaterportal.org/node/35622 |date=14 जुलाई 2014 }} (इण्डिया वाटर पोर्टल)</ref> हिमालय पर्वत का महत्व न केवल इसके आसपास के देशों के लिये हैं बल्कि पूरे विश्व के लिये हैं क्योंकि यह ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद पृथ्वी पर सबसे बड़ा हिमाच्छादित क्षेत्र है जो विश्व [[जलवायु]] को भी प्रभावित करता है। इसके महत्व को निम्नवत वर्गीकृत किया जा सकता है: === प्राकृतिक महत्व === * उत्तरी भारत का मैदान या सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान हिमालय से लाये गये जलोढ़ निक्षेपों से निर्मित है। * हिमालय का सबसे बड़ा महत्व [[दक्षिण एशिया|दक्षिणी एशिया]] के क्षेत्रों के लिये हैं जहाँ की [[जलवायु]] के लिये यह एक महत्वपूर्ण नियंत्रक कारक के रूप में कार्य करता है। हिमालय की विशाल पर्वत शृंखलायें साइबेरियाई शीतल [[वायुराशि|वायुराशियों]] को रोक कर भारतीय उपमहाद्वीप को जाड़ों में आधिक ठण्ढा होने से बचाती हैं।<ref name="भारत के पर्वत"/> * यह पर्वत श्रेणियाँ [[मानसून|मानसूनी पवनों]] के मार्ग में अवरोध उत्पान करके इस क्षेत्र में [[वर्षा|पर्वतीय वर्षा]] कराती हैं जिस पर इस क्षेत्र का पर्यावरण और अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक निर्भर हैं। * हिमालय की उपस्थिति ही वह कारण है जिसकी वजह से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उन क्षेत्रों में भी उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पायी जाती है जो [[कर्क रेखा]] के उत्तर में स्थित हैं, अन्यथा इन क्षेत्रों में अक्षांशीय स्थिति के अनुसार समशीतोष्ण कटिबंधीय जलवायु मिलनी चाहिए थी। * हिमालय की वर्ष-पर्यंत हिमाच्छादित श्रेणियाँ और इनके [[हिमानी|हिमनद]] सदावाहिनी नदियों के स्रोत हैं जिनसे भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश को महत्वपूर्ण जल संसाधन उपलब्ध होते हैं। === आर्थिक महत्व === [[चित्र:Khajjiar.jpg|thumb|right|250px|हिमाचल प्रदेश में खज्जियार [[मर्ग]]]] *[[वन संसाधन|वन संसाधनों]] के रूप में शीतोष्ण कटिबंधीय मुलायम लकड़ी वाली वनस्पति और शंक्वाकार वनों के स्रोत के रूप में जिसका काफ़ी आर्थिक महत्व है। * अन्य विविध वनोपजें जैसे औषधीय पौधे, इत्यादि की प्राप्ति। * चरागाह के रूप में हिमालय का महत्व है क्योंकि इसकी घाटियों में नर्म घास वाले क्षेत्र पाए जाते हैं। इन्हें पश्चिमी हिमालय में ''[[मर्ग]]'' और कुमायूँ क्षेत्र में ''[[बुग्याल]]'' तथा ''[[पयाल]]'' के नाम से जाना जाता है।[[File:Leh in summer.JPG|thumb|left|200px|[[लेह]] का एक दृश्य]] * विविध खनिजों, जैसे [[चूना पत्थर]], डोलोमाईट, स्लेट, चट्टानी नमक इत्यादि के स्रोत के रूप में। * फलों की खेती के लिये। * सिंचाई के स्रोत के रूप में सदावाहिनी नदियों का जलस्रोत। * पर्यटन उद्योग और बहुत से पर्यटक केन्द्रों के लिये। * जलविद्युत उत्पादन के लिये। === पर्यावरणीय महत्व === [[चित्र:Valley of flowers uttaranchal full view.JPG|thumb|right|250px|[[फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान|फूलों की घाटी]] [[युनेस्को|यूनेस्को]] की [[विश्व धरोहर|विश्व धरोहर सूची]] में शामिल [[जैव विविधता|जैवविविधता]] स्थल है]] * [[जैव विविधता|जैवविविधता]] भण्डार के रूप में हिमालय पर्वत काफ़ी महत्वपूर्ण है। कुछ जैव विविधता के प्रमुख क्षेत्र के रूप में ''[[फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान|फूलों की घाटी]]'' तथा अरुणाचल का ''पूर्वी हिमालय'' क्षेत्र हैं।<ref>[http://www.ihbt.res.in/hin/index.html हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140625031747/http://ihbt.res.in/hin/index.html |date=25 जून 2014 }} (CSIR)</ref> * जलवायु पर वैश्विक प्रभाव। * हिमालय के हिमनदों को आज [[जलवायु परिवर्तन]] के प्रमुख संकेतक के रूप में भी देखा जा रहा है। === सामरिक महत्व === * हिमालय क्षेत्र का [[दक्षिण एशिया]] के लिये हमेशा से सामरिक महत्व रहा है क्योंकि यह एक प्राकृतिक अवरोध है जो इसके उत्तर से सैन्य आक्रमणों को अल्पसंभाव्य बनाता है। * वर्तमान समय में [[कश्मीर]] तथा [[सियाचिन]] विवाद इसी क्षेत्र में अवस्थित हैं। चीन द्वारा हिमालय के शिखरों से बनाई गयी प्राकृतिक सीमा रेखा, [[मैकमहोन रेखा|मैकमोहन रेखा]] को मान्यता देने से इनकार करना भी इसी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण [[भूराजनीति|भूराजनैतिक]] विवाद है। * हिमालय की उच्च भूमि ही कारण है कि [[नेपाल]] आपनी [[अन्तस्थ राज्य|बफर स्टेट]] की स्थित को सुरक्षित बनाये हुए हैं। == पर्यावरण == हिमालय में उगने वाले पेड़ो और वहां रहने वाले जीव-जंतुओं की विविधता जलवायु, वर्षा, ऊंचाई और मिट्टी के अनुसार बदलती हैं। जहाँ नीचे जलवायु उष्णकटिबंधीय होती है, वहीं चोटी के पास स्थायी रूप से बर्फ जमी रहती है। कर्क रेखा के निकट स्थित होने के कारण स्थायी बर्फ का स्तर आमतौर पर लगभग 5500 मीटर (18,000 फीट) का होता है, जो की दुनिया में सबसे अधिक है। तुलना के लिए, न्यू गिनी के भूमध्य पहाड़ों में बर्फ का स्तर कुछ 900 मीटर (2950 फीट) नीचे है। वार्षिक वर्षा की मात्रा (पहाड़ों की दक्षिणी तरफ़) पश्चिम से पूर्व बढती चली जाती है। == छवि दीर्घा == <center><gallery perrow="5"> Image:Mount_Everest_North_Face.jpg|तिब्बत के रोंगबुक से माउण्त एवरेस्ट का उत्तरी भाग File:Northern Areas 38b commons.jpg|[[नागा पर्वत]], [[भारत]] Image:Nanga Parbat 035.jpg|[[नंगा पर्वत]], [[भारत]] Image:Sunrise, Manaslu.jpg|[[:en:Manaslu|मनास्लु]] Image:Sunset_om_Kangchengyao_in_North_Sikkim.jpg|उत्तरी सिक्किम से सूर्यास्त का दृष्य </gallery></center> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == *[https://www.youtube.com/watch?v=yGrMpKmJDxQ&list=PLYy7BBFM-wOkVyRvxLYocNO3ZD9QWpUxg&index=10&t=0s हिमालय पर्वतीय प्रदेश परिचय व वर्गीकरण]-Indian Geography Himalaya Classification *[https://web.archive.org/web/20131223034305/http://comp1.geol.unibas.ch/~zanskar/CHAPITRE2/page23.html The making of the Himalaya and major tectonic subdivisions] * [https://web.archive.org/web/20100616162641/http://oak.ucc.nau.edu/wittke/Tibet/Himalaya.html Geology of the Himalayan mountains] * [https://web.archive.org/web/20091209055351/http://www.pbs.org/wgbh/nova/everest/earth/birth.html Birth of the Himalaya] * [https://web.archive.org/web/20100612023606/http://snobear.colorado.edu/Markw/Mountains/03/week11.html Some notes on the formation of the Himalaya] * [http://www.metacafe.co.il/watch/383729/the_annapurna_trek_in_5_minutes/ Pictures from a trek in Annapurna (film by Ori Liber)]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} * [https://web.archive.org/web/20090415145307/http://www.ranjan.net.np/geologyofnepal.htm Geology of Nepal Himalaya] * [https://web.archive.org/web/20090723050437/http://www.pulitzercenter.org/showproject.cfm?id=106 South Asia's Troubled Waters] Journalistic project at the Pulitzer Center for Crisis Reporting {{GeoSouthAsia}} [[श्रेणी:पर्वत]] [[श्रेणी:हिमालय]]
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