<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0</id>
	<title>अन्नप्राशन संस्कार - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-28T06:28:52Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=7280&amp;oldid=prev</id>
		<title>imported&gt;Sgkgffjkk १० अप्रैल २०१९ को १६:०३ बजे</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%A8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0&amp;diff=7280&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2019-04-10T16:03:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन}}&lt;br /&gt;
{{हिन्दू धर्म सूचना मंजूषा}}&lt;br /&gt;
जब शिशु के दाँत उगने लगे, मानना चाहिए कि प्रकृति ने उसे ठोस आहार, अन्नाहार करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्थूल (अन्नमयकोष) के विकास के लिए तो अन्न के विज्ञान सम्मत उपयोग का ज्ञान जरूरी है यह सभी जानते हैं। सूक्ष्म विज्ञान के अनुसार अन्न के संस्कार का प्रभाव व्यक्ति के मानस पर स्वभाव पर भी पड़ता है। कहावत है जैसा खाय अन्न-वैसा बने मन। इसलिए आहार स्वास्थ्यप्रद होने के साथ पवित्र, संस्कार युक्त हो इसके लिए भी अभिभावकों, परिजनों को जागरूक करना जरूरी होता है। अन्न को व्यसन के रूप में नहीं औषधि और प्रसाद के रूप में लिया जाय, इस संकल्प के साथ अन्नप्राशन संस्कार सम्पन्न कराया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रयोजन ==&lt;br /&gt;
बालक को जब पेय पदार्थ, दूध आदि के अतिरिक्त अन्न देना प्रारम्भ किया जाता है, तो वह शुभारम्भ यज्ञीय वातावरण युक्त धर्मानुष्ठान के रूप में होता है। इसी प्रक्रिया को अन्नप्राशन संस्कार कहा जाता है। बालक को दाँत निकल आने पर उसे पेय के अतिरिक्त खाद्य दिये जाने की पात्रता का संकेत है। तदनुसार अन्नप्राशन ६ माह की आयु के आस-पास कराया जाता है। अन्न का शरीर से गहरा सम्बन्ध है। मनुष्यों और प्राणियों का अधिकांश समय साधन-आहार व्यवस्था में जाता है। उसका उचित महत्त्व समझकर उसे सुसंस्कार युक्त बनाकर लेने का प्रयास करना उचित है। अन्नप्राशन संस्कार में भी यही होता है। अच्छे प्रारम्भ का अर्थ है- आधी सफलता।&lt;br /&gt;
अस्तु, बालक के अन्नाहार के क्रम को श्रेष्ठतम संस्कारयुक्त वातावरण में करना अभीष्ट है। यर्जुवेद ४० वें अध्याया का पहला मन्त्र &amp;#039;तेन त्यक्तेन भुंजीथा&amp;#039; (त्याग के साथ भोग करने) का र्निदेश करता है। हमारी परम्परा यही है कि भोजन थाली में आते ही चींटी, कुत्ता आदि का भाग उसमें से निकालकर पंचबलि करते हैं। भोजन ईश्वर को समर्पण कर या अग्नि में आहुति देकर तब खाते हैं। होली का पर्व तो इसी प्रयोजन के लिए है। नई फसल में से एक दाना भी मुख डालने से पूर्व, पहले उसकी आहुतियाँ होलिका यज्ञ में देते हैं। तब उसे खाने का अधिकार मिलता है। किसान फसल मींज-माँड़कर जब अन्नराशि तैयार कर लेता है, तो पहले उसमें से एक टोकरी भर कर धर्म कार्य के लिए अन्न निकालता है, तब घर ले जाता है। त्याग के संस्कार के साथ अन्न को प्रयोग करने की दृष्टि से ही धर्मघट-अन्नघट रखने की परिपाटी प्रचलित है। भोजन के पूर्व बलिवैश्व देव प्रक्रिया भी अन्न को यज्ञीय संस्कार देने के लिए की जाती है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== विशेष व्यवस्था ==&lt;br /&gt;
यज्ञ को देवपूजन आदि की व्यवस्था के साथ अन्नप्राशन के लिए लिखी व्यवस्था विशेष रूप से बनाकर रखनी चाहिए। अन्नप्राशन के लिए प्रयुक्त होने वाली कटोरी तथा चम्मच। चाटने के लिए चाँदी का उपकरण हो सके, तो अच्छा है। अलग पात्र में बनी हुई चावल या सूजी (रवा) की खीर, शहद, घी, तुलसीदल तथा गंगाजल- ये पाँच वस्तुएँ तैयार रखनी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== विधि ==&lt;br /&gt;
विशेष कर्मकाण्ड निर्धारित क्रम में मंगलाचरण से लेकर रक्षाविधान तक के क्रम पूरे करके विशेष कर्मकाण्ड कराया जाता है। उसमें - &lt;br /&gt;
(१) पात्रपूजन,&amp;lt;br /&amp;gt; (२) अन्न-संस्कार,&amp;lt;br /&amp;gt; (३) विशेष आहुति तथा&amp;lt;br /&amp;gt; (४) क्षीर प्राशन सम्मिलित हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== देखें ==&lt;br /&gt;
{{षोडश संस्कार}}&lt;br /&gt;
{{हिन्दू धर्म}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म|संस्कार, अन्नप्राशन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कार|संस्कार, अन्नप्राशन]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:चित्र जोड़ें]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Sgkgffjkk</name></author>
	</entry>
</feed>