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	<title>अष्टधातु - अवतरण इतिहास</title>
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	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: AstroSachindra (Talk) के संपादनों को हटाकर InternetArchiveBot के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<updated>2021-06-12T10:33:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/AstroSachindra&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/AstroSachindra&quot;&gt;AstroSachindra&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:AstroSachindra&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:AstroSachindra (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:InternetArchiveBot&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:InternetArchiveBot (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;InternetArchiveBot&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अष्टधातु&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;, (शाब्दिक अर्थ = आठ धातुएँ) एक [[मिश्रातु]] है जो [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]] और [[जैन धर्म|जैन]] [[प्रतिमा]]ओं के निर्माण में प्रयुक्त होती है। जिन आठ [[धातु]]ओं से मिलकर यह बनती है, वे ये हैं- सोना, चाँदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा, तथा पारा (रस) की गणना की जाती है। एक प्राचीन ग्रन्थ में इनका निर्देश इस प्रकार किया गया है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;स्वर्ण रूप्यं ताम्रं च रंग यशदमेव च।&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;शीसं लौहं रसश्चेति धातवोऽष्टौ प्रकीर्तिता:। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[सुश्रुत संहिता|सुश्रुतसंहिता]] में केवल प्रथम सात धातुओं का ही निर्देश देखकर आपातत: प्रतीत होता है कि सुश्रुत पारा (पारद, रस) को धातु मानने के पक्ष में नहीं हैं, पर यह कल्पना ठीक नहीं। उन्होंने अन्यत्र रस को भी धातु माना है (&amp;#039;&amp;#039;ततो रस इति प्रोक्त: स च धातुरपि स्मृत:&amp;#039;&amp;#039;)। अष्टधातु का उपयोग प्रतिमा के निर्माण के लिए भी किया जाता था। तब रस के स्थान पर पीतल का ग्रहण समझना चाहिए; [[भविष्य पुराण|भविष्यपुराण]] के एक वचन के आधार पर हेमाद्रि का ऐसा निर्णय है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== ज्योतिष और अष्टधातु का महत्व ===&lt;br /&gt;
[[ज्योतिष]] शास्त्र के अनुसार हर धातु में निहित ऊर्जा होती है, धातु अगर सही समय में और ग्रहों की सही स्थिति को देखकर धारण किये जाएं तो इनका सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है अन्यथा धातु विपरीत प्रभाव भी देता हैं | अष्टधातु हिन्दुओं के लिए एकअत्यंत शुभ धातु है। प्राचीन काल से ही अष्टधातु का उपयोग प्रतिमा निर्माण में भी होता रहा है। अष्टधातु का उपयोग प्रतिमा के निर्माण के लिए भी किया जाता था | इसके अलावा अष्टधातु का प्रयोग रत्न को धारण करने के लिए भी होता था यदि आपकी कुंडली में [[राहु]] अशुभ स्थिति में हो तो विशेष कष्टदायक होता है उसमे भी राहु की महा दशा और अंतर्दशा में अत्यन्त ही कष्टकारक दुष्प्रभाव दे सकता है ऐसी स्थिति में दाहिने हाथ में अष्टधातु का कड़ा धारण करने से अवश्य ही लाभ प्राप्त होता है साथ ही किसी योग्य ज्योतिष के परामर्श से राहु का जप और दान भी कर सकते है यह उपाय अवश्य ही राहत प्रदान करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अष्टधातु पहनने के फायदे&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; ====&lt;br /&gt;
* अष्टधातु का मुनष्य के स्वास्थ्य से गहरा सम्बंध है यह हृदय को भी बल देता है एवं मनुष्य की अनेक प्रकार की बीमारियों को निवारण करता है |&lt;br /&gt;
* अष्टधातु की अंगूठी या कड़ा धारण करने पर यह मानसिक तनाव को दूर कर मन में शान्ति लाता है। यहीं नहीं यह वात पित्त कफ का इस प्रकार सामंजस्य करता हैं कि बीमारियां कम एवं स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव होता है |&lt;br /&gt;
* अष्टधातु मस्तिष्क पर भी गहरा प्रभाव डालता है | अष्टधातु पहनने से व्यक्ति में तीव्र एवं सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाती है। धीरे-धीरे सम्पन्नता में वृद्धि होती है |&lt;br /&gt;
* व्यापार के विकास और भाग्य जगाने के लिए शुभ मुहूर्त में अष्टधातु की अंगूठी या लॉकेट  में लाजवर्त धारण करें। यह एक बहुत प्रभावशाली उपाय है, सोया भाग्य जगा देता है |&lt;br /&gt;
* यदि आप अष्टधातु से बनी कोई भी चीज पहनते हैं तो आप सभी नौ ग्रहो से होने वाली पीड़ा को शांत कर सकते हैं और हाँ ये जरूरी नहीं की आप अष्टधातु से बनी से कोई चीज पहने ही आप अपने घर या ऑफिस में रखते हो तो भी इन नौ ग्रहो से होने वाली पीड़ा को शांत करता है |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अष्टधातु के दुष्परिणाम&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आजकल अष्टधातु से बनी कोई भी चीज जैसे कड़ा, अंगूठी कम ही लोग पहनते हैं क्योकि अष्टधातु लेड,पारा, ये भी धातु मिलाकर बनाई जाती है जो की कैंसर रोग का एक मुख्य कारण होता है इसलिए अष्ठधातु का प्रयोग आज के समय में  कम हो गया हैं |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन  पंचधातु में लेड और पारा (मर्करी) के अलावा कोई और धातु जैसे लोहा, निकल और रोडियम आदि मिलाकर अष्टधातु बनाई जाती हैं जो की गलत है वो उतना असर नही करता है |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
साल २०१७ में [[नालंदा जिला|नालंदा]] जिले में शौचालय निर्माण के दौरान जमीन की खुदाई में अष्टधातु की प्रतिमा निकल आई. ये प्रत्तिमा विष्णु की है जिसकी लंबाई लगभग पांच फीट से ज्यादा है। इसकी कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में करीब दो करोङ रूपये आंकी गई है। खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा निकलने के बाद उसे देखने के लिए आस पास के सैकड़ों ग्रामीण इकठ्ठा हुए और पूजा पाठ शुरू कर दिया। वहीँ सुचना मिलते ही पुलिस प्रशासन ने पहुंच कर प्रतिमा को अपने कब्जे में ले लिया |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पंचधातु  की तुलना में अष्टधातु  ज्यादा टिकाऊ नहीं होती है इसलिए भी  लोग कम पहनते हैं | हाँ, आजकल साउथ इंडिया में कई मंदिरों में अष्टधातु  से बनी मूर्तियां हैं जिनकी लोग पूजा करते हैं वो मूर्तियाँ काफी प्रभाबशाली माना जाता हैं |&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[पंचलोह]]&lt;br /&gt;
*[https://web.archive.org/web/20170816190924/https://www.gemsratna.com/blog जेम्सरत्ना]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:संस्कृति|अष्टधातु]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धातु]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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