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	<title>अस्पृश्यता - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;संजीव कुमार: 2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301 (Talk) के संपादनों को हटाकर 2409:4052:2E94:B3C2:0:0:60C8:D06 के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301&quot;&gt;2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301&lt;/a&gt; (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य वार्ता:2401:4900:30D8:76B4:0:5F:C9E8:5301 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;Talk&lt;/a&gt;) के संपादनों को हटाकर &lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:2409:4052:2E94:B3C2:0:0:60C8:D06&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;सदस्य:2409:4052:2E94:B3C2:0:0:60C8:D06 (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;2409:4052:2E94:B3C2:0:0:60C8:D06&lt;/a&gt; के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोत कम|date=अगस्त 2020}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;अस्पृश्यता&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; का शाब्दिक अर्थ है - &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;न छूना&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;। इसे सामान्य भाषा में &amp;#039;छूआ-छूत&amp;#039; की समस्या भी कहते हैं। अस्पृश्यता का अर्थ है किसी वय्क्ति या समूह के सभी लोगों  के शरीर को सीधे छूने से बचना या रोकना। ये मान्यता है कि अस्पृश्य या अछूत लोगों से छूने, यहाँ तक कि उनकी परछाई भी पड़ने से उच्च जाति के लोग &amp;#039;अशुद्ध&amp;#039; हो जाते है और अपनी शुद्धता वापस पाने के लिये उन्हें पवित्र गंगा-जल में स्नान करना पड़ता है। [[भारत]] में अस्पृश्यता की प्रथा को अनुच्छेद १७ के अंतर्गत एक दंडनीय [[अपराध]] घोषित कर दिया गया है। अनुच्छेद १७ निम्नलिखित है-&lt;br /&gt;
:&amp;#039;&amp;#039; &amp;#039;अस्पृश्यता&amp;#039; का अन्त किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाता है। &amp;#039;अस्पृश्यता&amp;#039; से उपजी किसी निर्योग्यता को लागू करना अपराध होगा जो विधि के अनुसार दण्डनीय होगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[भारत की संस्कृति|भारतीय संस्कृति]] का मूलमंत्र &amp;#039;मानव-जाति से प्यार&amp;#039; ऊँच-नीच की भावना रूपी हवा के झोंके से यत्र-तत्र बिखर गया। ऊँच-नीच का भाव यह रोग है, जो समाज में धीरे धीरे पनपता है और सुसभ्य एवं सुसंस्कृत समाज की नींव को हिला देता है। परिणामस्वरूप मानव-समाज के समूल नष्ट होने की आशंका रहती है। अतः अस्पृश्यता मानव-समाज के लिए एक भीषण कलंक है। अस्पृश्यता की उत्पत्ति और उसकी ऐतिहासिकता पर अब भी बहस होती है। [[भीमराव आम्बेडकर]] का मानना था कि अस्पृश्यता कम से कम 400 ई. से है&amp;lt;ref&amp;gt;{{cite book |title=Dr. Babasaheb Ambedkar, Writings and Speeches, Volume 7 |url=https://books.google.com/?id=vYhDAAAAYAAJ|last1=Ambedkar|first1=Bhimrao Ramji|last2=Moon|first2=Vasant|year=1990}}&amp;lt;/ref&amp;gt; आज संसार के प्रत्येक क्षेत्र में चाहे वह राजनीतिक हो अथवा आर्थिक, धार्मिक हो या सामाजिक, सर्वत्र अस्पृश्यता के दर्शन किए जा सकते हैं। [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]], [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]], जापान आदि यद्यपि वैज्ञानिक दृष्तिकोण से विकसित और संपन्न देश हैं किंतु अस्पृश्यता के रोग में वे भी ग्रसित हैं।{{Citation needed}} अमेरिका जैसे महान राष्ट्र में काले एवं गोरें लोगों का भेदभाव आज भी बना हुआ है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Untouchability in India.png|अंगूठाकार|अस्पृश्यता]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कारण==&lt;br /&gt;
{{unreferenced section|date=अगस्त 2020}}&lt;br /&gt;
समाजशास्त्रियों के अनुसार &amp;#039;अस्पृश्यता की जननी ऊँच-नीच की भावना है&amp;#039;। अस्पृश्यता के तीन कारण है:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===प्रजातीय भावना===&lt;br /&gt;
अस्पृश्यता का सर्वप्रथम कारण प्रजातीय भावना का विकास है। कुछ प्रजातियाँ अपने को दूसरे प्रजातियों से श्रेष्ठ मानती हैं। अमेरिकी गोरे, नीग्रो जाति के लोग को हेय मानते हैं, इसके अतिरिक्त विजेता प्रजातियाँ पराजित जातियों को हीन मानती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत में ब्राह्मणों द्वारा धोबी चौधरी कुम्हार द्वारा छुआछूत माना जाता है जो ब्राह्मणों की दुष्टता को दर्शाता है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===धार्मिक भावना===&lt;br /&gt;
धर्म में पवित्रता एवं शुध्दि का महत्वपूर्ण स्थान है, अतः निम्न व्यवसाय वालों को हीन दृष्टि से देखा जाता है। भारतीय समाज में इन्हीं कारणों से सफाई का काम करने वालों तथा कर्मचारों आदि को अस्पृश्य समझा जाता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===सामाजिक कारण=== &lt;br /&gt;
प्रजातीय एवं [[धर्म|धार्मिक]] कारणों के अतिरिक्त अस्पृश्यता के सामाजिक कारण भी हैं। [[समाज]] में प्रचलित रूढियों और् कुप्रथाओं के कारण भी समाज में वर्गभेद उत्पन्न होते हैं। यह वर्गभेद अस्पृश्यता के विकास में सहायक सिध्द होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के परिवर्तन के साथ मनुष्यों के विचारों में भी परिवर्तन हुआ। जैसे-जैसे [[विज्ञान]] की प्रगति होती गई, समाज आर्थिक रूप से विकसित होता गया। समाज में सर्वत्र पैसे का बोलबाला हो गया। आज मानव की सामाजिक स्थिति पैसे से आँकी जाती है। आज वही श्रेष्ठ है, जो धनी है।&lt;br /&gt;
अतः सामाजिक स्थिति जन्मजात न होकर अर्जित हो गई। सामाजिक स्थिति में परिवर्तन के साथ साथ अस्पृश्यता का भयानक वृक्ष डगमगाने लगा है।&lt;br /&gt;
[[चित्र:Gandhi urges the sleeping traveler to continue the journey toward the milestone that says untouchability 0; bazaar art, c.1940&amp;#039;s.jpg|अंगूठाकार|अस्पृश्यता के खिलाफ आवाज]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==निवारण के उपाय==&lt;br /&gt;
===शिक्षा=== &lt;br /&gt;
[[शिक्षा]] का उद्देश्य है-समाज में प्रचलित रूढियों, धर्मांधता, संकीर्णता की भावना को दूर करना, जिससे अस्पृश्यता स्वयं ही दूर होगी। जब मानव के दृष्टिकोण में परिवर्तन होकर उसमें विश्वबंधुत्व की भावना का विकास होगा तो उच्च एवं निम्न वर्गों के मध्य का अंतर स्वयं ही समाप्त हो जाएगा।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===जाति-प्रथा का उन्मूलन===&lt;br /&gt;
हिंदू समाज में विद्यमान जाति-उपजाति प्रथा को समाप्त करके एक [[भारत|भारतीय]] जाती का विकास करने पर अस्पृश्यता के इस कलंक से मुक्ति प्राप्त की जा सकति है।&lt;br /&gt;
===राजकीय पदों पर नियुक्ति===&lt;br /&gt;
सरकार इस विषय में विशेष जागरूक है। विभिन्न राजकीय पदों पर अनुसूचित जाति के पढे-लिखे युवकों की नियुक्ति का प्रतिशत निश्चित कर दिया गया है। इससे उसमें आत्मगौरव तथा नवीन चेतना का संचार हुआ है।&lt;br /&gt;
===आर्थिक विकास===&lt;br /&gt;
हरिजनों को कृषि तथा गृह-उद्योग के लिए जमीन, हल, बैल आदि तथा अन्य आर्थिक मदद राज्य की ओर से मिलनी चाहिए। हरिजनों की आर्थिक दशा में सुधार के लिए सूदखोरी की रोकथाम के लिए कानून बनाने चाहिए, जिससे हरिजनों की रक्षा हो सके। समाज में अस्पृश्यता के दोषों को प्रचार द्वारा दूर करना चाहिये जिससे अस्पृश्यों को मानवीय अधिकार प्राप्त करने में सहायता मिल सके।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==सन्दर्भ==&lt;br /&gt;
{{टिप्पणीसूची}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==बाहरी कड़ियाँ==&lt;br /&gt;
*[https://web.archive.org/web/20190509154843/https://www.hindikiduniya.com/social-issues/untouchability/ अस्पृश्यता या छूआछूत]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:समाज]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:समाजशास्त्र]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:समाजवाद]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:धार्मिक व्यवहार और अनुभव]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:जाति व्यवस्था]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:भारतीय समाज]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:उत्पीड़न]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;संजीव कुमार</name></author>
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