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	<title>आधुनिक हिंदी पद्य का इतिहास - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;Pramod1010: /* प्रयोगवाद-नयी कविता युग की कविता (१९४३-१९६०) */</title>
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		<updated>2021-05-19T17:49:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;span class=&quot;autocomment&quot;&gt;प्रयोगवाद-नयी कविता युग की कविता (१९४३-१९६०)&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;आधुनिक काल 1850 से&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
[[हिंदी साहित्य]] के इस युग को भारत में राष्ट्रीयता के बीज अंकुरित होने लगे थे। [[स्वतंत्रता संग्राम]] लड़ा और जीता गया। छापेखाने का आविष्कार हुआ, आवागमन के साधन आम आदमी के जीवन का हिस्सा बने, जन संचार के विभिन्न साधनों का विकास हुआ, रेडिओ, टी वी व समाचार पत्र हर घर का हिस्सा बने और शिक्षा हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार। इन सब परिस्थितियों का प्रभाव हिंदी साहित्य पर अनिवार्यतः पड़ा। आधुनिक काल का हिंदी [[काव्य|पद्य]] साहित्य पिछली सदी में विकास के अनेक पड़ावों से गुज़रा। जिसमें अनेक विचार धाराओं का बहुत तेज़ी से विकास हुआ। जहाँ काव्य में इसे [[छायावाद|छायावादी युग]], प्रगतिवादी युग, [[प्रयोगवादी युग]], नई कविता युग और [[साठोत्तरी हिन्दी साहित्य|साठोत्तरी कविता]] इन नामों से जाना गया, छायावाद से पहले के पद्य को [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेंदु हरिश्चंद्र युग]] और [[महावीर प्रसाद द्विवेदी|महावीर प्रसाद द्विवेदी युग]] के दो और युगों में बाँटा गया। इसके विशेष कारण भी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== भारतेंदु हरिश्चंद्र युग की कविता (1850-1900) ==&lt;br /&gt;
ईस्वी सन १८५० से १९०० तक की कविताओं पर [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेंदु हरिश्चंद्र]] का गहरा प्रभाव पड़ा है। वे ही आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह हैं। उन्होंने भाषा को एक चलता हुआ रूप देने की कोशिश की। आपके काव्य-साहित्य में प्राचीन एवं नवीन का मेल लक्षित होता है। भक्तिकालीन, रीतिकालीन परंपराएं आपके काव्य में देखी जा सकती हैं तो आधुनिक नूतन विचार और भाव भी आपकी कविताओं में पाए जाते हैं। आपने भक्ति-प्रधान, श्रृंगार-प्रधान, देश-प्रेम-प्रधान तथा सामाजिक-समस्या-प्रधान कविताएं की हैं। आपने ब्रजभाषा से खड़ीबोली की ओर हिंदी-कविता को ले जाने का प्रयास किया। आपके युग में अन्य कई महानुभाव ऐसे हैं जिन्होंने विविध प्रकार हिंदी साहित्य को समृध्द किया। इस काल के प्रमुख कवि हैं-&lt;br /&gt;
* भार्तेन्दु हरिश्चन्द्र&lt;br /&gt;
* प्रताप नारायण मिश्र&lt;br /&gt;
* बद्रीनारायण चौधरी &amp;#039;प्रेमघन&amp;#039;&lt;br /&gt;
* राधाचरण गोस्वामी&lt;br /&gt;
* अम्बिका दत्त व्यास&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== पं महावीर प्रसाद द्विवेदी युग की कविता (1900-1920) ==&lt;br /&gt;
सन 1900 के बाद दो दशकों पर [[महावीर प्रसाद द्विवेदी|पं महावीर प्रसाद द्विवेदी]] का पूरा प्रभाव पड़ा। इस युग को इसीलिए द्विवेदी-युग कहते हैं। [[&amp;#039;सरस्वती&amp;#039;]] पत्रिका के संपादक के रूप में आप उस समय पूरे हिंदी साहित्य पर छाए रहे। आपकी प्रेरणा से ब्रज-भाषा हिंदी कविता से हटती गई और खड़ी बोली ने उसका स्थान ले लिया। भाषा को स्थिर, परिष्कृत एवं व्याकरण-सम्मत बनाने में आपने बहुत परिश्रम किया। कविता की दृष्टि से वह इतिवृत्तात्मक युग था। आदर्शवाद का बोलबाला रहा। भारत का उज्ज्वल अतीत, देश-भक्ति, सामाजिक सुधार, स्वभाषा-प्रेम वगैरह कविता के मुख्य विषय थे। नीतिवादी विचारधारा के कारण शृंगार का वर्णन मर्यादित हो गया। कथा-काव्य का विकास इस युग की विशेषता है। भाषा खुरदरी और सरल रही। मधुरता एवं सरलता के गुण अभी खड़ी-बोली में आ नहीं पाए थे। सर्वश्री [[मैथिलीशरण गुप्त]], [[अयोध्यासिंह उपाध्याय &amp;#039;हरिऔध&amp;#039;]], [[श्रीधर पाठक]], [[रामनरेश त्रिपाठी]] आदि इस युग के यशस्वी कवि हैं। [[जगन्नाथदास रत्नाकर|जगन्नाथदास &amp;#039;रत्नाकर&amp;#039;]] ने इसी युग में ब्रज भाषा में सरस रचनाएं प्रस्तुत कीं। &lt;br /&gt;
इस युग के प्रमुख कवि-&lt;br /&gt;
* अयोध्या सिंह उपाध्याय &amp;#039;हरिऔध&amp;#039;&lt;br /&gt;
* रामचरित उपध्याय&lt;br /&gt;
* जगन्नाथ दास रत्नाकर&lt;br /&gt;
* गया प्रसाद शुक्ल &amp;#039;सनेही&amp;#039;&lt;br /&gt;
* श्रीधर पाठक&lt;br /&gt;
* राम नरेश त्रिपाठी&lt;br /&gt;
* मैथिलीशरण गुप्त&lt;br /&gt;
* लोचन प्रसाद पाण्डेय&lt;br /&gt;
* सियारामशरण गुप्त&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== छायावादी युग की कविता (1920-1936 ) ==&lt;br /&gt;
सन 1920 के आसपास हिंदी में कल्पनापूर्ण स्वछंद और भावुक कविताओं की एक बाढ़ आई। यह यूरोप के रोमांटिसिज़्म से प्रभावित थी। भाव, शैली, छंद, अलंकार सब दृष्टियों से इसमें नयापन था। भारत की राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद लोकप्रिय हुई इस कविता को आलोचकों ने [[छायावाद|छायावादी युग]] का नाम दिया। छायावादी कवियों की उस समय भारी कटु आलोचना हुई परंतु आज यह निर्विवाद तथ्य है कि आधुनिक हिंदी कविता की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि इसी समय के कवियों द्वारा हुई। [[जयशंकर प्रसाद]], [[सूर्यकान्त त्रिपाठी &amp;#039;निराला&amp;#039;|निराला]], [[सुमित्रानन्दन पन्त|सुमित्रानंदन पंत]], [[महादेवी वर्मा]] इस युग के प्रधान कवि हैं। &lt;br /&gt;
  &lt;br /&gt;
== उत्तर-छायावाद युग-(१९३६-१९४३) ==&lt;br /&gt;
यह काल भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल का काल रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय, कई विचारधाराओं और आन्दोलनों का प्रभाव इस काल की कविता पर पड़ा। द्वितीय विश्वयुद्ध के भयावह परिणामों के प्रभाव से भी इस काल की कविता बहुत हद तक प्रभावित है। निष्कर्षत:राष्ट्रवादी, गांधीवादी, विप्लववादी, प्रगतिवादी, यथार्थवादी, हालावादी आदि विविध प्रकार की कवितायें इस काल में लिखी गई। इस काल के प्रमुख कवि हैं--&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* माखनलाल चतुर्वेदी&lt;br /&gt;
* [[बालकृष्ण शर्मा नवीन|बालकृष्ण शर्मा &amp;#039;नवीन&amp;#039;]]&lt;br /&gt;
* सुभद्रा कुमारी चौहान&lt;br /&gt;
* रामधारी सिंह &amp;#039;दिनकर&amp;#039;&lt;br /&gt;
* हरिवंश राय &amp;#039;बच्चन&amp;#039;&lt;br /&gt;
* भगवतीचरण वर्मा&lt;br /&gt;
* नरेन्द्र शर्मा&lt;br /&gt;
* रामेश्वर शुक्ल &amp;#039;अंचल&amp;#039;&lt;br /&gt;
* शिवमंगल सिंह &amp;#039;सुमन&amp;#039;&lt;br /&gt;
* नागार्जुन&lt;br /&gt;
* केदारनाथ अग्रवाल&lt;br /&gt;
* त्रिलोचन&lt;br /&gt;
* रांगेयराघव&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रगतिवादी युग की कविता (१९३६) ==&lt;br /&gt;
छायावादी काव्य बुद्धिजीवियों के मध्य ही रहा। जन-जन की वाणी यह नहीं बन सका। सामाजिक एवं राजनैतिक आंदोलनों का सीधा प्रभाव इस युग की कविता पर सामान्यतः नहीं पड़ा। संसार में समाजवादी विचारधारा तेज़ी से फैल रही थी। सर्वहारा वर्ग के शोषण के विरुध्द जनमत तैयार होने लगा। इसकी प्रतिच्छाया हिंदी कविता पर भी पड़ी और हिंदी साहित्य के [[प्रगतिवादी युग]] का जन्म हुआ। १९३० क़े बाद की हिंदी कविता ऐसी प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित है। १९३६ में &amp;quot;प्रगतिशील लेखक संघ&amp;quot; के गठन के साथ हिन्दी साहित्य में मार्क्सवादी विचारधारा से प्रेरित प्रगतिवादी आन्दोलन की शुरुआत हुई .इसका सबसे अधिक दूरगामी प्रभाव हिन्दी आलोचना पर पड़ा।मार्क्सवादी आलोचकों ने हिन्दी साहित्य के समूचे इतिहास को वर्ग-संघर्ष के दॄष्टिकोण से पुनर्मूल्यांकन करने का प्रयास आरंभ किया। प्रगतिवादी कवियों में नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल और त्रिलोचन के साथ नई कविता के कवि मुक्तिबोध और शमशेर को भी रक्खा जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== प्रयोगवाद-नयी कविता युग की कविता (१९४३-१९६०) ==&lt;br /&gt;
दूसरे विश्वयुध्द के पश्चात संसार भर में घोर निराशा तथा अवसाद की लहर फैल गई। साहित्य पर भी इसका प्रभाव पड़ा। &amp;#039;अज्ञेय&amp;#039; के संपादन में १९४३ में &amp;#039;तार सप्तक&amp;#039; का प्रकाशन हुआ। तब से हिंदी कविता में [[प्रयोगवादी युग]] का जन्म हुआ ऐसी मान्यता है। इसी का विकसित रूप [[नयी कविता]] कहलाता है। दुर्बोधता, निराशा, कुंठा, वैयक्तिकता, छंदहीनता के आक्षेप इस कविता पर भी किए गए हैं। वास्तव में नई कविता नई रुचि का प्रतिबिंब है। &lt;br /&gt;
इस धारा के मुख्य कवि हैं-&lt;br /&gt;
* [[अज्ञेय]],&lt;br /&gt;
* [[गिरिजा कुमार माथुर|गिरिजाकुमार माथुर]],&lt;br /&gt;
* [[प्रभाकर माचवे]],&lt;br /&gt;
* [[भारतभूषण अग्रवाल]],&lt;br /&gt;
* [[बिहारी लाल हरित]],&lt;br /&gt;
* [[मुक्तिबोध]],&lt;br /&gt;
* [[शमशेर बहादुर सिंह]],&lt;br /&gt;
* [[धर्मवीर भारती]], &lt;br /&gt;
* [[नरेश मेहता]],&lt;br /&gt;
* [[रघुवीर सहाय]],&lt;br /&gt;
* [[जगदीश गुप्त]],&lt;br /&gt;
* [[सर्वेश्वर दयाल सक्सेना]],&lt;br /&gt;
* [[कुँवर नारायण|कुंवर नारायण]],&lt;br /&gt;
* [[केदारनाथ सिंह|केदार नाथ सिंह]]।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार आधुनिक हिंदी खड़ी बोली कविता ने भी अल्प समय में उपलब्धि के उच्च शिखर सर किए हैं। क्या प्रबंध काव्य, क्या मुक्तक काव्य, दोनों में हिंदी कविता ने सुंदर रचनाएं प्राप्त की हैं। गीति-काव्य के क्षेत्र में भी कई सुंदर रचनाएं हिंदी को मिली हैं। आकार और प्रकार का वैविध्य बरबस हमारा ध्यान आकर्षित करता है। संगीत-रूपक, गीत-नाटय वगैरह क्षेत्रों में भी प्रशंसनीय कार्य हुआ है। कविता के बाह्य एवं अंतरंग रूपों में युगानुरूप जो नये-नये प्रयोग नित्य-प्रति होते रहते हैं, वे हिंदी कविता की जीवनी-शक्ति एवं स्फूर्ति के परिचायक हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[आधुनिक हिंदी गद्य का इतिहास]]&lt;br /&gt;
* [[आदिकाल]]&lt;br /&gt;
* [[भक्ति काल]]&lt;br /&gt;
* [[रीति काल]]&lt;br /&gt;
* [[हिंदी साहित्य]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कडियाँ ==&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20081108052922/http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6_%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 कविता कोश - हिन्दी काव्य का अकूत खज़ाना]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20080917012126/http://www.srijangatha.com/Permanent%20matter/kavita.htm सृजनगाथा- हिन्दी कविता और कवि]&lt;br /&gt;
* [https://web.archive.org/web/20190510024004/http://preetkegeet.blogspot.com/ &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;प्रीत के गीत : गंगा धर शर्मा &amp;quot;हिंदुस्तान&amp;quot;&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दी]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:साहित्य]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Pramod1010</name></author>
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