<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="hi">
	<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8</id>
	<title>आयुर्विज्ञान - अवतरण इतिहास</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?action=history&amp;feed=atom&amp;title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8&amp;action=history"/>
	<updated>2026-08-25T22:45:45Z</updated>
	<subtitle>विकि पर उपलब्ध इस पृष्ठ का अवतरण इतिहास</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.43.6</generator>
	<entry>
		<id>https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8&amp;diff=4507&amp;oldid=prev</id>
		<title>imported&gt;Innocentbunny ३ मार्च २०२१ को ११:२३ बजे</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://hi.bharatpedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8&amp;diff=4507&amp;oldid=prev"/>
		<updated>2021-03-03T11:23:09Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;[[चित्र:ICU1a.jpg|right|thumb|300px|आधुनिक गहन चिकित्सा कक्ष (ICU)]]&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;आयुर्विज्ञान&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;, [[विज्ञान]] अर्थात (आयु +र् + विज्ञान ) आयु का विज्ञान है। यह वह विज्ञान व कला है जिसका संबंध मानव शरीर को निरोग रखने, [[रोग]] हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने तथा आयु (निरोगी जीवन) बढ़ाने से है। प्राचीन सभ्यताओं मनुष्य ने होने वाले रोगों के निदान की कोशिश करती रहे हैं। इससे कई [[चिकित्सा]] (आयुर्विज्ञान) पद्धतियाँ विकसित हुई। इसी प्रकार भारत में भी आयुर्विज्ञान पर विकास हुआ जिसमें आयुर्वेद पद्धति सबसे ज्यादा जानी जाती है अन्य पद्धतियाँ जैसे कि सिद्ध भी भारत में विकसित हुई। प्रारम्भिक समय में आयुर्विज्ञान का अध्ययन जीव विज्ञान की एक शाखा के समान ही किया गया था, बाद में &amp;#039;शरीर रचना&amp;#039; तथा &amp;#039;शरीर क्रिया विज्ञान&amp;#039; आदि को इसका आधार बनाया गया।लेकिन पाश्चात्य में [[औद्योगीकरण]] के समय जैसे अन्य विज्ञानों का आविष्कार व उद्धरण हुआ उसी प्रकार आधुनिक आयुर्विज्ञान एलोपैथी का भी विकास हुआ जो कि तथ्य आधारित चिकित्सा पद्धति के रूप में उभरी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इतिहास ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आयुर्विज्ञान का कई हजार वर्षों से इंसानों द्वारा विकास व उन्नयन किया जाता रहा है । पुरा काल से चली आ रही चिकित्सा पद्धतियों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के रूप में जाना जाता है वहीं &lt;br /&gt;
पाश्चात्य में &amp;#039;पुनर्जागरण&amp;#039; के बाद जिस चिकित्सा पद्धति जिसका सिद्धांत तथ्य आधारित निदान है उसको आधुनिक चिकित्सा पद्धति कहा जाता है।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://en.m.wikipedia.org/wiki/World_Health_Organization |title=पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ विस्सं |access-date=1 अगस्त 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200725055026/https://en.m.wikipedia.org/wiki/World_Health_Organization |archive-date=25 जुलाई 2020 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्राचीन भारत आयुर्विज्ञान के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है , महर्षि चरक को आयुर्वेद एवं भारत में चिकित्सा का जनक माना जाता है वहीं महर्षि सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है । सन् 600 ई०पू० में महर्षि सुश्रुत ने विश्व की पहली प्लास्टिक शल्य क्रिया करी । &amp;lt;ref&amp;gt;[ https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9476614/ {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200417165321/https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9476614/ |date=17 अप्रैल 2020 }}   एन०आई०एच  - महर्षि सुश्रुत ]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाश्चात्य में हिपोक्रेट को आयुर्विज्ञान का जनक माना जाता है और हिपोक्रेटिक शपथ हर आधुनिक चिकित्सा पद्धिति के चिकित्सक द्वारा ली जाती है।&amp;lt;ref&amp;gt; [https://web.archive.org/web/20091029181928/http://encarta.msn.com/encyclopedia_761576397/Hippocrates.html, माइक्रोसोफ्ट इनका र्टा - हिप्पोक्रेट ]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसी प्रकार अन्य सभ्यताओ में भी आयुर्विज्ञान का विकास हुआ और अनेक पद्धितियाँ जुड़ती गई जैसे &amp;#039;एक्युपेन्चर&amp;#039; इसका विकास चीन में माना जाता है जोकि एक पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है । आधुनिक चिकित्सा पद्धति एक महत्वपूर्ण पड़ाव जब आया जब रोबर्ट कोक द्वारा-व्याधियों की ज़र्म थ्योरी ( कीटाणु सिद्धांत ) - दिया गया ।&amp;lt;ref&amp;gt;{{Cite web |url=https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK7294/ |title=जर्म थ्योरी एन०आई० एच |access-date=1 अगस्त 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170521194425/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK7294/ |archive-date=21 मई 2017 |url-status=live }}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रारंभ में आयुर्विज्ञान का अध्ययन [[जीव विज्ञान|जीवविज्ञान]] की एक शाखा की भाँति किया गया और [[शरीर-रचना-विज्ञान]] (अनैटोमी) तथा [[शरीरक्रिया विज्ञान|शरीर-क्रिया-विज्ञान]] (फ़िज़िऑलॉजी) को इसका आधार बनाया गया। शरीर में होनेवाली क्रियाओं के ज्ञान से पता लगा कि उनका रूप बहुत कुछ रासायनिक है और ये घटनाएँ रासानिक क्रियाओं के फल हैं। ज्यों-ज्यों खोजें हुईं त्यों-त्यों शरीर की घटनाओं का रासायनिक रूप सामने आता गया। इस प्रकार रसायन विज्ञान का इतना महत्व बढ़ा कि वह आयुर्विज्ञान की एक पृथक् शाखा बन गया, जिसका नाम [[जीवरसायन]] (बायोकेमिस्ट्री) रखा गया। इसके द्वारा न केवल शारीरिक घटनाओं का रूप स्पष्ट हुआ, वरन् रोगों की उत्पत्ति तथा उनके प्रतिरोध की विधियाँ भी निकल आईं। साथ ही भौतिक विज्ञान ने भी शारीरिक घटनाओं को भली भाँति समझने में बहुत सहायता दी। यह ज्ञात हुआ कि अनेक घटनाएँ भौतिक नियमों के अनुसार ही होती हैं। अब जीवरसायन की भाँति [[जीवभौतिकी]] (बायोफ़िज़िक्स) भी आयुर्विज्ञान का एक अंग बन गई है और उससे भी रोगों की उत्पत्ति को समझने में तथा उनका प्रतिरोध करने में बहुत सहायता मिली है। विज्ञान की अन्य शाखाओं से भी रोगरोधन तथा चिकित्सा में बहुत सहायता मिली है। और इन सबके सहयोग से मनुष्य के कल्याण में बहुत प्रगति हुई है, जिसके फलस्वरूप जीवनकाल बढ़ गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शरीर, शारीरिक घटनाओं और रोग संबंधी आंतरिक क्रियाओं का सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त करने में अनेक प्रकार की प्रायोगिक विधियों और यंत्रों से, जो समय-समय पर बनते रहे हैं, बहुत सहायता मिली है। किंतु इस गहन अध्ययन का फल यह हुआ कि आयुर्विज्ञान अनेक शाखाओं में विभक्त हो गया और प्रत्येक शाखा में इतनी खोज हुई है, नवीन उपकरण बने हैं तथा प्रायोगिक विधियाँ ज्ञात की गई हैं कि कोई भी विद्वान् या विद्यार्थी उन सब से पूर्णतया परिचित नहीं हो सकता। दिन--प्रति--दिन चिकित्सक को प्रयोगशालाओं तथा यंत्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है और यह निर्भरता उत्तरोत्तर बढ़ रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आयुर्विज्ञान की शिक्षा ==&lt;br /&gt;
प्रत्येक शिक्षा का ध्येय मनुष्य का मानसिक विकास होता है, जिससे उसमें तर्क करके समझने और तदनुसार अपने भावों को प्रकट करने तथा कार्यान्वित करने की शक्ति उत्पन्न हो जाय। आयुर्विज्ञान की शिक्षा का भी यही उद्देश्य है। इसके लिए सब आयुर्विज्ञान के विद्यार्थियों में विद्यार्थी को उपस्नातक के रूप में पाँच वर्ष बिताने पड़ते हैं। मेडिकल कॉलेजों (आयुर्विज्ञान विद्यालयों) में विद्यार्थियों को आधार विज्ञानों का अध्ययन करके उच्च माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने पर भरती किया जाता है। तत्पश्चात् प्रथम दो वर्ष विद्यार्थी शरीररचना तथा शरीरक्रिया नामक आधारविज्ञानों का अध्ययन करता है जिससे उसको शरीर की स्वाभाविक दशा का ज्ञान हो जाता है। इसके पश्चात् तीन वर्ष रोगों के कारण इन स्वाभाविक दशाओं की विकृतियाँ का ज्ञान पाने तथा उनकी चिकित्सा की रीति सीखने में व्यतीत होते हैं। रोगों को रोकने के उपाय तथा भेषजवैधिक का भी, जो इस विज्ञान की नीति संबंधी शाखा है, वह इसी काल में अध्ययन करता है। इन पाँच वर्षों के अध्ययन के पश्चात् वह स्नातक बनता है। इसके पश्चात् वह एक वर्ष तक अपनी रुचि के अनुसार किसी विभाग में काम करता है और उस विषय का क्रियात्मक ज्ञान प्राप्त करता है। तत्पश्चात् वह स्नातकोत्तर शिक्षण में डिप्लोमा या डिग्री लेने के लिए किसी विभाग में भरती हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सब आयुर्विज्ञान महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) किसी न किसी विश्वविद्यालय से संबंधित होते हैं जो उनकी परीक्षाओं तथा शिक्षणक्रम का संचालन करता है और जिसका उद्देश्य विज्ञान के विद्यार्थियों में तर्क की शक्ति उत्पन्न करना और विज्ञान के नए रहस्यों का उद्घाटन करना होता है। आयुर्विज्ञान विद्यालयों (मेडिकल कॉलेजों) के प्रत्येक शिक्षक तथा विद्यार्थी का भी उद्देश्य यही होना चाहिए कि उसे रोगनिवारक नई वस्तुओं की खोज करके इस आर्तिनाशक कला की उन्नति करने की चेष्टा करनी चाहिए। इतना ही नहीं, शिक्षकों का जीवनलक्ष्य यह भी होना चाहिए कि वह ऐसे अन्वेषक उत्पन्न करें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चिकित्साप्रणाली ==&lt;br /&gt;
चिकित्सापद्धति का केंद्रस्तंभ वह सामान्य चिकित्सक (जेनरल प्रैक्टिशनर) है जो जनता या परिवारों के घनिष्ठ संपर्क में रहता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी सहायता करता है। वह अपने रोगियों का मित्र तथा परामर्शदाता होता है और समय पर उन्हें दार्शनिक सांत्वना देने का प्रयत्न करता है। वह रोग संबंधी साधारण समस्याओं से परिचित होता है तथा दूरवर्ती स्थानों, गाँवों इत्यादि, में जाकर रोगियों की सेवा करता है। यहाँ उसको सहायता के वे सब उपकरण नहीं प्राप्त होते जो उसने शिक्षण काल में देखे थे और जिनका प्रयोग उसने सीखा था। बड़े नगरों में ये बहुत कुछ उपलब्ध हो जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर उसको विशेषज्ञ से सहायता लेनी पड़ती है या रोगी को अस्पताल में भेजना होता है। आजकल इस विज्ञान की किसी एक शाखा का विशेष अध्ययन करके कुछ चिकित्सक विशेषज्ञ हो जाते हैं। इस प्रकार हृदयरोग, मानसिक रोग, अस्थिरोग, बालरोग आदि में विशेषज्ञों द्वारा विशिष्ट चिकित्सा उपलब्ध है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आजकल चिकित्सा का व्यय बहुत बढ़ गया है। रोग के निदान के लिए आवश्यक परीक्षाएँ, मूल्यवान् औषधियाँ, चिकित्सा की विधियाँ और उपकरण इसके मुख्य कारण हैं। आधुनिक आयुर्विज्ञान के कारण जनता का जीवनकाल भी बढ़ गया है, परंतु औषधियों पर बहुत व्यय होता है। खेद है कि वर्तमान आर्थिक दशाओं के कारण उचित उपचार साधारण मनुष्य की सामथ्र्य के बाहर हो गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== आयुर्विज्ञान और समाज ==&lt;br /&gt;
चिकित्साविज्ञान की शक्ति अब बहुत बढ़ गई है और निरंतर बढ़ती जा रही है। आजकल [[संततिनिरोध|गर्भनिरोध]] किया जा सकता है। [[गर्भ]] का अंत भी हो सकता है। पीड़ा का शमन, बहुत काल तक मूर्छावस्था में रखना, अनेक संक्रामक रोगों की सफल चिकित्सा, सहज प्रवृत्तियों का दमन और वृद्धि, औषधियों द्वारा भावों का परिवर्तन, शल्यक्रिया द्वारा व्यक्तित्व पर प्रभाव आदि सब संभव हो गए हैं। मनुष्य का जीवनकाल अधिक हो गया है। दिन--प्रति--दिन नवीन औषधियाँ निकल रही हैं; रोगों का कारण ज्ञात हो रहा है; उनकी चिकित्सा ज्ञात की जा रही है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सरकार के स्वास्थ्य संबंधी तीन प्रमुख कार्य हैं। पहले तो जनता में रोगों को फैलने न देना; दूसरे, जनता की स्वास्थ्यवृद्धि, जिसके लिए उपयुक्त भोजन, शुद्ध जल, रहने के लिए उपयुक्त स्थान तथा नगर की स्वच्छता आवश्यक है; तीसरे, रोगग्रस्त होने पर चिकित्सा संबंधी उपयुक्त और उत्तम सहायता उपलब्ध करना। इन तीनों उद्देश्यों की पूर्ति में चिकित्सक का बहुत बड़ा स्थान और उत्तरदायित्व है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== मूलभूत चिकित्साविज्ञान ==&lt;br /&gt;
* [[शारीरिकी|शरीररचना विज्ञान]] (एनाटॉमी)&lt;br /&gt;
* [[शरीरक्रिया विज्ञान]] (फिजियोलॉजी)&lt;br /&gt;
* [[भ्रूणविज्ञान]]&lt;br /&gt;
* [[ऊतक विज्ञान]] (Histology)&lt;br /&gt;
* [[प्रतिरक्षा विज्ञान]] (immunology / इम्मुनोलोजी)&lt;br /&gt;
* [[जीवरसायन|जैवरसायन]]&lt;br /&gt;
* [[जैवभौतिकी]] (biophysics)&lt;br /&gt;
* [[चिकित्सा जीवविज्ञान]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== चिकित्सा के प्रकार ==&lt;br /&gt;
* सौन्दर्य चिकित्सा&lt;br /&gt;
* खेलचिकित्सा&lt;br /&gt;
* बीमाचिकित्सा&lt;br /&gt;
* नाभिकीय आयुर्विज्ञान&lt;br /&gt;
* अंररिक्ष आयुर्विज्ञान&lt;br /&gt;
* सैन्यचिकित्सा&lt;br /&gt;
* पारिवारिक आयुर्विज्ञान&lt;br /&gt;
* परम्परागत तथा अपरम्परागत चिकित्साशास्त्र&lt;br /&gt;
* न्यायिक चिकित्साविज्ञान&lt;br /&gt;
* उष्णकटिबधीय चिकित्साविज्ञान, &amp;#039;&amp;#039;आदि&amp;#039;&amp;#039;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==कौशल एवं विशेषज्ञता==&lt;br /&gt;
{| class=&amp;quot;wikitable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
===कार्य के अनुसार===&lt;br /&gt;
* पैथोलोजी&lt;br /&gt;
* मेडिकल बायोलोजी&lt;br /&gt;
* शल्यचिकित्सा&lt;br /&gt;
* स्वास्थ्य शिक्षा&lt;br /&gt;
* आकस्मिक चिकित्सा&lt;br /&gt;
* औद्योगिक चिकित्सा&lt;br /&gt;
* पोषण चिकित्सा&lt;br /&gt;
* सौन्दर्य चिकित्सा&lt;br /&gt;
* फार्मेसी&lt;br /&gt;
* रेडियोलोजी&lt;br /&gt;
* सामान्य चिकित्सा&lt;br /&gt;
* अनेस्थेशिया,  आदि&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===रोगी के अनुसार===&lt;br /&gt;
* पुरुषरोगविज्ञान (Andrology)&lt;br /&gt;
* स्त्रीरोगविज्ञान &lt;br /&gt;
* प्रसूति (Obstetrics)&lt;br /&gt;
* शिशुरोगविज्ञान&lt;br /&gt;
* जरारोगविज्ञान (Geriatrics) , आदि।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===शरीर के अंग के अनुसार===&lt;br /&gt;
*वाहिकाप्रकरण (Angiology)&lt;br /&gt;
*हृदयरोगविज्ञान (cardiology)&lt;br /&gt;
*त्वचारोगविज्यान (Dermatology)&lt;br /&gt;
* अंत:स्राव-विज्ञान (endocrinology)&lt;br /&gt;
* रुधिरविज्ञान (Hematology)&lt;br /&gt;
* दन्तचिकित्साविज्ञान&lt;br /&gt;
*मूत्रचिकित्साविज्ञान, आदि।&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
===प्रभाव के अनुसार===&lt;br /&gt;
* व्यसन (ऐडिक्शन)&lt;br /&gt;
* मद्यव्यसनविज्ञान ( alcohology)&lt;br /&gt;
* प्रत्यूर्जताविज्ञान (Allergology)&lt;br /&gt;
* अर्बुदविज्ञान ( oncology)&lt;br /&gt;
* मधुमेहविज्ञान (diabetology)&lt;br /&gt;
* संक्रामक रोग&lt;br /&gt;
* मनोविकारचिकित्सा (psychiatry)&lt;br /&gt;
* विषविज्ञान (Toxicology)&lt;br /&gt;
* अभिघातविज्ञान (Traumatology)&lt;br /&gt;
* रतिजरोगचिकित्सा (Venereology), आदि।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===शल्यक्रिया के अनुसार===&lt;br /&gt;
* हृदय शल्यचिकिसा&lt;br /&gt;
* पाचनतंत्र शल्यचिकित्सा&lt;br /&gt;
* चेहरे और गर्दन की शल्यक्रिया (सिर एवं गर्दन)&lt;br /&gt;
* सामान्य शल्यक्रिया&lt;br /&gt;
* शुशु शल्यक्रिया&lt;br /&gt;
* अस्थि शल्यक्रिया&lt;br /&gt;
* दन्तचिकित्सा&lt;br /&gt;
* सौन्दर्य शल्यक्रिया (प्लास्तिक सर्जरी)&lt;br /&gt;
* मूत्रचिकित्सा&lt;br /&gt;
* वाहिका शल्यक्रिया (वैस्क्युलर सर्जरी)&lt;br /&gt;
* तंत्रिका शल्यक्रिया (न्यूरोसर्जरी)&lt;br /&gt;
* शल्यकर्म की तकनीकें, आदि।&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
* [[चिकित्सा]] (Therapy)&lt;br /&gt;
* [[स्वास्थ्य विज्ञान]]&lt;br /&gt;
* [[आयुर्वेद]]&lt;br /&gt;
* [[प्राकृतिक चिकित्सा]]&lt;br /&gt;
* [[योग]]&lt;br /&gt;
* [[मनोरोग विज्ञान]] (Psychiatry) &lt;br /&gt;
* [[तंत्रिका विज्ञान|तंत्रिकाविज्ञान]]&lt;br /&gt;
* [[औषधनिर्माण|भेषजी]] (फार्मेसी)&lt;br /&gt;
* [[वैकल्पिक चिकित्सा]]&lt;br /&gt;
* [[दन्तचिकित्सा]] (डेंट्रिस्ट्री)&lt;br /&gt;
* [[पशु चिकित्सा विज्ञान]] (वेटनरी मेडिसिन)&lt;br /&gt;
* [[विकृतिविज्ञान]] (पैथोलॉजी)&lt;br /&gt;
* [[अर्बुदविज्ञान|अर्बुद विज्ञान]] (Oncology)&lt;br /&gt;
* [[मूर्छाशास्त्र|निश्चेतना विज्ञान]] (Anaesthesiology)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== बाहरी कड़ियाँ ==&lt;br /&gt;
[https://web.archive.org/web/20110520222239/http://books.google.co.in/books?id=bqYH_MOsdfMC&amp;amp;printsec=frontcover#v=onepage&amp;amp;q=&amp;amp;f=false आधुनिक चिकित्साशास्त्र] (गूगल पुस्तक; लेखक - धर्मदत्त वैद्य)&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[https://web.archive.org/web/20110520222201/http://books.google.co.in/books?id=ufHPd4XcmRwC&amp;amp;printsec=frontcover#v=onepage&amp;amp;q=&amp;amp;f=false रसतरंगिणी का हिन्दी अनुवाद] (गूगल पुस्तक; अनुवादक - काशीनाथ शास्त्री)&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{चिकित्सा}}&lt;br /&gt;
{{आयुर्विज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:चिकित्साशास्त्र]]&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:आयुर्विज्ञान]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;Innocentbunny</name></author>
	</entry>
</feed>