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	<title>कामाख्या - अवतरण इतिहास</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;टैग {{&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%9A%E0%A4%BE:%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%A8&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;साँचा:स्रोतहीन (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;स्रोतहीन&lt;/a&gt;}} लेख में जोड़ा जा रहा (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=अगस्त 2021}}&lt;br /&gt;
{{Infobox deity&lt;br /&gt;
||name=कामाख्या माता|member_of=शक्ति पीठ|caption=जगजन्नी जगदम्बा स्वरूपा भगवती कामाख्या|other_names=[[सती]], [[काली]], कामाख्या, कामेश्वरी, नीलांचलवासिनी, योनिमुद्राधारीनी, तंत्रेश्वरी, जगतमाता, भगवती|festivals=कामाख्या पूजा, काली पूजा, नवरात्री, सती पूजा|affiliation=[[सती]], महादेवी, भगवती, शक्ति पीठ, जगजन्नी|consort=[[शिव|कामेश्वर]] (शिव का रूप)|weapons=त्रिशूल, चक्र, गदा, शंख, डमरू, खड्ग, तलवार, धनुष-बाण, ढाल और कमल|mantra=ॐ कामाख्ये वरदे देवी नीलपर्वत वासिनी त्वं देवि जगतमाता योनि मुद्रे नमोस्तुते ।|abodes=[[नीलांचल]], कामाख्या धाम, मणिद्वीप, कैलाश||image=[[चित्र:Kamakshya Shakespeare Sarani Arnab Dutta 2011.jpg|right|thumb|300px|कामाख्या देवी]]}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;कामाख्या&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039;, [[देवी]] या [[शक्ति]] के प्रधान नामों में से एक नाम है। यह [[तन्त्र|तांत्रिक]] देवी हैं और [[काली]] तथा &amp;#039;[[त्रिपुर सुन्दरी]]&amp;#039; के साथ इनका निकट समबन्ध है। इनकी कथा का उल्लेख [[कालिका पुराण]] और [[योगिनी तंत्र]] में विस्तृत रूप से हुआ है। समूचे [[असम]] और पूर्वोत्तर [[बंगाल]] में शक्ति अथवा कामाक्षी की [[पूजा]] का बड़ा महात्म्य है। असम के [[कामरूप]] में कामाख्या का प्रसिद्ध [[मन्दिर]] अवस्थित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== परिचय ==&lt;br /&gt;
[[पुराण|पुराणों]] के अनुसार पिता [[दक्ष प्रजापति|दक्ष]] के [[यज्ञ]] में पति [[शिव]] का अपमान होने के कारण सती हवनकुंड में ही कूद पड़ी थीं जिसके शरीर को शिव कंधे पर दीर्घकाल तक डाले फिरते रहे। सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे वहाँ-वहाँ [[शक्ति पीठ|शक्तिपीठ]] बन गए जो शाक्त तथा शैव भक्तों के परम तीर्थ हुए। इन्हीं पीठों में से एक—कामरूप असम में स्थापित हुआ, जो आज की [[गुवाहाटी|गौहाटी]] के सामने &amp;#039;कामाख्या&amp;#039; नामक पहाड़ी पर स्थित है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पश्चिमी भारत में जो कामारूप की नारी शक्ति के अनेक अलौकिक चमत्कारों की बात [[लोक साहित्य|लोकसाहित्य]] में कही गई है, उसका आधार इस कामाक्षी का महत्व ही है। &amp;#039;कामरूप&amp;#039; का अर्थ ही है &amp;#039;इच्छानुसार रूप धारण कर लेना&amp;#039; और विश्वास है कि असम की नारियाँ चाहे जिसको अपनी इच्छा के अनुकूल रूप में बदल देती थीं।विश्व के सबसे प्राचीनतम तंत्र आगम मठ के अनुसार कामाख्या मे आज भी तंत्र की ऐसी शाखायें है जिनके अनुसार कुछ भी पाया जा सकता है परंतु बहुत ही कठिन है&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असम के पूर्वी भाग में अत्यंत प्राचीन काल से नारी की शक्ति की अर्चना हुई है। [[महाभारत]] में उस दिशा के स्त्रीराज्य का उल्लेख हुआ है। इसमें संदेह नहीं कि [[मातृसत्ता|मातृसत्तात्मक]] परंपरा का कोई न कोई रूप वहाँ था जो वहाँ की [[नागा]] आदि जातियों में आज भी बना है। ऐसे वातावरण में देवी का महत्व चिरस्थायी होना स्वाभाविक ही था और जब उसे शिव की पत्नी मान लिया गया तब शक्ति संप्रदाय को सहज ही शैव शक्ति की पृष्ठभूमि और मर्यादा प्राप्त हो गई। फिर जब [[वज्रयान|वज्रयानी]] प्रज्ञापारमिता और शक्ति एक कर दी गईं तब तो शक्ति गौरव का और भी प्रसार हो गया। उस शक्ति विश्वास का केंद्र गोहाटी की कामाख्या पहाड़ी का यह कामाक्षी पीठ है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें==&lt;br /&gt;
*[[कामाख्या मन्दिर]]&lt;br /&gt;
*[[कामाक्षी]]&lt;br /&gt;
*[[शाकम्भरी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;संजीव कुमार</name></author>
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