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	<title>गुप्त इसाइयत - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>imported&gt;रोहित साव27: अनिरुद्ध कुमार के अवतरण 3917605पर वापस ले जाया गया : Reverted (ट्विंकल)</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;&lt;a href=&quot;/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0&quot; title=&quot;विशेष:योगदान/अनिरुद्ध कुमार&quot;&gt;अनिरुद्ध कुमार&lt;/a&gt; के अवतरण 3917605पर वापस ले जाया गया : Reverted (&lt;a href=&quot;/w/index.php?title=WP:TW&amp;amp;action=edit&amp;amp;redlink=1&quot; class=&quot;new&quot; title=&quot;WP:TW (पृष्ठ मौजूद नहीं है)&quot;&gt;ट्विंकल&lt;/a&gt;)&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{स्रोतहीन|date=सितंबर २०१८}}&lt;br /&gt;
&amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; गुप्त इसाइयत &amp;#039;&amp;#039;&amp;#039; या (क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी) ईसाई धर्म का एक गुप्त व्यवहार है। इसमें इसाई जिस देश मे रहते हैं वहाँ वे दिखावे के तौर पर तो उस देश के ईश्वर की पूजा करते हैं, वहाँ का धर्म मानते हैं पर वास्तव में अंदर से वे ईसाई होते हैं और निरंतर ईसाई धर्म का प्रचार करते रहते हैं। अन्य धर्मों के शासकों या समाज द्वारा ईसाई धर्मावलंवियों के लिए खतरा उत्पन्न किए जाने की स्थिति में यह व्यवहार अपनाया गया। जब क्रिप्टो क्रिश्चियन 1 प्रतिशत से कम होते है तब वह उस देश के ईश्वर को अपना कर अपना काम करते रहते हैं। जब वे अधिक संख्या में हो जाते हैं तो प्रकट रूप से ईसाई धर्म को मानने लगते हैं। हॉलिवुड फिल्म &amp;#039;अगोरा&amp;#039; (2009) में गुप्त इसाइयत को दिखाया गया है।&lt;br /&gt;
== इतिहास ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== रोम ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गुप्त इसाइयत का सबसे पहला उदाहरण रोमी साम्राज्य में मिलता है जब ईसाईयत ने शुरुवाती दौर में रोम में अपने पैर रखे थे। तत्काल महान रोमी सम्राट ट्रॉजन ने ईसाईयत को रोमन संस्कृति के लिए खतरा समझा और जितने रोमी ईसाई बने थे उनके सामने प्रस्ताव रखा कि या तो वे ईसाईयत छोड़ें या मृत्यु-दंड भुगतें। रोमी ईसाईयों ने मृत्यु-दंड से बचने के लिए ईसाई धर्म छोड़ने का नाटक किया। वे ऊपर से रोमी देवी देवताओं की पूजा करते रहे, पर अंदर से ईसाईयत को मानते थे। इस विषय पर बनी हॉलिवुड फिल्म अगोरा (२००९) में दिखाया गया है कि जब गुप्त-इसाई रोम में संख्या में अधिक हो गए तब उन्होंने रोमी देवी-देवताओं का अपमान करना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;
=== जापान ===&lt;br /&gt;
संत ज़ेवियर 1550 में धर्मान्तरण के लिए जापान गया और उसने कई बौद्धों को ईसाई बनाया। 1643 में जापान के राष्ट्रवादी राजा शोगुन (Shogun) ने ईसाई धर्म का प्रचार जापान की सामाजिक एकता के लिए खतरा समझा। शोगुन ने बल का प्रयोग किया और कई चर्चो को तोड़ा गया। जीसस-मैरी की मूर्तियां जब्त करके तोड़ दी गईं। बाईबल समेत ईसाई धर्म की कई किताबें खुलेआम जलायी गईं। जितने जापानियों ने ईसाई धर्म अपना लिया था उनको प्रताड़ित किया गया। उनकी बलपूर्वक बुद्ध धर्म मे घर वापसी कराई गई। जिन्होंने मना किया, उनके सर काट दिए गए। कई ईसाइयों ने बौद्ध धर्म मे घर वापसी का नाटक किया और क्रिप्टो-क्रिश्चियन बने रहे। जापान में इन गुप्त इसाइयों को काकूरे ईसाई कहा गया।&lt;br /&gt;
काकूरे ईसाइयों ने  बौद्धों के डर से ईसाई धर्म से संबधित कोई भी किताब रखनी बन्द कर दी। जीसस और मैरी की पूजा करने के लिए इन्होंने प्रार्थना बनायी जो सुनने में बौद्ध मंत्र लगती पर इसमें बाइबल के शब्द होते थे। ये ईसाई प्रार्थनाएँ काकूरे-क्रिश्चियनों ने एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मौखिक रूप से हस्तांतरित करनी शुरू कर दी। वे बुद्ध के जैसी दिखने वाली मूर्ति, जो वास्तव में माँ मरियम की थी, की पूजा करते थे।&lt;br /&gt;
1550 से ले कर अगले 400 सालों तक काकूरे ईसाई बौद्ध धर्म के छद्मावरण में रहे। 20वीं शताब्दी में जब जापान औद्योगिकीकरण की तरफ बढ़ा और बौद्धों के धार्मिक कट्टरवाद में कमी आई तो इन काकूरे इसाइयों ने  बौद्ध धर्म के मुखौटे से बाहर निकल अपनी ईसाई पहचान उजागर की।&lt;br /&gt;
=== अन्य देशों में ===&lt;br /&gt;
बालकन और एशिया माइनर, मध्यपूर्व, सोवियत रूस, चीन, नाज़ी जर्मनी समेत भारत में भी क्रिप्टो क्रिश्चियनों की बहुतायत है। गुप्त इसाई एशिया माइनर के देशों सर्बिया में द्रोवर्तस्वो, साइप्रस में पत्सलोई, अल्बानिया में लारामनोई, लेबनान में क्रिप्टो मरोनाईट व इजिप्ट में क्रिप्टो कोप्ट्स कहलाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== इन्हें भी देखें ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[श्रेणी:ईसाई धर्म]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>imported&gt;रोहित साव27</name></author>
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